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केरल राज्यपाल आवास भोजन विवाद: राजीव चंद्रशेखर का कांग्रेस पर हमला, बोले— 'मूर्खता की हद पार'

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केरल राज्यपाल आवास भोजन विवाद: राजीव चंद्रशेखर का कांग्रेस पर हमला, बोले— 'मूर्खता की हद पार'

सारांश

केरल के राज्यपाल आवास में भोजन को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। BJP नेता राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पर कांग्रेस को 'विवेकहीन' बताते हुए कहा कि अपने घर में किस तरह का खाना खाना है, यह हर व्यक्ति का अधिकार है — और राज्यपाल भी इसके अपवाद नहीं।

मुख्य बातें

BJP नेता राजीव चंद्रशेखर ने 24 अक्टूबर 2026 को एक्स पर केरल राज्यपाल आवास भोजन विवाद पर कांग्रेस की आलोचना की।
विवाद की शुरुआत खबरों से हुई कि राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने लोक भवन में मांसाहारी भोजन पर रोक लगाई।
लोक भवन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध केवल राज्यपाल की रसोई तक सीमित है; कर्मचारी अपनी पसंद का भोजन खाने के लिए स्वतंत्र हैं।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और माकपा सचिव एमवी गोविंदन ने इसे केरल की खाद्य विविधता पर हमला बताया।
चंद्रशेखर ने वीडी सतीशन सरकार के 150 दिन पर पाँच गारंटियों और 'पुथु युग केरलम' के वादों पर भी सवाल उठाए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता राजीव चंद्रशेखर ने 24 अक्टूबर 2026 को केरल के राज्यपाल आवास (लोक भवन) में भोजन व्यवस्था को लेकर उठे विवाद पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। चंद्रशेखर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्यपाल के निवास पर परोसे जाने वाले भोजन का निर्णय पूरी तरह राज्यपाल का व्यक्तिगत अधिकार है, और कांग्रेस का इस मुद्दे पर शोर मचाना उसकी 'विवेकहीनता' को दर्शाता है।

चंद्रशेखर का तर्क: 'अपने घर में अपनी पसंद का भोजन'

एक्स पर अपनी पोस्ट में राजीव चंद्रशेखर ने लिखा, 'क्या अब कांग्रेस पार्टी यह भी कहेगी कि किसी मुस्लिम मलयाली के घर जाकर उनसे पोर्क मांगा जाए? किसी घर में रहने वाले व्यक्ति का यह अधिकार होता है कि वहाँ उसकी संस्कृति और उसकी पसंद के अनुसार भोजन परोसा जाए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक भवन में निवासरत केरल के राज्यपाल यह तय करने के पूर्णतः हकदार हैं कि उनके लिए किस प्रकार का भोजन तैयार किया जाए।

चंद्रशेखर ने आगे लिखा कि कांग्रेस ने 'पूरी तरह अपना विवेक खो दिया है और मूर्खता की हद पार कर चुकी है।' उन्होंने वीडी सतीशन की सरकार के 150 दिन पूरे होने का हवाला देते हुए पूछा कि पाँच गारंटियों और 'पुथु युग केरलम' का क्या हुआ।

विवाद की जड़: राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के कथित निर्देश

यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब खबरें सामने आईं कि केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने राजभवन परिसर में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। हालाँकि, बाद में लोक भवन प्रशासन ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि मांसाहारी भोजन पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

प्रशासन के अनुसार, यह प्रतिबंध केवल उस रसोई तक सीमित है जहाँ राज्यपाल के लिए भोजन तैयार किया जाता है, क्योंकि वे सख्त शाकाहारी हैं। लोक भवन ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों और अन्य लोगों को अपनी पसंद का भोजन लाने और खाने की पूरी स्वतंत्रता है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: 'खाद्य संस्कृति पर हमला'

स्पष्टीकरण के बावजूद मामला राजनीतिक रूप से गर्म बना रहा। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि केरल की खाद्य संस्कृति विविधतापूर्ण है और प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन चुनने का अधिकार है। वहीं, माकपा राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने आरोप लगाया कि भोजन को सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

चंद्रशेखर का व्यापक राजनीतिक निशाना

चंद्रशेखर ने इस विवाद को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'भ्रामक राजनीति' का हिस्सा बताया। उनके अनुसार, कांग्रेस केरल के युवाओं की बेरोज़गारी और दवाओं की कमी से जूझ रहे परिवारों जैसे असल मुद्दों पर चर्चा से बचती है, लेकिन राज्यपाल की 'खान-पान की आदतों' पर राजनीति करना उसे ज़्यादा सुविधाजनक लगता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सरकार के 150 दिन पूरे होने के बाद शासन से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद केरल की राजनीति में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच के संबंधों को और अधिक जटिल बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्यपाल-राज्य सरकार के तनाव और केरल की पहचान-राजनीति का है। लोक भवन के स्पष्टीकरण के बाद तथ्यात्मक आधार कमज़ोर पड़ गया, फिर भी सियासी शोर थमने का नाम नहीं ले रहा — यह दर्शाता है कि सभी पक्ष इसे अपने-अपने वोट बैंक के लिए भुनाना चाहते हैं। चंद्रशेखर का तर्क तार्किक रूप से वैध है, लेकिन उनका असली निशाना कांग्रेस की शासन विफलताओं को उजागर करना है। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ कर रही है वो यह है कि यह विवाद केरल में राज्यपाल पद की संवैधानिक स्वायत्तता और राज्य सरकार के दखल के बीच बढ़ते टकराव की एक और कड़ी है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल राज्यपाल आवास भोजन विवाद क्या है?
खबरें आईं कि केरल के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने लोक भवन में मांसाहारी भोजन पकाने पर रोक लगाई। बाद में लोक भवन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल राज्यपाल की व्यक्तिगत रसोई तक सीमित है, क्योंकि वे सख्त शाकाहारी हैं।
राजीव चंद्रशेखर ने इस विवाद पर क्या कहा?
राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अपने घर में अपनी पसंद का भोजन चुनना हर व्यक्ति का अधिकार है और राज्यपाल भी इसके हकदार हैं। उन्होंने कांग्रेस पर 'मूर्खता की हद पार करने' का आरोप लगाया और पार्टी पर असल मुद्दों से भटकाने का इल्ज़ाम लगाया।
क्या लोक भवन में मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध है?
नहीं। लोक भवन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मांसाहारी भोजन पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। कर्मचारियों और अन्य लोगों को अपनी पसंद का भोजन लाने और खाने की पूरी स्वतंत्रता है।
कांग्रेस और माकपा ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया?
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने केरल की खाद्य विविधता का हवाला देते हुए लोगों के भोजन चुनने के अधिकार की बात की। माकपा राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने आरोप लगाया कि भोजन को सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।
चंद्रशेखर ने वीडी सतीशन सरकार पर क्या सवाल उठाए?
चंद्रशेखर ने कहा कि वीडी सतीशन की सरकार के 150 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन पाँच गारंटियों और 'पुथु युग केरलम' के वादों पर कांग्रेस चर्चा करने को तैयार नहीं है। उनके अनुसार, केरल के युवाओं की बेरोज़गारी और दवाओं की कमी जैसे असल मुद्दों पर पार्टी चुप्पी साधे है।
राष्ट्र प्रेस
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