19 जुलाई 2026
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मेकेदातु बांध पर DMK का संसदीय हमला: लोकसभा-राज्यसभा में स्थगन नोटिस, तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा की माँग

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मेकेदातु बांध पर DMK का संसदीय हमला: लोकसभा-राज्यसभा में स्थगन नोटिस, तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा की माँग

सारांश

DMK ने मानसून सत्र के ठीक पहले संसद के दोनों सदनों में स्थगन नोटिस दाखिल कर मेकेदातु बांध विवाद को राष्ट्रीय मंच पर ला दिया है। टी.आर. बालू और तिरुचि शिवा के नेतृत्व में यह कदम तमिलनाडु के जल अधिकारों और कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका की रक्षा की लड़ाई का नया मोर्चा है।

मुख्य बातें

DMK ने 19 जुलाई 2026 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में मेकेदातु बांध पर स्थगन प्रस्ताव नोटिस प्रस्तुत किए।
बालू और राज्यसभा में तिरुचि शिवा ने अलग-अलग नोटिस दाखिल किए।
DMK का आरोप है कि कर्नाटक की एकतरफा परियोजना कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका को खतरे में डालेगी।
पार्टी ने केंद्र से माँग की कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाला है, जिसमें यह मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 19 जुलाई 2026 को संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — में स्थगन प्रस्ताव नोटिस प्रस्तुत किए, जिसमें कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना पर तत्काल संसदीय बहस की माँग की गई है। पार्टी का कहना है कि यह परियोजना तमिलनाडु की जल सुरक्षा और कावेरी डेल्टा के लाखों किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा है।

मुख्य घटनाक्रम

लोकसभा में DMK संसदीय दल के नेता टी.आर. बालू ने अध्यक्ष को स्थगन प्रस्ताव नोटिस सौंपा। अपने नोटिस में बालू ने तर्क दिया कि कर्नाटक की एकतरफा बांध निर्माण योजना का तमिलनाडु — विशेष रूप से कावेरी नदी के जल पर निर्भर किसान समुदायों — पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि सभी निर्धारित कार्यसूची को एक ओर रखकर इस मामले पर तत्काल विस्तृत चर्चा की जाए।

राज्यसभा में DMK के फ्लोर लीडर तिरुचि शिवा ने इसी तरह का नोटिस प्रस्तुत किया। शिवा ने अपने नोटिस में प्रस्तावित बांध के कानूनी, पर्यावरणीय और कृषि संबंधी परिणामों पर तत्काल चर्चा की माँग की।

परियोजना का विवाद और पृष्ठभूमि

मेकेदातु परियोजना कर्नाटक सरकार का वह प्रस्ताव है जिसमें कावेरी नदी पर एक संतुलन जलाशय (बैलेंसिंग रिज़र्वायर) बनाने की योजना है। यह विवाद दशकों पुराना है और दोनों राज्यों के बीच जल बँटवारे की तनातनी की लंबी श्रृंखला की एक कड़ी है। DMK का स्पष्ट रुख रहा है कि निचले तटीय राज्य — यानी तमिलनाडु — की सहमति के बिना यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती।

गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने जल बँटवारे पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। DMK ने केंद्र सरकार से माँग की है कि वह इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे।

DMK की संसदीय रणनीति

ये दोनों नोटिस DMK की एक समन्वित संसदीय रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य मानसून सत्र 2026 — जो 20 जुलाई से शुरू हो रहा है — में मेकेदातु मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाना है। पार्टी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की माँग करेगी ताकि सभी अंतरराज्यीय चिंताओं का समाधान होने तक कर्नाटक को परियोजना पर काम रोकने के लिए बाध्य किया जा सके।

आम जनता और किसानों पर असर

DMK के अनुसार, प्रस्तावित जलाशय तमिलनाडु के नदी जल के हिस्से को प्रभावित कर सकता है, जिससे कावेरी डेल्टा के कृषि समुदायों की आजीविका सीधे खतरे में पड़ेगी। पार्टी ने इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक महत्व का अत्यावश्यक मामला बताया है।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र के पहले दिन से ही इस मुद्दे पर संसद में तीखी बहस की संभावना है। यदि स्थगन प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो यह दोनों राज्यों के बीच अंतरराज्यीय जल विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर ले आएगा और केंद्र सरकार पर मध्यस्थता का दबाव बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश भी दोनों राज्यों की आपसी खींचतान को पूरी तरह नहीं सुलझा पाए। DMK का यह संसदीय कदम रणनीतिक रूप से समयबद्ध है — मानसून सत्र के पहले दिन से ठीक पहले — लेकिन असली सवाल यह है कि केंद्र सरकार, जो कर्नाटक में भी सत्तारूढ़ है, किसके पक्ष में झुकेगी। कावेरी जल का यह टकराव केवल सिंचाई का नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की राजनीतिक पहचान और संघीय ढाँचे में राज्यों के अधिकारों का भी सवाल है — जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदातु बांध परियोजना क्या है और इसका विवाद क्यों है?
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक सरकार का प्रस्ताव है, जिसमें कावेरी नदी पर एक संतुलन जलाशय बनाने की योजना है। तमिलनाडु और DMK इसका विरोध करते हैं क्योंकि उनका कहना है कि यह बांध तमिलनाडु के नदी जल हिस्से को कम करेगा और कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका को खतरे में डालेगा।
DMK ने संसद में स्थगन नोटिस क्यों दिए?
DMK ने 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले यह नोटिस दाखिल किए ताकि मेकेदातु मुद्दे को सार्वजनिक महत्व का अत्यावश्यक मामला घोषित करते हुए संसद में तत्काल बहस कराई जा सके। पार्टी चाहती है कि केंद्र सरकार कर्नाटक को परियोजना आगे बढ़ाने से रोके।
लोकसभा और राज्यसभा में DMK की ओर से किसने नोटिस दिए?
लोकसभा में DMK संसदीय दल के नेता टी.आर. बालू ने अध्यक्ष को स्थगन प्रस्ताव नोटिस सौंपा। राज्यसभा में DMK के फ्लोर लीडर तिरुचि शिवा ने इसी तरह का नोटिस प्रस्तुत किया।
कावेरी जल विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का क्या रुख है?
कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जल बँटवारे पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। DMK ने केंद्र सरकार से माँग की है कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और कर्नाटक को एकतरफा कदम उठाने से रोका जाए।
मानसून सत्र 2026 में मेकेदातु मुद्दे पर आगे क्या होने की संभावना है?
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में DMK के स्थगन नोटिस पर अध्यक्ष और सभापति का निर्णय अहम होगा। यदि बहस की अनुमति मिलती है, तो केंद्र सरकार पर मध्यस्थता का दबाव बढ़ेगा और अंतरराज्यीय जल विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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