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जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: CIK ने 6 जिलों में 8 ठिकानों पर मारे छापे

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जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: CIK ने 6 जिलों में 8 ठिकानों पर मारे छापे

सारांश

कश्मीर घाटी में आतंकी तंत्र पर एक और निर्णायक प्रहार। CIK ने 6 ज़िलों के 8 ठिकानों पर एक साथ छापे मारकर पाकिस्तान-प्रायोजित नेटवर्क, स्लीपर सेल और एन्क्रिप्टेड संचार के ज़रिये चल रही कट्टरपंथी भर्ती की कड़ियाँ खंगालीं। यह कार्रवाई अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा ग्रिड कसने की रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।

मुख्य बातें

CIK ने 3 जून को घाटी के 6 ज़िलों में 8 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे।
तलाशी स्थलों में श्रीनगर व बांदीपोरा में दो-दो, तथा अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा और सोपोर में एक-एक स्थान शामिल।
संदिग्ध कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये पाकिस्तान स्थित आतंकी संचालकों के संपर्क में थे।
कार्रवाई पुलिस स्टेशन CIK श्रीनगर में दर्ज FIR के आधार पर, सक्षम न्यायालय से वारंट लेकर की गई।
लक्ष्य: आपत्तिजनक सामग्री, OGWs की पहचान और आतंकी संबंधों की पुष्टि।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) शाखा ने बुधवार, 3 जून को आतंकवाद से जुड़े मामलों की जाँच के सिलसिले में घाटी के छह जिलों में आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी नेटवर्क, स्लीपर सेल और कट्टरपंथी भर्ती से जुड़ी चल रही जाँच का हिस्सा है। पुलिस स्टेशन CIK श्रीनगर में दर्ज एक FIR के आधार पर यह तलाशी अभियान शुरू किया गया।

कहाँ-कहाँ पड़े छापे

अधिकारियों ने बताया कि तलाशी स्थलों की पहचान ‘हालिया खुफिया जानकारी, तकनीकी विश्लेषण और निरंतर जाँच’ के आधार पर की गई। इनमें श्रीनगर में दो, बांदीपोरा में दो, तथा अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा और बारामूला ज़िले के सोपोर क्षेत्र में एक-एक स्थान शामिल हैं। यह व्यापक भौगोलिक दायरा संकेत देता है कि जाँच एजेंसियाँ पूरी घाटी में फैले एक संगठित तंत्र को निशाना बना रही हैं, न कि किसी एकल मॉड्यूल को।

एन्क्रिप्टेड संचार के सुराग

काउंटर इंटेलिजेंस की जाँच में सामने आया है कि संदिग्ध कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये पाकिस्तान स्थित आतंकी संचालकों के संपर्क में थे। अधिकारियों के अनुसार वे चरमपंथी प्रचार फैलाने, युवाओं को कट्टर बनाने और ज़मीनी आतंकी गतिविधियों में सहयोग करने में संलिप्त पाए गए हैं। यह पैटर्न पिछले कुछ वर्षों में घाटी में सामने आए कई मामलों जैसा ही है, जहाँ सीमा पार से डिजिटल माध्यमों के ज़रिये संचालन की पुष्टि हुई थी।

तलाशी का उद्देश्य

सूत्रों के अनुसार छापेमारी का मुख्य लक्ष्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करना, आतंकी संबंधों की पुष्टि करना, सहयोगियों एवं ज़मीनी ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) की पहचान करना और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए ठोस खुफिया इनपुट जुटाना है। अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी की गई हैं और सक्षम न्यायालय से विधिवत तलाशी वारंट प्राप्त किए गए हैं।

CIK की भूमिका और दायरा

जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस शाखा आपराधिक जाँच विभाग (CID) के अधीन कार्य करती है और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष रूप से आतंकवाद, तोड़फोड़, विध्वंस और आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले ही देखती है। शाखा के पास अपना समर्पित पुलिस स्टेशन है, जहाँ आतंकी मामलों में FIR दर्ज कर आगे की जाँच की जाती है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में CIK ने OGWs और हाइब्रिड आतंकियों के विरुद्ध कई समन्वित अभियान चलाए हैं।

आगे क्या

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेज़ों के फ़ोरेंसिक विश्लेषण के बाद गिरफ़्तारियाँ की जा सकती हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब घाटी में अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा ग्रिड को मज़बूत करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

परन्तु असली परीक्षा फ़ोरेंसिक साक्ष्यों से अदालत में टिकाऊ अभियोजन की है। केवल छापे आँकड़ों में दर्ज होकर रह जाएँ, यह जोखिम बना रहता है। अमरनाथ यात्रा से पहले की यह टाइमिंग भी रणनीतिक है — यह दिखाती है कि सुरक्षा तंत्र ‘प्रिवेंटिव डिटरेंस’ मोड में जा चुका है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CIK ने 3 जून को कहाँ-कहाँ छापे मारे?
काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने घाटी के छह ज़िलों — श्रीनगर, बांदीपोरा, अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा और बारामूला (सोपोर) — में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी ली। श्रीनगर और बांदीपोरा में दो-दो, बाकी ज़िलों में एक-एक स्थान पर छापा पड़ा।
छापेमारी किस आधार पर की गई?
यह कार्रवाई पुलिस स्टेशन CIK श्रीनगर में दर्ज एक FIR के आधार पर, सक्षम न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद की गई। अधिकारियों के अनुसार स्थलों की पहचान हालिया खुफिया इनपुट, तकनीकी विश्लेषण और चल रही जाँच के आधार पर हुई।
संदिग्धों पर क्या आरोप हैं?
जाँच में सामने आया है कि संदिग्ध कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये पाकिस्तान स्थित आतंकी संचालकों के संपर्क में थे। उन पर चरमपंथी प्रचार, कट्टरपंथी भर्ती और आतंकी गतिविधियों में सहयोग करने का आरोप है।
CIK शाखा क्या करती है?
जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस शाखा CID के अधीन कार्य करती है और केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद, तोड़फोड़, विध्वंस और आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले ही देखती है। इसका अपना समर्पित पुलिस स्टेशन है जहाँ ऐसे मामलों में FIR दर्ज की जाती है।
छापेमारी का अगला चरण क्या होगा?
अधिकारियों के अनुसार बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेज़ों के फ़ोरेंसिक विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई — संभावित गिरफ़्तारियाँ और सहयोगियों की पहचान — की जाएगी। उद्देश्य आतंकी संबंधों की पुष्टि और अभियोजन-योग्य खुफिया जानकारी जुटाना है।
राष्ट्र प्रेस
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