पुंछ में आतंकी हलचल की सूचना के बाद सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन, सुरनकोट के जंगलों में घेराबंदी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने 4 अगस्त 2026 को आतंकवादियों के दो अलग-अलग समूहों की संदिग्ध हलचल की सूचना मिलने के बाद व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिले के दूरदराज के सुरनकोट क्षेत्र में दो स्थानों पर संदिग्ध आतंकी गतिविधि की खुफिया जानकारी मिलते ही संयुक्त बलों ने तत्काल कार्रवाई की।
मुख्य घटनाक्रम
जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के जवानों ने राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिकों के साथ मिलकर धारा सांगला, गुर्जर नार और खेरोवाली ढोक इलाकों तथा आसपास के जंगली गाँवों में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, घने जंगल वाले इस इलाके में ऑपरेशन जारी है और अब तक संदिग्ध आतंकवादियों के साथ कोई संपर्क या गोलीबारी नहीं हुई है।
अधिकारियों ने कहा, 'आतंकवादियों का पता लगाने के लिए एक व्यवस्थित ऑपरेशन चलाया जा रहा है।' यह ऐसे समय में आया है जब पुंछ और राजौरी जैसे सीमावर्ती जिलों में पिछले कुछ महीनों से आतंकी गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
कठुआ में मिला पुराना मोर्टार शेल
इसी दौरान एक अलग घटना में मंगलवार सुबह कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट एक घर के आँगन में जंग लगा हुआ पुराना मोर्टार शेल मिला। कट्टल-ब्राह्मणा गाँव में सुभाष चंद्र के घर पर खुदाई कर रहे मजदूरों की नज़र उस संदिग्ध वस्तु पर पड़ी और उन्होंने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया।
पुलिस की एक टीम, जिसके साथ बम निरोधक दस्ता भी था, मौके पर पहुँची और इलाके को सुरक्षित कर लिया। यह बिना फटा हुआ मोर्टार शेल — जिसे 'अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस' (UXO) कहा जाता है — अभी भी खतरनाक हो सकता है।
सीमावर्ती इलाकों में UXO का खतरा क्यों बना रहता है
गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बसे सीमावर्ती गाँवों ने दशकों तक सैन्य टकराव और संघर्ष विराम उल्लंघन झेले हैं। भारी तोपखाने की गोलाबारी के दौरान दागे गए हजारों मोर्टार शेलों में से बड़ी संख्या यांत्रिक खराबी, नरम जमीन या फ्यूज फेल होने के कारण फट नहीं पाते।
पुंछ, कुपवाड़ा और राजौरी जैसे इलाकों की ज़मीन पहाड़ी, जंगली और दलदली है। जब कोई शेल कीचड़, घनी वनस्पति या नरम मिट्टी में गिरता है तो झटका कम हो जाता है, जिससे फ्यूज सक्रिय नहीं हो पाता। ये शेल महीनों या दशकों तक जमीन के नीचे दबे रहते हैं और पर्यावरणीय बदलावों या मानवीय गतिविधियों — जैसे खुदाई — के कारण सामने आ जाते हैं।
सुरक्षा स्थिति और आगे की कार्रवाई
पुंछ में जारी सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बल घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में व्यवस्थित तरीके से तलाशी ले रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर लिया जाता। कठुआ में मिले मोर्टार शेल को बम निरोधक दस्ते द्वारा सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।