दिल्ली: १६ साल पुराने इंडस्ट्रियल गोदाम में चोरी के मामलों में भगोड़ा अपराधी गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली पुलिस ने १६ साल पुराने मामलों में अपराधी को गिरफ्तार किया।
- आरोपी को रोहिणी कोर्ट ने २०१९ में भगोड़ा घोषित किया था।
- गिरफ्तारी के लिए टेक्निकल सर्विलांस का उपयोग किया गया।
- आरोपी बिहार का निवासी है और अपराधी गैंग का सदस्य था।
- पुलिस ने कई मामलों में पहले भी उसे गिरफ्तार किया था।
नई दिल्ली, ७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (डब्लूआर-II) ने १६ साल पुराने इंडस्ट्रियल गोदाम में चोरी के मामलों में एक घोषित अपराधी को सात साल बाद पकड़ लिया है। आरोपी को रोहिणी कोर्ट ने २०१९ में फरार घोषित किया था।
क्राइम ब्रांच के डीएसपी हर्ष इंदोरा ने जानकारी दी कि डब्लूआर-II यूनिट ने २०११ में दर्ज इंडस्ट्रियल गोदामों में चोरी के तीन मामलों से जुड़े एक भगोड़े को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान ३६ वर्षीय संतोष मंडल उर्फ सदानंद के रूप में हुई है, जो बिहार के बांका जिले का निवासी है।
डीसीपी के अनुसार, ६ मार्च को संतोष मंडल के मूवमेंट के बारे में गुप्त सूचना मिली। पुलिस को उम्मीद थी कि आरोपी लांसर कॉन्वेंट स्कूल, रोहिणी, दिल्ली के पास आएगा। इस जानकारी पर आरोपी को पकड़ने के लिए इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम के सदस्य सब इंस्पेक्टर अनुज छिकारा और हेडकांस्टेबल रविंदर ने टेक्निकल सर्विलांस किया, जिससे रोहिणी में आरोपी का पता लगाने में मदद मिली। टेक्निकल इनपुट और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपी संतोष मंडल को घेरकर गिरफ्तार किया गया।
आरोपी को समयपुर बादली में रजिस्टर्ड तीन मामलों में भगोड़ा घोषित किया गया था। २९ नवंबर २०१९ को रोहिणी कोर्ट जज नेहा गुप्ता सिंह के आदेश पर उसे फरार घोषित किया गया था। इसके बाद से ही वह गिरफ्तारी से बच रहा था।
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने बताया कि वह दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में इंडस्ट्रियल गोदामों में लूट और चोरी करने वाले एक गैंग का सदस्य था। वह अनपढ़ है और बिहार में अपने गांव में पैदा हुआ और वहीं पला-बढ़ा है। २०११ में नौकरी की तलाश में दिल्ली आया और शुरू में मजदूर के तौर पर काम किया। लेकिन, अपनी कमाई से असंतुष्ट होने पर वह अपराधी प्रवृत्ति के लोगों से जुड़ गया और इंडस्ट्रियल गोदामों में चोरी करने लगा।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी संतोष को पहले कई मामलों में गिरफ्तार किया गया था, जहां से धनराशि भी बरामद हुई थी। बेल पर रिहा होने के बाद और गिरफ्तारी से बचने के लिए वह दिल्ली से भाग गया और बिहार में रहने लगा। इसके बाद २०१९ में कोर्ट ने उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित कर दिया था।