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दीपोत्सव 2026: अयोध्या की विरासत को रंगों व रीलों से दुनिया तक पहुँचाएगा UP पर्यटन विभाग

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दीपोत्सव 2026: अयोध्या की विरासत को रंगों व रीलों से दुनिया तक पहुँचाएगा UP पर्यटन विभाग

सारांश

दीपोत्सव 2026 को वैश्विक मंच पर ले जाने की कोशिश में उत्तर प्रदेश सरकार ने रंग और रील दोनों का सहारा लिया है। चित्रकला और रील मेकिंग प्रतियोगिताओं के ज़रिए रामनगरी की विरासत को जन-जन तक पहुँचाने का लक्ष्य है, और विजेताओं को CM योगी की उपस्थिति में सम्मान मिलेगा।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने दीपोत्सव 2026 के तहत चित्रकला और रील मेकिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित की हैं।
चित्रकला थीम 'कला के माध्यम से अयोध्या का उत्सव' ; रील थीम 'नए रूप में अयोध्या' — रील की अवधि 30 से 60 सेकंड ।
प्रविष्टियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर 2026 ; सभी आयु वर्ग भाग ले सकते हैं।
AI-जनित और कॉपीराइट सामग्री वाली प्रविष्टियाँ अमान्य होंगी।
विजेताओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में दीपोत्सव समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने पहल का उद्देश्य अयोध्या को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान दिलाना बताया।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने दीपोत्सव 2026 के अवसर पर देशभर के कला प्रेमियों और रचनात्मक प्रतिभाओं के लिए चित्रकला और रील मेकिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित की हैं, जिनका उद्देश्य अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक वैभव और विकास की नई तस्वीर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है। दोनों प्रतियोगिताओं में प्रविष्टियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है, और विजेताओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में सम्मानित किया जाएगा।

प्रतियोगिताओं का स्वरूप और थीम

चित्रकला प्रतियोगिता की थीम 'कला के माध्यम से अयोध्या का उत्सव' रखी गई है। प्रतिभागियों को जलरंग (वॉटर कलर) माध्यम से एक मौलिक पेंटिंग तैयार करनी होगी, जिसमें अयोध्या की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक परंपराएँ, विकास की नई तस्वीर या दीपोत्सव की भव्यता को दर्शाया जा सके। पहले से प्रकाशित, नकल की गई अथवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार कलाकृतियाँ स्वीकार नहीं की जाएँगी।

रील मेकिंग प्रतियोगिता की थीम 'नए रूप में अयोध्या' है। इसमें प्रतिभागियों को 30 से 60 सेकंड की मौलिक रील तैयार करनी होगी, जिसमें अयोध्या के विकास, प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और दीपोत्सव 2026 के आयोजनों की झलक हो। रील में कॉपीराइट-मुक्त संगीत और दृश्यों का ही उपयोग अनिवार्य है। AI-जनित सामग्री का अत्यधिक उपयोग करने वाली प्रविष्टियाँ भी मान्य नहीं होंगी।

भागीदारी और पुरस्कार व्यवस्था

दोनों प्रतियोगिताएँ सभी आयु वर्गों के लिए खुली हैं। इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित क्यूआर कोड स्कैन कर या आधिकारिक लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विजेताओं को दीपोत्सव के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में सम्मानित किया जाएगा, जो इन प्रतियोगिताओं को विशेष महत्त्व प्रदान करता है।

सरकार का उद्देश्य और दृष्टिकोण

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या भारत की आस्था, संस्कृति और गौरवशाली विरासत के प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और रचनात्मकता के माध्यम से रामनगरी की विकास यात्रा को जन-जन तक पहुँचाना और वैश्विक पटल पर उसकी पहचान को और सुदृढ़ करना है।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि ये प्रतियोगिताएँ जनसहभागिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करेंगी। उनका विश्वास है कि देशभर की प्रतिभाएँ अपनी कल्पनाशीलता से अयोध्या की परंपराओं और दीपोत्सव को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

व्यापक संदर्भ: अयोध्या की बदलती छवि

गौरतलब है कि राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अयोध्या भारत के सबसे चर्चित धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में से एक बन गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल ऐसे समय में आई है जब राज्य अपनी सांस्कृतिक कूटनीति को डिजिटल माध्यमों से वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने के प्रयास में जुटी है। दीपोत्सव पहले भी गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुका है, और इस बार जन-भागीदारी के ज़रिए इसे और व्यापक बनाने की कोशिश है।

आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे 2 नवंबर की अंतिम तिथि निकट आएगी, प्रतिभागियों की संख्या और प्रविष्टियों की गुणवत्ता यह तय करेगी कि यह पहल अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय पहचान को किस हद तक नई ऊँचाई दे पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ 'सॉफ्ट पावर' को जमीनी भागीदारी से जोड़ा जा रहा है। अयोध्या को वैश्विक पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश में यह प्रतियोगिताएँ एक चतुर कदम हैं — सरकारी विज्ञापन के बजाय नागरिकों से ही 'कंटेंट' तैयार करवाना। हालाँकि, असली परीक्षा यह होगी कि क्या इन प्रविष्टियों की पहुँच और गुणवत्ता दीपोत्सव की वास्तविक अंतरराष्ट्रीय दृश्यता बढ़ा पाती है, या यह एक और प्रतीकात्मक आयोजन बनकर रह जाती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपोत्सव 2026 की चित्रकला और रील मेकिंग प्रतियोगिता में कौन भाग ले सकता है?
दोनों प्रतियोगिताएँ सभी आयु वर्गों के लिए खुली हैं। देशभर के कला प्रेमी और रचनात्मक प्रतिभाएँ उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के आधिकारिक लिंक या क्यूआर कोड के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
दीपोत्सव 2026 प्रतियोगिता की अंतिम तिथि क्या है?
प्रविष्टियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद प्राप्त प्रविष्टियाँ मान्य नहीं होंगी।
चित्रकला प्रतियोगिता की थीम और नियम क्या हैं?
चित्रकला प्रतियोगिता की थीम 'कला के माध्यम से अयोध्या का उत्सव' है। प्रतिभागियों को जलरंग (वॉटर कलर) माध्यम से मौलिक पेंटिंग तैयार करनी होगी। AI-जनित, नकल की गई या पहले से प्रकाशित कलाकृतियाँ स्वीकार नहीं की जाएँगी।
रील मेकिंग प्रतियोगिता के लिए क्या दिशा-निर्देश हैं?
रील मेकिंग प्रतियोगिता की थीम 'नए रूप में अयोध्या' है और रील की अवधि 30 से 60 सेकंड होनी चाहिए। वीडियो में कॉपीराइट-मुक्त संगीत और दृश्यों का ही उपयोग अनिवार्य है; AI-जनित सामग्री के अत्यधिक उपयोग वाली प्रविष्टियाँ भी अमान्य होंगी।
विजेताओं को पुरस्कार कैसे और कहाँ दिया जाएगा?
विजेताओं को दीपोत्सव के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान समारोह दीपोत्सव 2026 के भव्य आयोजन का हिस्सा होगा।
राष्ट्र प्रेस
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