19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता पुलिस सुधार 2026: 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' की विरासत वापस लाने की BJP सरकार की मुहिम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता पुलिस सुधार 2026: 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' की विरासत वापस लाने की BJP सरकार की मुहिम

सारांश

15 साल की TMC सरकार के बाद पश्चिम बंगाल में BJP की नई सरकार ने कोलकाता पुलिस को 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' की पुरानी प्रतिष्ठा दिलाने की मुहिम छेड़ी है — वर्दी कोड, 20,000 नई भर्तियाँ, ईमानदार IPS अधिकारियों की वापसी और जाँच आयोग इस बदलाव के अगुवा हैं।

मुख्य बातें

9 मई 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP सरकार के कार्यभार संभालने के बाद कोलकाता पुलिस में सुधारों की शृंखला शुरू।
सादी वर्दी में ड्यूटी पर प्रतिबंध; डिटेक्टिव डिपार्टमेंट, स्पेशल ब्रांच, STF और साइबर क्राइम डिवीजन को छूट।
अगले 6 से 12 महीनों में पुलिस बल में 20,000 नई भर्तियों की घोषणा।
पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड भंग; पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास ED हिरासत में।
IPS अधिकारी दमयंती सेन और के.
जयरामन को TMC काल के कथित भ्रष्टाचार और महिला अपराधों की जाँच के लिए दो आयोगों का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया।
तत्कालीन पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल सहित तीन IPS अधिकारी निलंबित; आरजी कर केस की फाइलें फिर से खोली गईं।

कोलकाता पुलिस में 9 मई 2026 से सुधारों की एक व्यापक शृंखला शुरू हो गई है — यह वही दिन था जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने पश्चिम बंगाल में कार्यभार संभाला। इन सुधारों का केंद्रीय लक्ष्य उस ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करना है जिसके कारण कोलकाता पुलिस को कभी 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' कहा जाता था। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 2011 से 2026 तक के 15 वर्षीय शासन में पुलिस बल की छवि को कई विवादों ने धूमिल किया था।

15 साल में कैसे धुंधली पड़ी छवि

पिछले डेढ़ दशक में कोलकाता पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे। सबसे चर्चित मामला आरजी कर अस्पताल रेप और हत्या केस की जाँच में कथित लापरवाही का था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

2023 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राजशेखर मंथा के आवास पर आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वाले बदमाशों की पहचान करने में पुलिस की खुफिया विफलता की भी तीखी आलोचना हुई। गौरतलब है कि यह घटना जस्टिस मंथा के उन फैसलों के बाद हुई थी जो तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के विरुद्ध थे। इसके अलावा, आलोचकों का कहना है कि सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों का उपयोग विपक्षी नेताओं और सरकार के आलोचकों को धमकाने के लिए किया गया।

मुख्य सुधार: वर्दी कोड से लेकर फिटनेस तक

नई सरकार ने सबसे पहले पुलिस वर्दी संहिता को सख्ती से फिर से लागू किया है। एक नए आदेश के तहत, डिटेक्टिव डिपार्टमेंट, स्पेशल ब्रांच, एनफोर्समेंट ब्रांच, स्पेशल टास्क फोर्स और साइबर क्राइम डिवीजन को छोड़कर सभी पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। छापेमारी, गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था संबंधी किसी भी कार्य के लिए सादी वर्दी में जाने पर प्रतिबंध है; अपवाद के लिए वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

मुख्यमंत्री अधिकारी ने डायमंड हार्बर में एक प्रशासनिक बैठक में पुलिसकर्मियों को शारीरिक फिटनेस बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह दुनिया के विभिन्न देशों में विशेष प्रकार के पुलिस बल होते हैं, उसी तर्ज पर पश्चिम बंगाल पुलिस को भी आधुनिक और सक्षम बनाया जाएगा।

20,000 नई भर्तियाँ और कल्याण बोर्ड भंग

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अगले छह महीने से एक वर्ष के भीतर राज्य के विभिन्न हिस्सों में पुलिसकर्मियों की संख्या में 20,000 की वृद्धि की जाएगी। साथ ही, पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने की घोषणा की गई है।

बताया जाता है कि यह बोर्ड कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास द्वारा संचालित था, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे। सिन्हा विश्वास इस समय मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि कब्जे से जुड़े मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद नई सरकार ने उनकी दो वर्षीय सेवा विस्तार अवधि भी समाप्त कर दी।

