24 अक्टूबर 2026
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गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में पूर्वोत्तर का पहला सरकारी लिवर ट्रांसप्लांट, 16 घंटे चली सर्जरी सफल

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गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में पूर्वोत्तर का पहला सरकारी लिवर ट्रांसप्लांट, 16 घंटे चली सर्जरी सफल

सारांश

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज ने पूर्वोत्तर के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया। 16 घंटे चली इस जटिल सर्जरी ने उस क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का नया अध्याय खोला, जहाँ मरीज़ों को अब तक ट्रांसप्लांट के लिए दक्षिण या पश्चिम भारत जाना पड़ता था।

मुख्य बातें

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) ने 24 अक्टूबर 2026 को पूर्वोत्तर भारत के किसी सरकारी अस्पताल में पहला लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न किया।
सेंथिल कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने की, जो 16 घंटे तक चली।
लिवर देने वाले और लेने वाले, दोनों की स्थिति में सुधार; दोनों आईसीयू में निगरानी में हैं।
असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने इसे राज्य की चिकित्सा सेवाओं में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
इस उपलब्धि से पूर्वोत्तर के मरीज़ों को ट्रांसप्लांट के लिए बाहरी राज्यों में जाने की ज़रूरत कम होगी।

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) ने 24 अक्टूबर 2026 को पूर्वोत्तर भारत के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न किया। डॉ. सेंथिल कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सा दल ने यह जटिल सर्जरी 16 घंटे में पूरी की, और असम की चिकित्सा सेवाओं के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा।

सर्जरी का विवरण और मरीज़ों की स्थिति

डॉ. सेंथिल कुमार की टीम के नेतृत्व में की गई यह सर्जरी 16 घंटे तक चली। लिवर देने वाले और लेने वाले, दोनों की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है और फिलहाल दोनों आईसीयू (ICU) में निगरानी में हैं। असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने इस अवसर पर कहा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि GMCH में कल रात डॉ. सेंथिल कुमार की टीम के नेतृत्व में सफलतापूर्वक लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।"

उन्होंने आगे कहा, "लिवर लेने वाले और देने वाले, दोनों की हालत में सुधार हो रहा है और वे आईसीयू में हैं। मैं उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।"

ऐतिहासिक महत्व: पूर्वोत्तर के लिए मील का पत्थर

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि अब तक पूर्वोत्तर भारत के मरीज़ों को जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए चेन्नई, मुंबई या दिल्ली जैसे दूरदराज़ के शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। गौरतलब है कि GMCH क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, और इस सर्जरी की सफलता यहाँ के बुनियादी ढाँचे में आए बदलाव को रेखांकित करती है।

स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "असम की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर। किसी सरकारी अस्पताल में पूर्वोत्तर के पहले लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक संपन्न करना असम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।"

सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ

असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा दल को बधाई देते हुए इसे GMCH और असम की चिकित्सा सेवाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य आगे भी इसी तरह के मील के पत्थर हासिल करता रहेगा।

सिंघल ने एक्स पोस्ट में यह भी उल्लेख किया, "मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के दूरदर्शी नेतृत्व में, हमने स्थानीय स्तर पर उन्नत ट्रांसप्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का मिशन शुरू किया था। आज की यह सफलता तो बस एक शुरुआत है।"

आम जनता पर असर

लिवर ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रियाएं पहले पूर्वोत्तर में उपलब्ध न होने के कारण मरीज़ों और उनके परिवारों को भारी खर्च और लंबी यात्रा का सामना करना पड़ता था। अब GMCH में यह सुविधा उपलब्ध होने से असम सहित पूरे पूर्वोत्तर के मरीज़ों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत उपचार मिल सकेगा।

आगे की राह

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, यह सफलता आगे और जटिल सर्जरी की नींव रखती है। सरकार हर नागरिक के लिए विश्व स्तरीय और विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। GMCH की इस उपलब्धि से पूर्वोत्तर में ट्रांसप्लांट सेवाओं के और विस्तार की उम्मीद जागी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुलभ सेवा में बदल पाती है या महज एक राजनीतिक उपलब्धि बनकर रह जाती है। ट्रांसप्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर केवल एक सफल सर्जरी से नहीं बनता — इसके लिए अंग दान की संस्कृति, प्रशिक्षित जनशक्ति और दीर्घकालिक वित्त पोषण की ज़रूरत होती है, जिन पर सरकार को अभी ठोस रोडमैप देना बाकी है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GMCH में हुआ लिवर ट्रांसप्लांट क्यों ऐतिहासिक है?
यह पूर्वोत्तर भारत के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार सफलतापूर्वक किया गया लिवर ट्रांसप्लांट है। इससे पहले इस क्षेत्र के मरीज़ों को ऐसी जटिल सर्जरी के लिए दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जाना पड़ता था।
GMCH का लिवर ट्रांसप्लांट किसने किया और कितने समय में?
सर्जरी डॉ. सेंथिल कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सा दल ने की, जो कुल 16 घंटे तक चली। सर्जरी 23 24 अक्टूबर 2026 की रात को संपन्न हुई।
ट्रांसप्लांट के बाद मरीज़ों की स्थिति कैसी है?
स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल के अनुसार, लिवर देने वाले और लेने वाले दोनों की स्थिति में सुधार हो रहा है और दोनों आईसीयू में चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
इस उपलब्धि का पूर्वोत्तर के मरीज़ों पर क्या असर पड़ेगा?
अब तक असम सहित पूर्वोत्तर के मरीज़ों को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था, जिसमें भारी खर्च और लंबी यात्रा शामिल थी। GMCH में यह सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र के मरीज़ों को स्थानीय स्तर पर उन्नत उपचार मिल सकेगा।
असम सरकार का ट्रांसप्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर क्या विज़न है?
स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में स्थानीय स्तर पर उन्नत ट्रांसप्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का मिशन शुरू किया गया था और यह सफलता उसी दिशा में एक शुरुआत है। सरकार हर नागरिक के लिए विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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