फोर्ट कोच्चि कैफे विवाद: भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सीएम सतीशन को दी 'चुनिंदा धर्मनिरपेक्षता' की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल के फोर्ट कोच्चि स्थित कैफे 'काशी' से जुड़े विवाद में यूट्यूबर अमृत सिंह दरन पर कार्रवाई के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 अक्टूबर 2026 को केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर सीधे सवाल दागे। भाजपा के केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए सतीशन की प्रतिक्रिया को 'चुनिंदा धर्मनिरपेक्षता' बताते हुए उनसे कई कड़े सवाल किए। चंद्रशेखर ने चेतावनी दी कि ऐसी 'चुनिंदा' भाषा नेताओं को 'ढोंगी' की श्रेणी में ले जाती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
फोर्ट कोच्चि के प्रसिद्ध कैफे 'काशी' में यूट्यूबर अमृत सिंह दरन के कथित अपमानजनक व्यवहार को लेकर विवाद उठा, जिसके बाद उन पर कार्रवाई हुई। इस घटना ने केरल में सांप्रदायिक संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस को तेज़ कर दिया। मुख्यमंत्री सतीशन की इस मामले पर प्रतिक्रिया को भाजपा ने एकतरफा बताया।
राजीव चंद्रशेखर के तीखे सवाल
राजीव चंद्रशेखर ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'केरल सभी मलयाली लोगों के लिए है। मलयाली ही केरल का वर्तमान और भविष्य तय करेंगे। हमारा भोजन, हमारी संस्कृति, हमारे उत्सव। केरलम भारत का हिस्सा है और प्रत्येक मलयाली भी भारतीय है।' उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री की पोस्ट की मूल भावना से सहमत हैं, परंतु केरल में बन रहे राजनीतिक माहौल को लेकर जायज़ सवाल उठाना ज़रूरी है।
चंद्रशेखर ने तीन प्रमुख सवाल उठाए: पहला — कुछ लोग धर्म के आधार पर भारत का विभाजन करने वाले जिन्ना का महिमामंडन क्यों करते हैं? दूसरा — कुछ राजनेता हमास जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनकी हिंसा को क्यों सही ठहराते हैं? तीसरा — कांग्रेस और सीपीएम जैसी पार्टियाँ जमात-ए-इस्लामी जैसे उन संगठनों के साथ राजनीतिक गठबंधन क्यों करती हैं जो खुले तौर पर धर्मनिरपेक्षता और भारतीय संविधान के विरोधी हैं?
समानांतर परिदृश्य का तर्क
चंद्रशेखर ने एक तीखा सवाल उठाते हुए कहा, 'ज़रा सोचिए, अगर कोई किसी मुस्लिम पवित्र शहर के नाम पर रेस्तरां खोले और वहाँ पोर्क परोसे, तो केरल के मुख्यमंत्री का ट्वीट और प्रतिक्रिया क्या होगी? ऐसी स्थिति में या तो वे पूर्व मुख्यमंत्री बन जाएँगे, या अपनी जान बचाने के लिए भाग जाएँगे, या फिर ये दोनों ही बातें हो सकती हैं।' इस तुलनात्मक तर्क के ज़रिए भाजपा नेता ने सत्तारूढ़ पक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
पिनाराई विजयन और अनुच्छेद 19 का संदर्भ
चंद्रशेखर ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का भी ज़िक्र किया और कहा कि केरल में हमास के कट्टरपंथ फैलाने के प्रयासों के खिलाफ बोलने पर विजयन ने उन्हें अपशब्द कहे और निशाना बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 19 — बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार — प्रत्येक भारतीय पर समान रूप से लागू होता है, साथ ही अनुच्छेद 19(2) के तहत उस पर लगाई गई पाबंदियाँ भी।
भाजपा की माँग और आगे की राह
चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री सतीशन को स्पष्ट संदेश दिया: 'सभी मलयालियों के प्रति समान रूप से संवेदनशीलता और सम्मान सुनिश्चित करें, चाहे वे हिंदू हों, ईसाई हों या मुसलमान। जिन्ना के महिमामंडन जैसी बातों, टिप्पणियों, हरकतों या भावनाओं को बढ़ावा न दें।' उन्होंने यह भी कहा कि 'चुनिंदा धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिक सद्भाव पर चुनिंदा बातें' नेताओं को उनसे पहले के 'ढोंगी राजनेताओं' जैसा बना देती हैं। यह विवाद केरल विधानसभा चुनाव से पहले सांप्रदायिक समरसता बनाम राजनीतिक गठजोड़ की बहस को नई धार दे सकता है।