कोलकाता पुलिस सुधार: BJP सरकार ने लौटाई 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' की साख, 20,000 नई भर्तियाँ
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस में 9 मई 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई पश्चिम बंगाल सरकार के सत्ता संभालने के बाद से व्यापक सुधार प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन सुधारों का केंद्रीय लक्ष्य उस ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना है जिसके कारण इस बल को कभी 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' कहा जाता था — एक उपाधि जो इसके सुव्यवस्थित डिटेक्टिव विभाग और अपराध-अन्वेषण में दक्षता के लिए अर्जित की गई थी।
पंद्रह वर्षों की विरासत और छवि का संकट
2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षीय शासनकाल में कोलकाता पुलिस की साख को कई मोर्चों पर गहरी चोट लगी। सबसे गंभीर मामला आरजी कर बलात्कार और हत्या प्रकरण की जाँच में बरती गई कथित लापरवाही का था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर बल की आलोचना को जन्म दिया।
2023 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राजशेखर मंथा के आवास पर आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वाले आरोपियों की पहचान करने में खुफिया विफलता के लिए भी पुलिस को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी। गौरतलब है कि यह घटना उन फैसलों की श्रृंखला के बाद हुई जो जस्टिस मंथा ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के विरुद्ध सुनाए थे। इसके अलावा, आलोचकों का कहना है कि सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को TMC सरकार के विरोधियों को धमकाने के लिए भेजा गया — एक आरोप जिसने बल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
मुख्य सुधार: क्या-क्या बदला
नई सरकार ने सबसे पहले वर्दी संहिता को पुनः सख्ती से लागू किया है। एक आधिकारिक आदेश के तहत अब सभी स्तरों के पुलिसकर्मियों को सरकारी ड्यूटी — चाहे वह छापेमारी हो, गिरफ्तारी हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखना हो — पर अनिवार्य रूप से वर्दी में उपस्थित रहना होगा। इस नियम से केवल पाँच विशेष विभागों को छूट दी गई है: डिटेक्टिव डिपार्टमेंट, स्पेशल ब्रांच, एनफोर्समेंट ब्रांच, स्पेशल टास्क फोर्स और साइबर क्राइम डिवीजन। इन पाँच विभागों के अतिरिक्त किसी अधिकारी को बिना वर्दी के ड्यूटी करनी हो तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
नई सरकार ने आरजी कर केस की फाइलें पुनः खोलने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उस समय के पुलिस आयुक्त विनीत कुमार गोयल सहित तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
ईमानदार अधिकारियों की वापसी और जाँच आयोग
TMC शासन में हाशिये पर धकेले गए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को वापस बुलाया गया है। दमयंती सेन और के. जयरामन — जिन्हें आमतौर पर ईमानदार अधिकारी माना जाता है — को दो अलग-अलग जाँच आयोगों का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। ये आयोग उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में TMC के 15 वर्षीय शासन के दौरान हुए कथित 'संस्थागत भ्रष्टाचार' और 'महिलाओं के विरुद्ध अपराधों' की जाँच करेंगे।
पुलिस कल्याण बोर्ड भंग, शांतनु सिन्हा विश्वास ED हिरासत में
मुख्यमंत्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने की घोषणा की है। बताया जाता है कि यह बोर्ड TMC शासनकाल में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास के नियंत्रण में था। सिन्हा विश्वास इस समय मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि कब्जे से जुड़े मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अत्यंत विश्वासपात्र माना जाता था। ED द्वारा गिरफ्तारी के बाद नई सरकार ने उनकी दो वर्षीय सेवा विस्तार अवधि भी समाप्त कर दी।
20,000 नई भर्तियाँ और आधुनिकीकरण का रोडमैप
डायमंड हार्बर में आयोजित एक प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि अगले छह माह से एक वर्ष के भीतर राज्य के विभिन्न हिस्सों में 20,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बल के आधुनिकीकरण और पुलिसकर्मियों की शारीरिक फिटनेस पर विशेष जोर देते हुए कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी विशेष पुलिस बल विकसित किए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि कोलकाता पुलिस के नाम ऐतिहासिक रूप से कई वैश्विक उपलब्धियाँ दर्ज हैं — इसमें आपराधिक फोरेंसिक विज्ञान की शुरुआत और विश्व के पहले फिंगरप्रिंट ब्यूरो की स्थापना शामिल है। अब यह देखना होगा कि नई सरकार के ये सुधार उस ऐतिहासिक विरासत को व्यवहार में पुनर्जीवित कर पाते हैं या नहीं।