25 अक्टूबर 2026
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केरलम भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का सीएम सतीशन पर पलटवार, बोले — 'केरलम भारत का हिस्सा, हर मलयाली भारतीय'

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केरलम भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का सीएम सतीशन पर पलटवार, बोले — 'केरलम भारत का हिस्सा, हर मलयाली भारतीय'

सारांश

केरलम भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सीएम वी.डी. सतीशन के 'सद्भाव' वाले एक्स पोस्ट को स्वीकार करते हुए भी पलटवार किया — जिन्ना की तारीफ, हमास-समर्थन और जमात-ए-इस्लामी के साथ राजनीतिक गठजोड़ पर तीखे सवाल उठाए और 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

राजीव चंद्रशेखर ने 25 अक्टूबर 2026 को एक्स पर सीएम वी.डी.
सतीशन के सांप्रदायिक सद्भाव वाले पोस्ट का जवाब दिया।
चंद्रशेखर ने कहा — 'केरलम भारत का हिस्सा है, हर मलयाली भारतीय है' — लेकिन राज्य की 'पॉलिटिकल कल्चर' पर सवाल उठाए।
जिन्ना की तारीफ , हमास-समर्थन और जमात-ए-इस्लामी के साथ कांग्रेस-सीपीएम के गठजोड़ पर सीधे सवाल उठाए।
सीएम सतीशन ने 24 अक्टूबर 2026 को फोर्ट कोच्चि पर एक व्लॉगर के वायरल वीडियो के मद्देनज़र एकजुटता का आह्वान किया था।
चंद्रशेखर ने अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' को खारिज किया और सभी समुदायों से समान व्यवहार की माँग की।

केरलम भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 25 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के सांप्रदायिक सद्भाव संबंधी एक्स पोस्ट पर तीखा पलटवार किया। चंद्रशेखर ने एक्स पर लिखा कि वे सीएम की भावना से तो सहमत हैं, लेकिन केरलम में उभरती 'पॉलिटिकल कल्चर' पर 'सही सवाल' उठाने की ज़रूरत है। उनकी यह टिप्पणी उस विवाद की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें एक बाहरी व्लॉगर के वीडियो के बाद फोर्ट कोच्चि को लेकर ऑनलाइन विवाद भड़का था।

मुख्यमंत्री सतीशन की मूल पोस्ट

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 24 अक्टूबर 2026 को एक्स पर लिखा था: 'केरलम एकजुट है। यहाँ सांप्रदायिक नफरत की कोई जगह नहीं है। राज्य के बाहर के एक व्लॉगर का इंस्टाग्राम वीडियो, जिसमें फोर्ट कोच्चि के बारे में गलत जानकारी फैलाकर समुदायों को बाँटने की कोशिश की गई, मंजूर नहीं है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में केस दर्ज हो चुका है और यूडीएफ सरकार बिना किसी डर या पक्षपात के सांप्रदायिक सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध है।

राजीव चंद्रशेखर का पलटवार — मुख्य बिंदु

राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पर जवाबी पोस्ट में कहा, 'केरलम भारत का हिस्सा है। हर मलयाली भी भारतीय है।' उन्होंने तीन सीधे सवाल खड़े किए — कुछ लोग जिन्ना की तारीफ क्यों करते हैं जिन्होंने भारत को धर्म के आधार पर बाँटा; कुछ नेता हमास जैसे प्रतिबंधित संगठन की हिंसा का बचाव क्यों करते हैं; और कांग्रेस एवं सीपीएम जैसी पार्टियों का जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के साथ राजनीतिक गठजोड़ क्यों है।

चंद्रशेखर ने 'काशी' नाम वाले एक कैफे में कथित बेइज्जती का भी हवाला दिया और आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में कांग्रेस और सीपीएम की ओर से 'फ्री-पास' मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी मुस्लिम पवित्र शहर के नाम पर रेस्टोरेंट खोला जाता और वहाँ पोर्क परोसा जाता, तो क्या सीएम की प्रतिक्रिया समान होती?

