क्या माकपा संघ की राह पर चल रही है? केरल की धर्मनिरपेक्षता खतरे में: विपक्ष के नेता सतीशन

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क्या माकपा संघ की राह पर चल रही है? केरल की धर्मनिरपेक्षता खतरे में: विपक्ष के नेता सतीशन

सारांश

क्या माकपा वाकई साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की दिशा में बढ़ रही है? विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इससे केरल की धर्मनिरपेक्षता को खतरा हो सकता है। जानें इस विवाद का पूरा सच।

Key Takeaways

  • वी.डी. सतीशन ने माकपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • राज्य में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की चेतावनी दी गई है।
  • धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिए सभी को सतर्क रहना होगा।

कोच्चि, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने सत्तारूढ़ माकपा पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन जानबूझकर राज्य को खतरनाक साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी राजनीति केरल की धर्मनिरपेक्ष बुनियाद को अपूरणीय नुकसान पहुंचाएगी।

माकपा के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें मंत्री साजी चेरियन भी शामिल हैं, के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीशन ने कहा कि केरल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब संविधान की शपथ लेने वाले किसी मंत्री ने लोगों से चुनावी विजेताओं के धर्म और जाति का आकलन करने की बात कही है।

उन्होंने कहा, “यह केवल गैर-जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि क्रूर और खतरनाक है। यह केरल को उस बिंदु तक ले जाता है, जहां इस राज्य के निर्माण के मूल्यों को दफन कर दिया जाएगा।”

सतीशन ने आरोप लगाया कि माकपा अब उसी रास्ते पर चल पड़ी है, जिस पर कभी संघ परिवार चला करता था- राजनीतिक लाभ के लिए साम्प्रदायिक विभाजन पैदा करना।

उन्होंने कहा, “पहले इस मॉडल को संघ परिवार ने परिपक्व किया। आज माकपा उसकी नकल कर रही है और मुख्यमंत्री इसे संरक्षण दे रहे हैं।” सतीशन ने यह भी आरोप लगाया कि विवादास्पद बयान मुख्यमंत्री की जानकारी में दिए गए।

यह कहते हुए कि केरल किसी एक नेता से बड़ा है, विपक्ष के नेता ने कहा, “पिनराई विजयन और वी.डी. सतीशन एक दिन भुला दिए जाएंगे, लेकिन केरल बना रहेगा। इसकी धर्मनिरपेक्ष नींव को आग लगाना आने वाली पीढ़ियों के साथ क्रूरता है।”

समुदाय के नेताओं से मुलाकातों को लेकर हो रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए सतीशन ने कहा कि साम्प्रदायिकता का विरोध करने और सामाजिक नेताओं से संवाद करने में कोई विरोधाभास नहीं है।

उन्होंने कहा, “वोट किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं, फैसला जनता करती है। राजनीतिक नेता समाज के सभी वर्गों से मिलते हैं। मैंने कभी किसी समुदाय या नेता का अपमान नहीं किया।”

नीलांबूर उपचुनाव का जिक्र करते हुए सतीशन ने कहा कि साम्प्रदायिक भय फैलाने की कोशिशें वहां बुरी तरह विफल रहीं और यूडीएफ ने 11,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार जमात-ए-इस्लामी का नाम लेकर डर का माहौल बनाने की कोशिशों को भी खारिज किया और याद दिलाया कि अतीत में माकपा खुद भी इस संगठन से संवाद कर चुकी है।

किसी भी व्यक्तिगत या राजनीतिक परिणाम का सामना करने के लिए तैयार होने की बात कहते हुए सतीशन ने कहा कि वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने कहा, “अगर मैं साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ते हुए गिरता हूं, तो वह एक वीरतापूर्ण पतन होगा,” और चेतावनी दी कि विभाजनकारी राजनीति के साथ माकपा का यह खेल केरल में “उसके अंत की शुरुआत” साबित होगा।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक बयानबाजी का प्रभाव समाज पर पड़ सकता है। सभी पक्षों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी ताकि धर्मनिरपेक्षता की नींव मजबूत बनी रहे।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या सतीशन के आरोप सही हैं?
सतीशन के आरोपों में गंभीरता है, लेकिन इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए।
क्या माकपा साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है?
यह सवाल समाज में बहस का विषय है और विभिन्न दृष्टिकोण हैं।
केरल की धर्मनिरपेक्षता पर क्या खतरा है?
यदि साम्प्रदायिक विभाजन बढ़ता है, तो यह राज्य की धर्मनिरपेक्षता को नुकसान पहुंचा सकता है।
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