अहमदाबाद सिविल अस्पताल का 250वां अंगदान: पश्चिम बंगाल के प्रसून भौमिक के अंगों से तीन मरीजों को नई जिंदगी
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने 26 जुलाई 2026 को अपना 250वां मृत-दाता अंगदान दर्ज किया — एक ऐसी उपलब्धि जो गुजरात के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में अंगदान के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित करती है। पश्चिम बंगाल के 58 वर्षीय प्रसून भौमिक के परिवार ने उनकी ब्रेन डेथ के बाद निस्वार्थ निर्णय लेते हुए अंगदान की सहमति दी, जिससे तीन गंभीर रोगियों को जीवनरक्षक अंग प्रत्यारोपण का अवसर मिला।
कैसे हुआ यह 250वां अंगदान
प्रसून भौमिक, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी थे, अपने घर के बाथरूम में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अहमदाबाद सिविल अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती कराया गया। दो दिनों के निरंतर उपचार के बावजूद डॉक्टरों ने 26 जुलाई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
डॉ. मोहित चंपावत के नेतृत्व में अस्पताल की विशेष अंगदान टीम ने परिवार को संवेदनशीलता के साथ परामर्श दिया। शोक की उस घड़ी में भौमिक की पत्नी क्षमा ने साहसपूर्ण निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दी।
किन अंगों का प्रत्यारोपण हुआ
भौमिक से प्राप्त एक यकृत और दो गुर्दे सिविल मेडिसिटी परिसर स्थित गुर्दा रोग एवं अनुसंधान केंद्र (IKDRC) में उपचाराधीन तीन रोगियों में प्रत्यारोपित किए जाएंगे। यह प्रत्यारोपण उन रोगियों के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है जो लंबे समय से प्रतीक्षा सूची में थे।
अब तक का सफर: 827 अंग, 250 दाता
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार, अब तक 250 मृत दाताओं से कुल 827 अंग प्राप्त हुए हैं। इनमें 224 यकृत, 462 गुर्दे, 21 अग्न्याशय, 78 हृदय, 34 फेफड़े, 6 हाथ और 2 छोटी आंतें शामिल हैं। डॉ. जोशी ने कहा, 'यह 250वां अंगदान मात्र एक संख्या नहीं, बल्कि बढ़ती जन जागरूकता, डॉक्टरों पर बढ़ते विश्वास और निस्वार्थ सेवा की भावना का प्रतीक है।'
सरकार की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने इस उपलब्धि को गुजरात के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग तक यह संदेश पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि अंगदान सबसे बड़ा दान है। मैं उन सभी परिवारों को तहे दिल से सलाम करता हूं जिन्होंने अपने प्रियजन को खोने के अपार दर्द के बावजूद अंगों को दान करने का निस्वार्थ निर्णय लिया।'
आगे की राह
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारत में अंगदान की दर अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है। अहमदाबाद सिविल अस्पताल का यह मील का पत्थर दर्शाता है कि सार्वजनिक अस्पताल भी अंगदान के क्षेत्र में निजी संस्थाओं के समकक्ष भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियाँ अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती हैं।