24 अक्टूबर 2026
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लोकभवन शाकाहारी आदेश पर कांग्रेस का हमला: 'केरल में RSS एजेंडा थोपने की कोशिश'

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लोकभवन शाकाहारी आदेश पर कांग्रेस का हमला: 'केरल में RSS एजेंडा थोपने की कोशिश'

सारांश

केरल के लोकभवन में शाकाहारी रसोई अनिवार्य करने का आदेश अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने इसे 'संघ परिवार का एजेंडा थोपना' बताया और बहुदलीय विरोध का संकेत दिया। यह सिर्फ खानपान का सवाल नहीं — बल्कि संवैधानिक स्वतंत्रता और राज्यपाल के अधिकारों की सीमा का सवाल बन चुका है।

मुख्य बातें

कांग्रेस राज्यसभा सांसद जेबी माथर ने 24 अक्टूबर 2026 को केरल के लोकभवन में शाकाहारी रसोई अनिवार्य करने के आदेश की कड़ी आलोचना की।
माथर ने इसे ' संघ परिवार (आरएसएस) का एजेंडा थोपने की कोशिश' बताते हुए कहा कि इसे शुरुआत में ही रोका जाएगा।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और नेता रमेश चेनिथला समेत कई दलों के नेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन जारी है।
1 नवंबर को राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली पर व्यापारिक संगठनों की दिवाली के बाद तक टालने की अपील पर माथर ने कहा — चिंताओं पर गौर किया जाएगा।

कांग्रेस पार्टी ने केरल के लोकभवन में शाकाहारी रसोई लागू करने के आदेश पर तीखी आपत्ति जताई है। पार्टी की राज्यसभा सांसद जेबी माथर ने 24 अक्टूबर 2026 को कहा कि यह केरल पर 'संघ परिवार' (आरएसएस) की विचारधारा जबरदस्ती थोपने का प्रयास है, जिसे कांग्रेस शुरुआत में ही नाकाम कर देगी। यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब केरल की सांस्कृतिक विविधता और राज्यपाल के अधिकारों को लेकर पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है।

विवाद की जड़ क्या है

लोकभवन, जो केरल के राज्यपाल का आधिकारिक आवास और कार्यालय है, में शाकाहारी रसोई अनिवार्य करने का आदेश जारी किया गया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह निर्णय राज्य की बहुलतावादी खान-पान परंपराओं के विरुद्ध है। केरल में मछली, चिकन और बीफ सहित मांसाहारी भोजन सदियों से सभी समुदायों की खाद्य संस्कृति का हिस्सा रहा है।

जेबी माथर के मुख्य बयान

सांसद जेबी माथर ने कहा, 'हम क्या खाएं, किस धर्म का पालन करें, कौन सी भाषा बोलें, कैसे कपड़े पहनें — यह सब हर नागरिक की अपनी निजी राय और उसकी स्वतंत्रता का मामला है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि राज्यपाल व्यक्तिगत रूप से शाकाहारी हैं तो यह उनका अधिकार है, किंतु एक उच्च संवैधानिक पद से इस प्रकार की शर्तें सभी पर लागू करना 'विचारधारा थोपना' है।

माथर ने आगे कहा, 'इस तरह की शर्तें थोपना असल में राज्य पर अपनी विचारधारा जबरदस्ती लागू करने की कोशिश है — यह एक खतरा है, और हमें इसे शुरुआत में ही कुचल देना चाहिए।' उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, नेता रमेश चेनिथला और अन्य दलों के नेताओं ने भी इस मामले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, जो दर्शाता है कि विरोध केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है।

सीईसी के खिलाफ विरोध और व्यापक राजनीतिक संघर्ष

माथर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'जब मुख्य चुनाव आयुक्त की ईमानदारी पर ही सवाल उठ रहे हों, तो हम उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं — यह लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता की लड़ाई है।' उन्होंने बताया कि कांग्रेस, इंडिया ब्लॉक और अन्य विपक्षी दल संवैधानिक तरीकों से यह लड़ाई लड़ रहे हैं।

1 नवंबर की रैली पर व्यापारियों की अपील

व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को दिवाली के बाद तक टालने की अपील की है। इस पर माथर ने कहा कि ऐसी चिंताओं को अनसुना नहीं किया जाएगा और उन पर गौर किया जाएगा, लेकिन पूरे मामले को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना ज़रूरी है।

आगे की राह

गौरतलब है कि केरल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच पहले भी कई बार टकराव हो चुका है। लोकभवन के इस आदेश पर बहुदलीय विरोध यह संकेत देता है कि मामला केवल खानपान तक सीमित नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन गया है। आने वाले दिनों में विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे को और अधिक उठाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केरल जैसे राज्य में — जहाँ खान-पान की विविधता सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है — इसका प्रतीकात्मक असर कहीं बड़ा है। विरोध का बहुदलीय स्वरूप बताता है कि यह केवल कांग्रेस की चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि एक व्यापक संवैधानिक असुविधा को छू रहा है। असली सवाल यह है कि क्या राज्यपाल के आवास की नीतियाँ राज्य की सांस्कृतिक स्वायत्तता के दायरे में आती हैं — और इस पर अदालती या विधायी स्पष्टता का अभाव बना हुआ है। बिना इस स्पष्टता के, दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक आरोपों से आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल के लोकभवन में शाकाहारी रसोई आदेश क्या है?
लोकभवन, जो केरल के राज्यपाल का आधिकारिक आवास और कार्यालय है, में शाकाहारी रसोई अनिवार्य करने का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत परिसर में केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने की शर्त लगाई गई है, जिसे विपक्षी दल केरल की खाद्य संस्कृति के विरुद्ध बता रहे हैं।
कांग्रेस ने इस आदेश पर आपत्ति क्यों जताई है?
कांग्रेस सांसद जेबी माथर के अनुसार यह आदेश केरल के नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बहुलतावादी खाद्य परंपराओं पर संघ परिवार की विचारधारा थोपने का प्रयास है। पार्टी का कहना है कि राज्यपाल की व्यक्तिगत पसंद और सरकारी परिसर की नीति में फर्क होना चाहिए।
इस विरोध में कौन-कौन सी पार्टियाँ शामिल हैं?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और नेता रमेश चेनिथला के अलावा अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इस आदेश पर आपत्ति जताई है। जेबी माथर ने स्पष्ट किया कि यह केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि कई दलों की साझा आपत्ति है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का संबंध इस मुद्दे से क्या है?
जेबी माथर ने दोनों मुद्दों को लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के व्यापक संघर्ष के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के चलते कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
राहुल गांधी की 1 नवंबर की रैली पर क्या स्थिति है?
व्यापारिक संगठनों ने दिवाली के कारण 1 नवंबर की रैली टालने की अपील की है। जेबी माथर ने कहा कि इन चिंताओं को अनसुना नहीं किया जाएगा और उन पर गौर किया जाएगा, लेकिन पूरे मामले को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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