विश्व जनसंख्या दिवस 2026: योगी, रेखा गुप्ता, भजनलाल समेत कई मुख्यमंत्रियों ने जनसंख्या संतुलन का संकल्प दोहराया
सारांश
मुख्य बातें
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर 11 जुलाई 2026 को देशभर के कई मुख्यमंत्रियों ने जनसंख्या संतुलन, परिवार कल्याण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचन्द सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश साझा किए। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या, परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और मानव अधिकारों जैसी वैश्विक चुनौतियों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
मुख्यमंत्रियों के संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, 'जनसंख्या में संतुलन ही समृद्ध समाज का आधार है। आइए, विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जनसंख्या संतुलन और परिवार कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लें।'
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने पोस्ट में कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ शहरी विकास के ज़रिए दिल्ली सभी नागरिकों के लिए अवसर पैदा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 'विकसित भारत' की राह पर संतुलित विकास और संसाधनों का जिम्मेदार प्रबंधन अनिवार्य है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संदेश में जनसंख्या संतुलन को 'सशक्त समाज, समृद्ध राष्ट्र और सतत विकास का आधार' बताया और नागरिकों से 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मणिपुर का युवा-केंद्रित दृष्टिकोण
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचन्द सिंह ने इस वर्ष के विषय — 'युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए' — का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, समान अवसर और अधिकारों की सुरक्षा के ज़रिए युवाओं में निवेश करना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। उन्होंने एक स्वस्थ, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण का आह्वान किया।
विश्व जनसंख्या दिवस का महत्व
यह दिवस हर वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है। 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की पहल पर इसकी शुरुआत हुई थी, जब वैश्विक जनसंख्या ने 5 अरब का आँकड़ा पार किया था। आज वैश्विक जनसंख्या 8 अरब से अधिक है और भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है। ऐसे में जनसंख्या नीति, परिवार नियोजन और संसाधन प्रबंधन पर राज्य स्तरीय नेतृत्व की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
आगे की राह
विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इन संदेशों से स्पष्ट है कि जनसंख्या संतुलन अब केवल केंद्रीय नीति का विषय नहीं रहा — राज्य सरकारें भी इसे अपने विकास एजेंडे से जोड़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियानों के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और महिला शिक्षा में निवेश ही जनसंख्या स्थिरीकरण का सबसे प्रभावी मार्ग है।