ईमानदार अधिकारियों की वापसी और जाँच आयोग

नई सरकार ने TMC शासनकाल में हाशिए पर धकेले गए कुछ वरिष्ठ IPS अधिकारियों को पुनः सक्रिय किया है। दमयंती सेन और के. जयरामन — जिन्हें आमतौर पर ईमानदार अधिकारी माना जाता है — को दो अलग-अलग आयोगों का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इन आयोगों की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।

ये आयोग TMC सरकार के 15 वर्षीय शासन के दौरान कथित 'संस्थागत भ्रष्टाचार' और 'महिलाओं के विरुद्ध अपराधों' की जाँच करेंगे। इससे पहले, नई सरकार ने आरजी कर केस की फाइलें फिर से खोलने का आदेश दिया था और तत्कालीन पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल सहित तीन IPS अधिकारियों को निलंबित किया था।

ऐतिहासिक गौरव और आगे की राह

कोलकाता पुलिस का इतिहास उल्लेखनीय रहा है — इसके नाम आपराधिक फोरेंसिक्स की शुरुआत और दुनिया के पहले फिंगरप्रिंट ब्यूरो की स्थापना जैसी उपलब्धियाँ दर्ज हैं। इसी कारण इसे 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' की संज्ञा मिली थी। अब नई सरकार के सुधार कार्यक्रम की असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये कदम केवल प्रशासनिक आदेशों तक सीमित रहते हैं या जमीन पर वास्तविक बदलाव लाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि वर्दी कोड और फिटनेस निर्देश प्रशासनिक आदेश हैं — संस्थागत संस्कृति बदलना कहीं अधिक जटिल काम है। आरजी कर जैसे मामलों में जो खामियाँ उजागर हुईं, वे केवल व्यक्तिगत अधिकारियों की विफलता नहीं थीं, बल्कि राजनीतिक दबाव में झुकने वाली एक पूरी व्यवस्था की कहानी थी। नई सरकार ने TMC-युग के अधिकारियों पर कार्रवाई की है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या जाँच आयोग स्वतंत्र रूप से काम कर पाते हैं और क्या 20,000 नई भर्तियाँ गुणवत्ता के साथ होती हैं। इतिहास बताता है कि सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस सुधार की घोषणाएँ अक्सर राजनीतिक प्रतिशोध और वास्तविक संस्थागत सुधार के बीच की महीन रेखा पर चलती हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता पुलिस को 'स्कॉटलैंड यार्ड ऑफ द ईस्ट' क्यों कहा जाता था?
कोलकाता पुलिस को यह उपाधि उसके सुव्यवस्थित डिटेक्टिव डिपार्टमेंट और अपराध अनुसंधान में दक्षता के कारण मिली थी। इसके नाम आपराधिक फोरेंसिक्स की शुरुआत और दुनिया के पहले फिंगरप्रिंट ब्यूरो की स्थापना जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज हैं।
नई BJP सरकार ने कोलकाता पुलिस में कौन-से प्रमुख सुधार किए हैं?
नई सरकार ने पुलिस वर्दी संहिता सख्ती से लागू की है, सादी वर्दी में ड्यूटी पर प्रतिबंध लगाया है, 20,000 नई भर्तियों की घोषणा की है और पुलिस कल्याण बोर्ड भंग किया है। इसके साथ ही, TMC काल में हाशिए पर धकेले गए ईमानदार IPS अधिकारियों को पुनः सक्रिय किया गया है।
आरजी कर केस में कोलकाता पुलिस की क्या भूमिका रही और नई सरकार ने क्या कदम उठाए?
आरजी कर अस्पताल रेप और हत्या मामले की जाँच में कथित लापरवाही के लिए कोलकाता पुलिस की व्यापक आलोचना हुई थी। नई BJP सरकार ने इस केस की फाइलें फिर से खोलने का आदेश दिया है और तत्कालीन पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल सहित तीन IPS अधिकारियों को निलंबित किया है।
पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को क्यों भंग किया गया?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बोर्ड को भंग करने की घोषणा की क्योंकि बताया जाता है कि यह TMC सरकार के कार्यकाल में पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास द्वारा संचालित था। सिन्हा विश्वास इस समय मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि कब्जे के मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में ED की हिरासत में हैं।
TMC काल के भ्रष्टाचार की जाँच के लिए कौन-से आयोग बनाए गए हैं?
दो जाँच आयोग गठित किए गए हैं जिनकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। IPS अधिकारी दमयंती सेन और के. जयरामन को इन आयोगों का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है, जो TMC के 15 वर्षीय शासन में कथित 'संस्थागत भ्रष्टाचार' और 'महिलाओं के विरुद्ध अपराधों' की जाँच करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले