11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुवेंदु अधिकारी के जनता दरबार में फरियाद: बेटे के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ₹20 लाख की मदद माँगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुवेंदु अधिकारी के जनता दरबार में फरियाद: बेटे के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ₹20 लाख की मदद माँगी

सारांश

कोलकाता के BJP मुख्यालय में सुवेंदु अधिकारी के जनता दरबार में एक पिता की दर्दनाक फरियाद — बेटे के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ₹20 लाख चाहिए, 10–15 दिन बचे हैं। एक अन्य नागरिक ने TMC नेता किराएदार द्वारा 4 साल से घर न खाली करने की शिकायत की।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 24 जून 2026 को कोलकाता में BJP मुख्यालय पर 'जनता दरबार' आयोजित किया।
सुभजीत रॉय ने बेटे के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ₹18–20 लाख की सहायता माँगी; ILBS ने 30 दिन में ऑपरेशन की सलाह दी है।
समयसीमा के 15 दिन बीत चुके हैं, केवल 10–15 दिन शेष हैं और परिवार के पास धन नहीं बचा।
सायंतन जाना ने आरोप लगाया कि कथित TMC नेता देवजीत पांडेय 4 वर्षों से उनका घर खाली नहीं कर रहे।
बिहाला थाने में 2023 में FIR के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार, 24 जून 2026 को कोलकाता स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्यालय में 'जनता दरबार' का आयोजन किया, जिसमें राज्यभर से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएँ रखीं। इस दरबार में एक लाचार पिता ने अपने बेटे के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ₹18–20 लाख की सहायता की गुहार लगाई, जबकि एक अन्य फरियादी ने TMC नेता द्वारा घर न खाली करने की शिकायत दर्ज कराई।

मजबूर पिता की फरियाद

जनता दरबार में पहुँचे सुभजीत रॉय ने बताया कि उनके बेटे को जन्म से ही लिवर की गंभीर बीमारी है और अब स्थिति अत्यंत नाज़ुक हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'मेरे बच्चे का लिवर अब पूरी तरह खराब हो गया है। मैंने PG हॉस्पिटल और एम्स दिल्ली समेत कई सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया है।'

इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलरी साइंसेज (ILBS) के डॉक्टरों ने 30 दिनों के भीतर लिवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी है। रॉय ने बताया कि उस समयसीमा के लगभग 15 दिन पहले ही बीत चुके हैं और अब केवल 10–15 दिन शेष हैं। उन्होंने कहा, 'इलाज का खर्च लगभग ₹18–20 लाख या उससे अधिक है। मैंने अपनी सारी बचत खर्च कर दी, सामान बेच दिया और कर्ज भी लिया, लेकिन अब मेरे पास कुछ नहीं बचा।'

किराएदार TMC नेता पर आरोप, पुलिस निष्क्रिय

एक अन्य फरियादी सायंतन जाना ने बताया कि उन्होंने 2018 में अपना घर एक स्थानीय निवासी देवजीत पांडेय को किराए पर दिया था, जो कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता हैं। जाना के अनुसार, पांडेय पिछले 4 वर्षों से न किराया दे रहे हैं और न ही मकान खाली कर रहे हैं।

जाना ने कहा कि उन्होंने कई बार थाने में शिकायत दी और 2023 में बिहाला थाने में FIR भी दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस का रुख यह रहा कि बिना अदालती आदेश के घर खाली नहीं कराया जा सकता। जाना ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की।

जनता दरबार की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित रूप से 'जनता दरबार' का आयोजन करते हैं। इन दरबारों में वे शिकायतें सुनकर संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश देते हैं। यह आयोजन उनकी जन-संपर्क रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।

आम जनता पर असर

इस दरबार में उठे मामले राज्य में दो बड़ी समस्याओं को रेखांकित करते हैं — एक ओर गरीब परिवारों के लिए महँगे चिकित्सा उपचार की अनुपलब्धता, और दूसरी ओर राजनीतिक संरक्षण के कारण संपत्ति विवादों में पुलिस की निष्क्रियता। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या होगा

सुभजीत रॉय के मामले में समय अत्यंत सीमित है — डॉक्टरों की दी गई समयसीमा के भीतर ट्रांसप्लांट न हो पाने पर बच्चे की जान को खतरा है। सायंतन जाना के मामले में देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय पुलिस को प्रभावी कार्रवाई के लिए निर्देशित करता है या नहीं। दोनों मामलों में अधिकारी के हस्तक्षेप की दिशा स्पष्ट होना अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और परिवार अंततः राजनीतिक दरबारों का दरवाज़ा खटखटाने पर मजबूर होते हैं। सायंतन जाना का मामला एक और परत जोड़ता है — यदि आरोप सत्य हैं, तो यह संकेत देता है कि राजनीतिक संरक्षण के आगे किरायेदारी कानून कमज़ोर पड़ जाते हैं। जनता दरबार जवाबदेही का एक प्रतीकात्मक मंच है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इन मामलों में संस्थागत समाधान मिलता है या केवल व्यक्तिगत हस्तक्षेप।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुवेंदु अधिकारी का जनता दरबार क्या है?
जनता दरबार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा नियमित रूप से आयोजित एक सार्वजनिक शिकायत सुनवाई है, जिसमें नागरिक सीधे अपनी समस्याएँ रखते हैं और अधिकारी संबंधित विभागों को तत्काल समाधान के निर्देश देते हैं। यह कोलकाता में BJP मुख्यालय पर आयोजित होता है।
सुभजीत रॉय के बेटे को कितने पैसों की ज़रूरत है और समय कितना बचा है?
ILBS के डॉक्टरों ने 30 दिनों के भीतर लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी है, जिसमें से लगभग 15 दिन बीत चुके हैं। इलाज का अनुमानित खर्च ₹18–20 लाख या उससे अधिक है और परिवार की सारी बचत, संपत्ति और लिया गया कर्ज भी चुक चुका है।
सायंतन जाना का मकान विवाद क्या है?
सायंतन जाना ने 2018 में अपना घर देवजीत पांडेय को किराए पर दिया था, जो कथित तौर पर TMC नेता हैं। पांडेय पिछले 4 वर्षों से न किराया दे रहे हैं और न घर खाली कर रहे हैं। 2023 में बिहाला थाने में FIR के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ILBS क्या है और यह मामले में क्यों महत्वपूर्ण है?
इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलरी साइंसेज (ILBS) नई दिल्ली स्थित एक प्रमुख सरकारी विशेषज्ञ संस्थान है जो लिवर रोगों के उपचार में विशेषज्ञता रखता है। इसी संस्थान के डॉक्टरों ने सुभजीत रॉय के बेटे को 30 दिनों के भीतर ट्रांसप्लांट की सलाह दी, जो मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।
क्या जनता दरबार में उठाई गई समस्याओं का समाधान होता है?
मुख्यमंत्री अधिकारी जनता दरबार में शिकायतें सुनकर अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश देते हैं। हालाँकि, सायंतन जाना और सुभजीत रॉय के मामलों में अभी तक किसी ठोस कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले