6 नवंबर 2026
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पुंछ में आतंकी हलचल की सूचना के बाद सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन, सुरनकोट के जंगलों में घेराबंदी

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पुंछ में आतंकी हलचल की सूचना के बाद सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन, सुरनकोट के जंगलों में घेराबंदी

सारांश

पुंछ के दूरदराज सुरनकोट इलाके में दो आतंकी समूहों की खुफिया सूचना पर SOG और राष्ट्रीय राइफल्स ने घेराबंदी की। उसी दिन कठुआ के हीरानगर में खुदाई के दौरान पुराना मोर्टार शेल मिला — सीमावर्ती जिलों में दशकों पुराने अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस के खतरे की एक और याद दिलाता घटनाक्रम।

मुख्य बातें

4 अगस्त 2026 को पुंछ जिले के सुरनकोट में आतंकवादियों के दो संदिग्ध समूहों की सूचना पर बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू।
जम्मू-कश्मीर पुलिस SOG और राष्ट्रीय राइफल्स ने धारा सांगला , गुर्जर नार और खेरोवाली ढोक में घेराबंदी की।
ऑपरेशन जारी; अब तक संदिग्धों से कोई संपर्क या गोलीबारी नहीं हुई।
कठुआ के हीरानगर सेक्टर में कट्टल-ब्राह्मणा गाँव में खुदाई के दौरान जंग लगा पुराना मोर्टार शेल बरामद।
बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुँचकर इलाके को सुरक्षित किया।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने 4 अगस्त 2026 को आतंकवादियों के दो अलग-अलग समूहों की संदिग्ध हलचल की सूचना मिलने के बाद व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिले के दूरदराज के सुरनकोट क्षेत्र में दो स्थानों पर संदिग्ध आतंकी गतिविधि की खुफिया जानकारी मिलते ही संयुक्त बलों ने तत्काल कार्रवाई की।

मुख्य घटनाक्रम

जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के जवानों ने राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिकों के साथ मिलकर धारा सांगला, गुर्जर नार और खेरोवाली ढोक इलाकों तथा आसपास के जंगली गाँवों में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, घने जंगल वाले इस इलाके में ऑपरेशन जारी है और अब तक संदिग्ध आतंकवादियों के साथ कोई संपर्क या गोलीबारी नहीं हुई है।

अधिकारियों ने कहा, 'आतंकवादियों का पता लगाने के लिए एक व्यवस्थित ऑपरेशन चलाया जा रहा है।' यह ऐसे समय में आया है जब पुंछ और राजौरी जैसे सीमावर्ती जिलों में पिछले कुछ महीनों से आतंकी गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

कठुआ में मिला पुराना मोर्टार शेल

इसी दौरान एक अलग घटना में मंगलवार सुबह कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट एक घर के आँगन में जंग लगा हुआ पुराना मोर्टार शेल मिला। कट्टल-ब्राह्मणा गाँव में सुभाष चंद्र के घर पर खुदाई कर रहे मजदूरों की नज़र उस संदिग्ध वस्तु पर पड़ी और उन्होंने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया।

पुलिस की एक टीम, जिसके साथ बम निरोधक दस्ता भी था, मौके पर पहुँची और इलाके को सुरक्षित कर लिया। यह बिना फटा हुआ मोर्टार शेल — जिसे 'अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस' (UXO) कहा जाता है — अभी भी खतरनाक हो सकता है।

सीमावर्ती इलाकों में UXO का खतरा क्यों बना रहता है

गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बसे सीमावर्ती गाँवों ने दशकों तक सैन्य टकराव और संघर्ष विराम उल्लंघन झेले हैं। भारी तोपखाने की गोलाबारी के दौरान दागे गए हजारों मोर्टार शेलों में से बड़ी संख्या यांत्रिक खराबी, नरम जमीन या फ्यूज फेल होने के कारण फट नहीं पाते।

पुंछ, कुपवाड़ा और राजौरी जैसे इलाकों की ज़मीन पहाड़ी, जंगली और दलदली है। जब कोई शेल कीचड़, घनी वनस्पति या नरम मिट्टी में गिरता है तो झटका कम हो जाता है, जिससे फ्यूज सक्रिय नहीं हो पाता। ये शेल महीनों या दशकों तक जमीन के नीचे दबे रहते हैं और पर्यावरणीय बदलावों या मानवीय गतिविधियों — जैसे खुदाई — के कारण सामने आ जाते हैं।

सुरक्षा स्थिति और आगे की कार्रवाई

पुंछ में जारी सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बल घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में व्यवस्थित तरीके से तलाशी ले रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर लिया जाता। कठुआ में मिले मोर्टार शेल को बम निरोधक दस्ते द्वारा सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह रेखांकित करता है कि सीमावर्ती जिलों में UXO क्लियरेंस की व्यवस्थित योजना अभी भी अधूरी है — एक ऐसा खतरा जो नागरिकों को दशकों बाद भी नुकसान पहुँचा सकता है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुंछ में सर्च ऑपरेशन क्यों शुरू किया गया?
सुरनकोट इलाके में आतंकवादियों के दो अलग-अलग समूहों की संदिग्ध हलचल की खुफिया सूचना मिलने के बाद 4 अगस्त 2026 को संयुक्त सुरक्षा बलों ने यह ऑपरेशन शुरू किया। जम्मू-कश्मीर पुलिस SOG और राष्ट्रीय राइफल्स के जवान धारा सांगला, गुर्जर नार और खेरोवाली ढोक में तलाशी ले रहे हैं।
क्या पुंछ ऑपरेशन में कोई मुठभेड़ हुई?
अधिकारियों के अनुसार, अब तक संदिग्ध आतंकवादियों के साथ कोई संपर्क या गोलीबारी नहीं हुई है। ऑपरेशन घने जंगल वाले दुर्गम इलाके में जारी है।
कठुआ के हीरानगर में क्या मिला?
कट्टल-ब्राह्मणा गाँव में सुभाष चंद्र के घर पर खुदाई के दौरान मजदूरों को जंग लगा हुआ पुराना मोर्टार शेल मिला। बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुँचकर इलाके को सुरक्षित किया।
सीमावर्ती इलाकों में पुराने मोर्टार शेल क्यों मिलते रहते हैं?
नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास दशकों के सैन्य टकराव के दौरान दागे गए हजारों शेल यांत्रिक खराबी या नरम जमीन के कारण फट नहीं पाते और जमीन में दब जाते हैं। खुदाई या पर्यावरणीय बदलावों के कारण ये UXO बाद में सामने आते हैं।
पुंछ-राजौरी बेल्ट में आतंकी गतिविधि की पृष्ठभूमि क्या है?
पुंछ और राजौरी जिले पिछले कुछ वर्षों में बार-बार आतंकी हमलों और संदिग्ध घुसपैठ की घटनाओं का केंद्र रहे हैं। सुरनकोट जैसे दूरदराज और जंगली इलाके भौगोलिक रूप से दुर्गम होने के कारण सुरक्षा अभियानों में चुनौती पेश करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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