एनआईए की बड़ी कार्रवाई: टेरर फंडिंग मामले में 10 राज्यों की 20 जगहों पर एक साथ छापेमारी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 8 जुलाई 2026 को पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर देश के 10 राज्यों में एक साथ 20 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक व्यापक आतंकी साजिश और टेरर फंडिंग नेटवर्क की जांच के तहत की गई, जिसकी जड़ें विशाखापत्तनम में दर्ज एक रेडिकलाइजेशन मामले से जुड़ी हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह नेटवर्क कथित तौर पर विदेशी हैंडलर के निर्देश पर भारत में आतंकी गतिविधियाँ फैलाने की कोशिश कर रहा था।
छापेमारी का दायरा और स्थान
एनआईए की यह समन्वित कार्रवाई उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में एक साथ की गई। राज्यवार देखें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 5 स्थानों पर, आंध्र प्रदेश में 4, महाराष्ट्र में 3, दिल्ली में 2 और शेष छह राज्यों में एक-एक स्थान पर छापे मारे गए।
यह जांच विशाखापत्तनम शाखा में दर्ज टेरर-लिंक्ड रेडिकलाइजेशन केस के सिलसिले में चल रही है, जिसे हाल ही में एनआईए को सौंपा गया था।
बुलंदशहर में भारी नकदी बरामद
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एनआईए ने कॉस्मेटिक्स व्यापारी अब्दुल कादिर और उसके दो भाइयों फैसल तथा बिलाल के घरों पर छापा मारा। तीनों पर हवाला, टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिसे गिनने के लिए नोट-गिनती मशीनें मंगवाई गईं। घर के बाहर दो थानों की पुलिस तैनात है और मोहल्ला इंटा रोडी तथा आसपास के इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारियाँ
यह जांच 22 मार्च को विजयवाड़ा पुलिस द्वारा मोहम्मद रहमतुल्ला शरीफ नामक एक कथित रेडिकलाइज्ड व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद अप्रैल में पाँच और लोगों को गिरफ्तार किया गया — विजयवाड़ा के 23 वर्षीय मोहम्मद रहमतुल्ला शरीफ, 27 वर्षीय मोहम्मद दानिश और 23 वर्षीय मिर्जा सोहेल बेग, हैदराबाद की 38 वर्षीया सईदा बेगम तथा बेल्लारी (कर्नाटक) के अब्दुल सलाम। इन सभी ने कथित तौर पर भारत में आतंकी गतिविधियाँ चलाने की अपनी योजनाओं की जानकारी साझा की थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी विदेशी हैंडलर अल-हकीम शकूर के निर्देश पर एक्यूआईएस (AQIS) और आईएसआईएस (ISIS) की गतिविधियों को भारत में विस्तार देने का काम कर रहे थे। आरोपियों ने 'अल-मलिक इस्लामिक यूथ' नाम का एक संगठन बनाया था और कथित तौर पर युवाओं को आत्मघाती हमले करने के लिए उकसाने की कोशिश भी कर रहे थे।
कानूनी कार्रवाई और एफआईआर
विजयवाड़ा टू टाउन पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। एफआईआर में 12 आरोपियों के नाम हैं, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से हैं।
आगे की जांच
एनआईए अधिकारी अब आरोपियों के घरों और संपत्तियों की विस्तृत तलाशी ले रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के किसी अन्य व्यक्ति या संगठन से संबंध थे या नहीं। विजयवाड़ा के विंचीपेटा इलाके में भी तलाशी जारी है। यह कार्रवाई देश भर में आतंकी फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ एनआईए की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय समन्वित कार्रवाइयों में से एक है।