कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने की बड़ी उपलब्धि, पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल

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कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने की बड़ी उपलब्धि, पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल

सारांश

कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने एक महत्वपूर्ण चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा के मरीज के लिए पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया है। यह कदम भारतीय सेना की स्वास्थ्य सेवाओं की समर्पण को दर्शाता है।

मुख्य बातें

कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल किया।
स्टेम सेल का क्रायोप्रिजर्वेशन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी।
10 मई 2025 को हेमेटोलॉजी सेंटर का उद्घाटन हुआ।
अस्पताल ने अब तक चार मल्टीपल मायलोमा ट्रांसप्लांट किए हैं।
यह उपलब्धि भारतीय सेना की चिकित्सा विशेषज्ञता को दर्शाती है।

पंचकुला, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने एक बार फिर अपनी चिकित्सा उपलब्धियों का झंडा फहराया है। अस्पताल ने हाल ही में अपने बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के तहत नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा से पीड़ित एक मरीज के लिए पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है।

इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण कदम था स्टेम सेल का क्रायोप्रिजर्वेशन, जिसे पीजीआईएमईआर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने कुशलता से पूरा किया।

10 मई 2025 को, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, आर्मी कमांडर, वेस्टर्न कमांड द्वारा अत्याधुनिक हेमेटोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया गया था। तब से अब तक अस्पताल ने मल्टीपल मायलोमा के लिए चार और नॉन-हॉजकिन लिंफोमा के लिए एक ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए हैं। यह उपलब्धि अस्पताल की विशेषज्ञता और भारतीय सेना के स्वास्थ्य क्षेत्र में विश्वस्तरीय सेवाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारतीय सेना (वेस्टर्न कमांड) ने शनिवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर साझा किया, "एक और बड़ी उपलब्धि के साथ, कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने अपने सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम को जारी रखते हुए, नॉन-हॉजकिन लिंफोमा से पीड़ित एक मरीज़ का पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। इस प्रक्रिया में स्टेम सेल क्रायोप्रिजर्वेशन का अहम चरण शामिल था, जिसे पीजीआईएमईआर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने किया।"

आगे कहा गया, "10 मई 2025 को लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, आर्मी कमांडर, वेस्टर्न कमांड द्वारा हेमेटोलॉजी सेंटर के उद्घाटन के बाद से, हॉस्पिटल ने मल्टीपल मायलोमा के लिए चार और नॉन-हॉजकिन लिंफोमा के लिए एक ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए हैं, जिससे विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने की उसकी प्रतिबद्धता एक बार फिर साबित हुई है।"

इस उपलब्धि के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय सेना केवल सुरक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि हेल्थकेयर और मेडिकल रिसर्च में भी देश में अग्रणी भूमिका निभा रही है। कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर का यह ट्रांसप्लांट प्रोग्राम कई परिवारों के लिए उम्मीद लेकर आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय सेना की विशेषज्ञता और समर्पण को भी दर्शाती है। यह एक ऐसा कार्यक्रम है जो कई परिवारों के लिए उम्मीद लेकर आया है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने किस प्रकार का ट्रांसप्लांट किया?
कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर ने नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा के मरीज के लिए पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया।
इस प्रक्रिया में कौन-सी तकनीक का उपयोग किया गया?
इस प्रक्रिया में स्टेम सेल का क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक का उपयोग किया गया।
हेमेटोलॉजी सेंटर का उद्घाटन कब हुआ था?
हेमेटोलॉजी सेंटर का उद्घाटन 10 मई 2025 को हुआ था।
कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर की उपलब्धियों का क्या महत्व है?
यह उपलब्धियां भारतीय सेना की स्वास्थ्य सेवाओं की उच्च गुणवत्ता और समर्पण को दर्शाती हैं।
इस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम का लाभ किसे हुआ है?
यह ट्रांसप्लांट प्रोग्राम कई परिवारों के लिए उम्मीद लेकर आया है।
राष्ट्र प्रेस
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