एनआईए का अनंतनाग में बड़ा छापा: आतंकी फंडिंग और जेईआई नेटवर्क की जांच में बिजबेहरा-डोरू निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 22 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच के तहत बिजबेहरा और डोरू में दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के साथ संयुक्त रूप से की गई इस कार्रवाई में टेरर फंडिंग, प्रतिबंधित संगठनों के नेटवर्क और ओवरग्राउंड वर्कर्स को निशाना बनाया गया है।
छापेमारी की पृष्ठभूमि और मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, एनआईए की यह कार्रवाई उन व्यापक जांचों का हिस्सा है जो टेरर फंडिंग और धर्मार्थ संस्थाओं के दुरुपयोग से जुड़ी हैं। विशेष रूप से प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) जैसे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, जो कथित तौर पर चैरिटी की आड़ में देश और विदेश से धन जुटाकर अलगाववादी गतिविधियों को वित्त पोषित करते थे।
यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान पहले से तेज़ हैं और एनआईए लगातार अपने जांच दायरे का विस्तार कर रही है।
किन संगठनों और नेटवर्कों पर है निशाना
जांच एजेंसी के अनुसार, इस अभियान के तहत कई आतंकी संगठनों से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और हाइब्रिड ऑपरेटिव्स की गतिविधियों की जांच हो रही है। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और अल-बद्र शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों में ड्रोन और सीमा पार तस्करी नेटवर्क के ज़रिए स्टिकी बम, आईईडी, हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ पहुँचाने के मामलों की भी जांच चल रही है।
डिजिटल प्रोपेगैंडा और कट्टरपंथ की जांच
एनआईए की जांच का एक अहम पहलू डिजिटल कट्टरपंथ से जुड़ा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, हैंडलर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाते हैं और नवगठित आतंकी संगठनों में उनकी भर्ती करते हैं। टेरर फंडिंग जांच का मुख्य उद्देश्य उन आर्थिक माध्यमों को अवरुद्ध करना है जिनसे पत्थरबाजी और सामाजिक अशांति को बढ़ावा मिलता रहा।
एनआईए की पिछली बड़ी कार्रवाइयाँ
गौरतलब है कि एनआईए ने इससे पहले हाफिज सईद और यासीन मलिक के अलावा हुर्रियत के प्रमुख नेताओं के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट दायर की थीं। जांच में जटिल हवाला नेटवर्क, सीमा पार व्यापार में हेरफेर और हिंसा को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फंडिंग चैनलों का पर्दाफाश हुआ था।
इसी क्रम में, महिला अलगाववादी संगठन 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की संस्थापक आसिया अंद्राबी को एनआईए की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि उनके मुख्य सहयोगियों को भारत के खिलाफ शारीरिक और डिजिटल युद्ध छेड़ने के आरोप में 30 वर्ष के कारावास की सजा दी गई थी।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, बिजबेहरा और डोरू में की गई छापेमारी से मिले दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। इस कार्रवाई के नतीजे जांच की अगली दिशा तय करेंगे। एनआईए का यह अभियान घाटी में आतंकी नेटवर्क की आर्थिक जड़ों को काटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।