गुजरात सरकार ने विकास अनुदान दोगुना किया, मेजबान जिलों को मिलेंगे अब ₹15 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 6 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए उन जिलों के लिए विकास अनुदान दोगुना कर दिया है, जो गांधीनगर से बाहर राज्य-स्तरीय गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गुजरात राज्य स्थापना दिवस समारोहों की मेजबानी करते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी संशोधित प्रस्ताव के तहत अधिकतम अनुदान ₹7.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹15 करोड़ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लिया गया यह फैसला आधिकारिक राष्ट्रीय समारोहों को बुनियादी ढाँचे के विकास से सीधे जोड़ने की नीति का विस्तार है।
संशोधित अनुदान का ढाँचा
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, मेजबान जिले के जिला विकास अधिकारी को ग्रामीण विकास कार्यों के लिए ₹5 करोड़ मिलेंगे, जो पहले ₹2.5 करोड़ थे। इसी तरह, जिले की नगरपालिकाओं को जिला कलेक्टर के माध्यम से शहरी विकास के लिए ₹5 करोड़ आवंटित किए जाएंगे, जबकि पहले यह राशि ₹2.5 करोड़ थी।
जहाँ कार्यक्रम नगर निगम की सीमा के भीतर आयोजित होता है, वहाँ नगर निगम आयुक्त को अतिरिक्त ₹5 करोड़ के विकास अनुदान का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार नगर निगम वाले जिलों को कुल ₹15 करोड़ तक का अनुदान मिल सकता है — तीनों श्रेणियों में 100 प्रतिशत की वृद्धि।
बिना नगर निगम वाले जिलों के लिए प्रावधान
जिन जिलों में नगर निगम नहीं है, उन्हें अधिकतम ₹10 करोड़ का अनुदान मिलेगा — ग्रामीण और नगरपालिका विकास के लिए ₹5-5 करोड़ की बराबर हिस्सेदारी में। इस वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह अमरेली में आयोजित किया जाएगा। चूँकि अमरेली में कोई नगर निगम नहीं है, इसलिए उसे ग्रामीण और शहरी विकास के लिए ₹5-5 करोड़ मिलाकर कुल ₹10 करोड़ का विकास अनुदान प्राप्त होगा।
परंपरा की पृष्ठभूमि
राजधानी से बाहर राज्य-स्तरीय राष्ट्रीय समारोह आयोजित करने की यह परंपरा 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की थी। पहला ऐसा आयोजन 15 अगस्त 2003 को पाटन में हुआ था। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय समारोहों को गुजरात के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाना और साथ ही मेजबान जिलों में विकास कार्यों को गति देना था। दो दशकों से अधिक समय से यह नीति निरंतर जारी है।
नीति का व्यापक असर
राज्य सरकार के अनुसार, संशोधित आवंटन आने वाले सभी राज्य-स्तरीय समारोहों पर लागू होगा। यह नीति न केवल आयोजन की भव्यता बढ़ाती है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के निर्माण को भी प्रोत्साहन देती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकारें विकेंद्रीकृत विकास मॉडल की ओर तेज़ी से बढ़ रही हैं।