बडगाम के युसमर्ग में दो आतंकवादी घिरे, पैरा कमांडो और राष्ट्रीय राइफल्स का सुरक्षा अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के युसमर्ग के ऊँचे पहाड़ी इलाके में गुरुवार, 3 सितंबर को सेना के 10 पैरा कमांडो का छिपे हुए आतंकवादियों से आमना-सामना हो गया। खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किए गए सीएएसओ (घेराबंदी और तलाशी अभियान) के दौरान पैरा कमांडो और 53 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने आतंकियों को चारों ओर से घेर लिया है। सूत्रों के अनुसार, घेराबंदी के भीतर दो आतंकवादी फँसे हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, युसमर्ग के ऊँचे इलाकों में गश्त कर रहे पैरा कमांडो दल को आतंकियों की मौजूदगी की विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद 53 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान मौके पर पहुँचे और घेराबंदी को और कड़ा कर दिया गया, ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी भाग न सकें।
यह इलाका बडगाम के खानसाहिब पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। घेरे को और मज़बूत करने के लिए पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की अतिरिक्त टुकड़ियाँ भी मौके पर तैनात की गई हैं।
सरकार और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि घेराबंदी को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि रात के अँधेरे में भी आतंकवादी बाहर न निकल सकें। सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ इलाके की नाकेबंदी किए हुए हैं और अभियान अभी भी जारी है।
बडगाम में आतंकवाद-विरोधी अभियानों का इतिहास
बडगाम जिला पहले भी कई बड़े आतंकवाद-विरोधी अभियानों का केंद्र रहा है। जनवरी 2023 में चरार-ए-शरीफ (जिनपंचाल/हपतनार) और रेडबुग (मगाम) इलाके में चलाए गए अभियान में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के दो आतंकवादी मारे गए थे। जनवरी 2022 में जोलवा चाडूरा गाँव में रात भर चली मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के तीन आतंकवादी ढेर हुए थे। अक्टूबर 2020 में चाडूरा और नौगाम के बाहरी इलाकों में भी मुठभेड़ें हुई थीं।
गौरतलब है कि बडगाम में अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन 1995 में चरार-ए-शरीफ कस्बे में चलाया गया था। पाकिस्तानी आतंकवादी मस्त गुल ने फरवरी-मार्च 1995 में हथियारबंद साथियों के साथ कस्बे पर कब्ज़ा कर शेख नूर-उद-दीन नूरानी की 14वीं सदी की ऐतिहासिक सूफी दरगाह में डेरा डाल लिया था। संयुक्त सुरक्षा बलों ने दरगाह की पवित्रता और नागरिकों की जान बचाने के लिए सीधे हमले से परहेज़ किया। 66 दिनों के सैन्य गतिरोध के बाद 11 मई 1995 की रात भीषण आग लगी जिसमें दरगाह और सैकड़ों लकड़ी के मकान जलकर राख हो गए। आतंकवादियों ने ही आग लगाई थी और इसी अफरातफरी में मस्त गुल भागकर पाकिस्तान लौट गया। उस लड़ाई में लगभग 20 आतंकवादी, 2 सैनिक और 5 नागरिक मारे गए थे।
आम जनता पर असर
युसमर्ग एक पर्यटन स्थल है और ऊँचे पहाड़ी क्षेत्र में सक्रिय घेराबंदी के कारण स्थानीय आवाजाही पर असर पड़ सकता है। सुरक्षा बलों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
क्या होगा आगे
अभियान अभी जारी है और अंतिम परिणाम की पुष्टि होना बाकी है। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक आतंकवाद-रोधी अभियानों की कड़ी का हिस्सा है।