23 अगस्त 2026
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एनआईए की जम्मू-कश्मीर में बड़ी कार्रवाई: सीमा पार आतंकी साजिश में 10 ठिकानों पर छापे

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एनआईए की जम्मू-कश्मीर में बड़ी कार्रवाई: सीमा पार आतंकी साजिश में 10 ठिकानों पर छापे

सारांश

एनआईए ने 22 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के पाँच जिलों में 10 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। यह कार्रवाई लश्कर-ए-तैबा से जुड़े कथित सीमा पार नेटवर्क की जांच का हिस्सा है, जो 31 मार्च 2026 की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई थी।

मुख्य बातें

एनआईए ने 22 अगस्त 2026 को श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में 10 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।
जांच 31 मार्च 2026 को लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) से जुड़े एक ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई, जिसके पास से हथगोला और जिंदा कारतूस मिले थे।
मामला यूए (पी) अधिनियम 1967 , शस्त्र अधिनियम 1959 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 के तहत दर्ज है।
कथित नेटवर्क घुसपैठिए आतंकवादियों को रसद, संचार, आश्रय और जासूसी में सहायता दे रहा था।
एनआईए वित्तीय लेन-देन, संचार माध्यम और हथियारों के स्रोत की भी जांच कर रही है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 22 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में 10 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई एक सीमा पार आतंकी साजिश की जांच के तहत की गई, जिसमें पाकिस्तान स्थित संचालकों और स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के कथित नेटवर्क की पहचान की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 31 मार्च 2026 की देर रात एक नाकाबंदी के दौरान शुरू हुआ, जब प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) से कथित रूप से जुड़े एक ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से एक हथगोला और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। प्रारंभिक मामला श्रीनगर के जकोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जिसे बाद में एनआईए ने पुनः पंजीकृत किया।

इस मामले में यूए (पी) अधिनियम, 1967 की धारा 23, शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 7 और 25 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 के तहत मुकदमा दर्ज है।

नेटवर्क की कार्यप्रणाली

जांच में सामने आया है कि इस कथित नेटवर्क के सदस्य घुसपैठिए आतंकवादियों को रसद, संचार, आश्रय और जासूसी जैसी सहायता प्रदान कर रहे थे। पाकिस्तान स्थित संचालकों और स्थानीय सहयोगियों के बीच कथित तौर पर सुनियोजित संपर्क था, जिसका उपयोग आतंकवादियों की आवाजाही और छुपाने के लिए भी किया जा रहा था।

एनआईए अब वित्तीय लेन-देन, संचार माध्यम, आरोपियों की आवाजाही तथा हथियारों और विस्फोटकों के स्रोत की भी पड़ताल कर रही है। गौरतलब है कि जांच के दौरान इस साजिश से कथित रूप से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

तलाशी का उद्देश्य

शनिवार को चलाए गए तलाशी अभियान का मकसद साजिश से जुड़े दस्तावेजी, डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाना और स्थानीय सहायता नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाना था। एजेंसी के अनुसार, अतिरिक्त साक्ष्य प्राप्त कर लिए गए हैं और उन्हें मामले में पहले एकत्रित सामग्री के साथ जांचा जा रहा है।

आगे की जांच

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान व्यापक सीमा पार आतंकी साजिश की चल रही जांच का हिस्सा है। एजेंसी इस नेटवर्क में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करने और उनकी कथित भूमिकाओं का संपूर्ण खुलासा करने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सीमा पार घुसपैठ की घटनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में यह तलाशी अभियान क्यों चलाया?
एनआईए ने एक सीमा पार आतंकी साजिश की जांच के तहत यह अभियान चलाया, जिसमें पाकिस्तान स्थित संचालकों और स्थानीय ओजीडब्ल्यू का कथित नेटवर्क शामिल है। इसका उद्देश्य दस्तावेजी, डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाना था।
यह मामला कब और कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 31 मार्च 2026 की देर रात एक नाकाबंदी पर लश्कर-ए-तैबा से कथित रूप से जुड़े एक ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ। उसके पास से एक हथगोला और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) क्या भूमिका निभाते हैं?
ओजीडब्ल्यू वे स्थानीय व्यक्ति होते हैं जो कथित तौर पर आतंकवादियों को रसद, आश्रय, संचार और जासूसी में सहायता देते हैं। इस मामले में वे घुसपैठिए आतंकवादियों की आवाजाही और छुपने में भी कथित रूप से मदद कर रहे थे।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लागू की गई हैं?
मामले में यूए (पी) अधिनियम, 1967 की धारा 23, शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 7 और 25 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 के तहत मुकदमा दर्ज है।
एनआईए की जांच में अब तक क्या सामने आया है?
जांच में पाकिस्तान स्थित संचालकों और स्थानीय सहयोगियों के बीच कथित संपर्क का खुलासा हुआ है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन, संचार माध्यम और हथियारों के स्रोत की भी पड़ताल कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की सीमा का पता लगाया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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