ओम प्रकाश माथुर केरल पहुंचे, 23 अक्टूबर को दोपहर 12.15 बजे लेंगे राज्यपाल पद की शपथ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ संगठनात्मक नेता ओम प्रकाश माथुर गुरुवार रात तिरुवनंतपुरम पहुंचे, जहाँ वे 23 अक्टूबर 2026 को केरल के राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12.15 बजे लोक भवन सभागार में आयोजित होगा। इस नियुक्ति के साथ ही राज्य को संसदीय मामलों और संगठनात्मक राजनीति में व्यापक अनुभव रखने वाला एक नया संवैधानिक प्रमुख मिल रहा है।
हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत
तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नवनियुक्त राज्यपाल का स्वागत राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने किया। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और BJP विधायक तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने माथुर की अगवानी की। यह स्वागत समारोह इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि केंद्र द्वारा नियुक्त BJP नेता का स्वागत राज्य में सत्तारूढ़ सरकार के प्रमुख नेताओं ने किया।
निवर्तमान राज्यपाल अर्लेकर को विदाई
74 वर्षीय माथुर, निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर का स्थान लेंगे। अर्लेकर को गुरुवार को राज्य सरकार द्वारा एक होटल में आयोजित रात्रिभोज में आधिकारिक विदाई दी गई। मुख्यमंत्री सतीशन और उनकी टीम ने निवर्तमान राज्यपाल को हवाई अड्डे पर भी विदाई दी। माथुर के आगमन और अर्लेकर के प्रस्थान के साथ ही सत्ता हस्तांतरण की औपचारिक प्रक्रिया आरंभ हो गई।
विदाई समारोह में नेताओं के संबोधन
विदाई भोज में मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि सरकार का अर्लेकर के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रहा है और उन्होंने केरल सरकार एवं जनता की ओर से आभार व्यक्त करते हुए उनके नए कार्यों में सफलता की कामना की। गृह मंत्री चेन्निथला ने कहा कि अर्लेकर ने सरकार के साथ समन्वय में काम करने का प्रयास किया। अध्यक्ष राधाकृष्णन ने उन्हें आम जनता से घनिष्ठ संपर्क रखने वाला राज्यपाल बताया।
अपने उत्तर में अर्लेकर ने कहा कि उन्होंने केरल की जनता से मिले प्रेम और स्नेह का ही प्रतिफल दिया है। मुख्यमंत्री ने निवर्तमान राज्यपाल को राज्य का सम्मान भी प्रदान किया।
ओम प्रकाश माथुर का राजनीतिक परिचय
माथुर BJP के एक अनुभवी संगठनात्मक नेता हैं जिन्होंने जुलाई 2024 से अक्टूबर 2026 तक सिक्किम के 18वें राज्यपाल के रूप में कार्य किया। इससे पहले उन्होंने 2008 से 2014 और 2016 से 2022 तक दो कार्यकालों में राजस्थान से राज्यसभा सदस्य रहे। 2008 से 2009 के बीच उन्होंने राजस्थान BJP के अध्यक्ष के रूप में भी दायित्व निभाया।
केरल की राजनीति में नई अध्याय की शुरुआत
माथुर की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) और BJP के बीच राजनीतिक तनाव की अपनी एक पृष्ठभूमि रही है। गौरतलब है कि केरल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच के संबंध प्रायः चर्चा का विषय रहते हैं। नए राज्यपाल के रूप में माथुर के पास संसदीय प्रक्रियाओं और संगठनात्मक ढाँचे की गहरी समझ है, जो राजभवन और मंत्रिमंडल के बीच कार्यकारी संतुलन को एक नया स्वरूप दे सकती है।