अनुच्छेद 19 और बोलने की आज़ादी पर दलील

चंद्रशेखर ने संवैधानिक पहलू को भी उठाते हुए कहा कि अनुच्छेद 19 के तहत बोलने की आज़ादी हर भारतीय को मिली है और अनुच्छेद 19(2) के तहत इस पर प्रतिबंध भी हर भारतीय पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने यह भी कहा कि केरलम में हमास के कट्टरपंथ के खिलाफ बोलने पर पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उन्हें निशाना बनाया था।

सीएम सतीशन को सलाह और भाजपा का रुख

चंद्रशेखर ने अपनी पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री सतीशन को स्पष्ट सलाह दी — 'हिंदू, ईसाई और मुस्लिम, सभी मलयाली लोगों के प्रति समान संवेदनशीलता और सम्मान सुनिश्चित करें। जिन्ना की पूजा जैसी भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा न दें।' उन्होंने चेतावनी दी कि 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' उन्हें 'नकली नेता' की श्रेणी में डाल देगा।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब केरलम में धार्मिक पहचान और सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ा है। गौरतलब है कि केरलम में भाजपा अपनी उपस्थिति विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रही है और मुस्लिम-बहुल एवं हिंदू-बहुल दोनों वर्गों में 'समान न्याय' की छवि बनाने की कोशिश में है। सतीशन की यूडीएफ सरकार और विपक्षी भाजपा के बीच यह ताज़ा वाकयुद्ध यह बताता है कि आने वाले समय में केरलम की राजनीति में पहचान और सद्भाव का मुद्दा केंद्रीय रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जिन्ना, हमास और जमात-ए-इस्लामी के नाम लेकर कांग्रेस और सीपीएम को असहज कर देते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह बहस केरलम की वास्तविक सांप्रदायिक स्थिति को संबोधित करती है या केवल चुनावी ध्रुवीकरण का नया अध्याय खोलती है। 'काशी कैफे' और 'पोर्क वाले मुस्लिम पवित्र शहर' जैसे काल्पनिक उदाहरणों का इस्तेमाल चर्चा को तथ्य से भावना की ओर खींचता है। मुख्यधारा कवरेज जो अक्सर छोड़ती है, वह यह है कि यह वाकयुद्ध केरलम में भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है — जहाँ पार्टी हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने के साथ 'सबको न्याय' की भाषा भी आज़मा रही है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव चंद्रशेखर ने सीएम सतीशन पर क्यों निशाना साधा?
केरलम भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 25 अक्टूबर 2026 को एक्स पर सीएम वी.डी. सतीशन के सांप्रदायिक सद्भाव वाले पोस्ट का जवाब देते हुए जिन्ना की तारीफ, हमास-समर्थन और जमात-ए-इस्लामी के साथ कांग्रेस-सीपीएम के गठजोड़ पर सवाल उठाए। उन्होंने 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' को केरलम की राजनीतिक संस्कृति की बड़ी समस्या बताया।
सीएम वी.डी. सतीशन ने पहले क्या पोस्ट किया था?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 24 अक्टूबर 2026 को एक्स पर लिखा था कि 'केरलम एकजुट है और यहाँ सांप्रदायिक नफरत की कोई जगह नहीं।' उनकी यह पोस्ट फोर्ट कोच्चि पर एक बाहरी व्लॉगर के वायरल इंस्टाग्राम वीडियो के बाद आई थी, जिसमें राज्य की गलत छवि पेश करने और समुदायों को बाँटने की कोशिश का आरोप लगाया गया था।
चंद्रशेखर ने किस 'काशी कैफे' विवाद का ज़िक्र किया?
राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पोस्ट में संकेत दिया कि 'काशी' नाम — जो एक पवित्र हिंदू शहर का नाम है — वाले एक कैफे में कथित बेइज्जती और बेपरवाह बर्ताव हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में कांग्रेस और सीपीएम की ओर से 'फ्री-पास' मिलता है, जिससे यह संवेदनशील मुद्दा अनसुलझा रह जाता है।
अनुच्छेद 19 का इस विवाद में क्या संदर्भ है?
चंद्रशेखर ने तर्क दिया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 बोलने की आज़ादी का अधिकार हर भारतीय को समान रूप से देता है और अनुच्छेद 19(2) के तहत इस पर प्रतिबंध भी सभी पर एक जैसे लागू होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केरलम में हमास के कट्टरपंथ के खिलाफ बोलने पर पूर्व सीएम पिनाराई विजयन ने उन्हें निशाना बनाया था।
यह विवाद केरलम की राजनीति पर क्या असर डाल सकता है?
यह वाकयुद्ध ऐसे समय में आया है जब केरलम में सांप्रदायिक पहचान और सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ रहा है। भाजपा 'समान न्याय' की भाषा से हिंदू-बहुल और ईसाई मतदाताओं तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जबकि सतीशन की यूडीएफ सरकार सद्भाव की छवि बनाए रखने में जुटी है।
राष्ट्र प्रेस
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