गुजरात: आदिवासी मरीजों को अंग प्रत्यारोपण व रोबोटिक सर्जरी के लिए ₹2 करोड़ की सहायता, PMJAY सीमा के बाद भी मिलेगा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 4 अगस्त 2026 को अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के मरीजों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना की शुरुआत की, जिसके तहत 2026-27 वित्तीय वर्ष में ₹2 करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह योजना आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) या राज्य की मुख्यमंत्री अमृतम (MA) योजना की सीमा समाप्त होने के बाद बकाया अंग प्रत्यारोपण और उन्नत रोबोटिक सर्जरी के खर्च को वहन करेगी।
योजना का उद्देश्य और दायरा
इस पहल का मुख्य लक्ष्य उन आदिवासी परिवारों को राहत देना है जो किडनी, लीवर, हार्ट और अग्न्याशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों के प्रत्यारोपण की भारी लागत वहन करने में असमर्थ हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में जनजातीय विकास विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल को जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल और राज्य मंत्री पीसी बरंडा ने प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की है।
आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम का नाम 'राज्य के अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित रोगियों के लिए किडनी, लीवर, हार्ट, अग्न्याशय आदि के अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी सहित ऑपरेशन के लिए सहायता प्रदान करने की योजना' रखा गया है।
वित्तीय सहायता की गणना कैसे होगी
योजना के अंतर्गत सहायता राशि की गणना PMJAY या MA कार्ड के तहत पहले से कवर की गई राशि घटाने के बाद की जाएगी। उदाहरण के तौर पर — यदि अहमदाबाद सिविल अस्पताल परिसर स्थित किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर (IKDRC) में अंग प्रत्यारोपण की लागत ₹6 लाख है और PMJAY के तहत ₹3 लाख का भुगतान होता है, तो शेष ₹3 लाख इस नई योजना से दिए जाएंगे।
निजी अस्पताल में उपचार के मामले में सहायता सरकार द्वारा अनुमोदित उपचार दर तक सीमित रहेगी। यदि कोई निजी अस्पताल ₹10 लाख वसूलता है, लेकिन IKDRC की स्वीकृत दर ₹6 लाख है और PMJAY ने ₹3 लाख चुका दिए हैं, तो लाभार्थी को योजना के तहत अधिकतम ₹3 लाख की सहायता मिलेगी।
पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
लाभ प्राप्त करने के लिए मरीज का गुजरात का निवासी और अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य होना आवश्यक है। साथ ही वैध जाति प्रमाण पत्र और PMJAY या MA कार्ड अनिवार्य है। उपचार से पूर्व IKDRC से संपर्क और पूर्व स्वीकृति लेनी होगी, तथा IKDRC प्रत्यारोपण समिति की क्लिनिकल मंजूरी भी जरूरी है।
गौरतलब है कि अंगदान करने वाले किसी भी समुदाय के हो सकते हैं, किंतु वित्तीय सहायता केवल आदिवासी लाभार्थियों को ही मिलेगी। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले बच्चों को इस योजना से बाहर रखा गया है, क्योंकि वे पहले से उस कार्यक्रम के तहत निःशुल्क उपचार के पात्र हैं।
पारदर्शिता और निगरानी तंत्र
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जाएगी। वित्तीय सहायता का वितरण डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली या CM डैशबोर्ड पोर्टल के माध्यम से होगा। इसके अतिरिक्त, योजना की समय-समय पर सामाजिक समीक्षा और थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन भी की जाएगी, जिसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में आदिवासी स्वास्थ्य अवसंरचना को लेकर बहस तेज है और PMJAY की कवरेज सीमाओं पर सवाल उठते रहे हैं। IKDRC को नोडल एजेंसी नियुक्त किए जाने से क्रियान्वयन में केंद्रीकृत जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है।