23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर पर शपथ के एक घंटे बाद कांग्रेस का हमला, खाद्य निर्देश पर विवाद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर पर शपथ के एक घंटे बाद कांग्रेस का हमला, खाद्य निर्देश पर विवाद

सारांश

शपथ लेने के एक घंटे के भीतर ही केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर विवादों में घिर गए। लोक भवन की सरकारी रसोई में मांस-मछली पर कथित पाबंदी को लेकर कांग्रेस ने इसे खाद्य स्वतंत्रता और संविधान पर हमला करार दिया — केरल की राजनीति में एक नए टकराव की शुरुआत।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश माथुर ने 23 अक्टूबर 2026 को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
शपथ के एक घंटे के भीतर ही लोक भवन की रसोई में मांस-मछली न पकाने के कथित निर्देश पर विवाद शुरू हो गया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे खाद्य स्वतंत्रता पर अतिक्रमण और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
शपथ समारोह में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन अनुपस्थित रहे।
राज्यपाल कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

केरल के नवनियुक्त राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को पद की शपथ लेने के महज एक घंटे भीतर विवादों में घिर गए, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोक भवन की सरकारी रसोई में मांस और मछली न पकाने के कथित निर्देश को लेकर उन पर कड़ा प्रहार किया। वेणुगोपाल ने इस कदम को केरल की सदियों पुरानी खान-पान संस्कृति पर सीधा हमला करार दिया।

शपथ समारोह और नया विवाद

केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने राजभवन, तिरुवनंतपुरम में आयोजित समारोह में माथुर को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन, मंत्रिमंडल के सदस्य और निर्वाचित प्रतिनिधि उपस्थित थे। हालाँकि, विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन इस समारोह से अनुपस्थित रहे, जो अपने आप में राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि माथुर इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल के पद पर कार्यरत थे। उनके केरल का प्रभार ग्रहण करते ही लोक भवन की रसोई संबंधी कथित निर्देश सार्वजनिक हो गया, जिसने तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म दिया।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, 'जिन्होंने वोट छीने और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जड़ों पर प्रहार किया, वे अब खाद्य स्वतंत्रता भी छीनने की तैयारी कर रहे हैं।' उन्होंने इस निर्देश को संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल को शाकाहारी भोजन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत खान-पान की प्राथमिकताओं को लोक भवन की उस रसोई पर थोपना अस्वीकार्य है, जो केरल सरकार के कर्मचारियों को भी भोजन परोसती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियाँ यदि लोक भवन में स्थापित हो गईं, तो धीरे-धीरे अन्य संस्थानों तक भी फैल सकती हैं।

केरल की खाद्य संस्कृति और सांस्कृतिक पहचान

वेणुगोपाल ने याद दिलाया कि केरल एक तटीय राज्य है, जहाँ मछली और अन्य मांसाहारी भोजन की परंपरा सदियों पुरानी है। प्रचुर समुद्री संसाधनों के कारण मछली केरल के दैनिक भोजन का अभिन्न अंग रही है। उन्होंने कहा, 'मलयाली लोगों की खान-पान की आदतों को प्रतिबंधित करने या उन्हें यह बताने का कोई भी प्रयास कि उन्हें अब से क्या खाना चाहिए, स्वीकार्य नहीं है।'

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव का इतिहास रहा है। केरल में पिछले कई राज्यपालों के कार्यकाल के दौरान संविधानिक अधिकारों और राज्य की स्वायत्तता को लेकर विवाद उठते रहे हैं।

आरोप और संवैधानिक सवाल

कांग्रेस नेता ने इस निर्देश को कथित तौर पर 'संघ परिवार के असंवैधानिक हितों की निरंतरता' बताया और आरोप लगाया कि यह केरल में एक विशेष विचारधारा का एजेंडा लागू करने का प्रयास है। उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि वे इस प्रकार के किसी भी कदम से पीछे हटें। वेणुगोपाल ने कहा, 'खान-पान की स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को यह याद रखना चाहिए कि संविधान लोगों को अपने खान-पान और जीवनशैली के बारे में निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी प्रदान करता है।'

राज्यपाल कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की राजनीति में और गहरा हो सकता है, खासकर तब जब केरल की राज्य सरकार और राजभवन के बीच संबंध पहले से ही सहज नहीं रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पहले दिन की यह शुरुआत बताती है कि माथुर का कार्यकाल शायद उनके पूर्ववर्तियों जितना ही विवादपूर्ण रहेगा। असली सवाल यह है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का व्यक्तिगत आस्था आधारित निर्देश सरकारी रसोई तक क्यों पहुँचे, जो केरल के बहुलतावादी समाज की सामूहिक जगह है। मुख्यधारा की कवरेज इस घटना को महज 'खाने के विवाद' तक सीमित कर रही है, जबकि यह असल में राजभवन की संस्थागत सीमाओं और राज्य की सांस्कृतिक स्वायत्तता के बड़े सवाल को छूती है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर कौन हैं?
ओम प्रकाश माथुर को 23 अक्टूबर 2026 को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई गई। इससे पहले वे सिक्किम के राज्यपाल पद पर कार्यरत थे।
लोक भवन की रसोई में मांस-मछली का विवाद क्या है?
कथित तौर पर राज्यपाल माथुर ने लोक भवन की सरकारी रसोई में मांस और मछली न पकाने का निर्देश दिया, जो शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सार्वजनिक हुआ। यह रसोई केवल राज्यपाल के लिए नहीं, बल्कि वहाँ कार्यरत केरल सरकार के कर्मचारियों को भी भोजन उपलब्ध कराती है।
कांग्रेस ने इस निर्देश का विरोध क्यों किया?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि यह केरल की बहुलतावादी खाद्य संस्कृति और संविधान प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अतिक्रमण है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अपनी व्यक्तिगत पसंद को सरकारी संस्थान पर नहीं थोप सकते।
शपथ समारोह में पिनाराई विजयन क्यों अनुपस्थित रहे?
माकपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, जो वर्तमान में विपक्ष के नेता हैं, शपथ समारोह से अनुपस्थित रहे। उनकी अनुपस्थिति का कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया, लेकिन इसे राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
केरल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच विवाद पहले भी हुए हैं?
हाँ, केरल में पिछले कई राज्यपालों के कार्यकाल में राज्य सरकार के साथ संवैधानिक अधिकारों और नीतिगत मामलों पर टकराव होता रहा है। माथुर के पहले ही दिन के विवाद ने इस पैटर्न की पुनरावृत्ति का संकेत दे दिया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 19 घंटे पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले