एनआईए की बड़ी कामयाबी: नार्को-आतंक आरोपी इकबाल सिंह उर्फ शेरा पुर्तगाल से भारत लाया गया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 13 मई 2026 को एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत हासिल की, जब वांछित नार्को-आतंक आरोपी इकबाल सिंह उर्फ शेरा को पुर्तगाल से भारत वापस लाया गया। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही एनआईए की एक टीम ने उसे तत्काल हिरासत में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, यह सफलता वर्षों तक चले कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों का परिणाम है।
कौन है इकबाल सिंह उर्फ शेरा
पंजाब के अमृतसर जिले का रहने वाला इकबाल सिंह उर्फ शेरा हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े एक बड़े आतंकी फंडिंग मामले का कथित मास्टरमाइंड है। एनआईए ने अपनी जांच में उसे भारत में सक्रिय एक नार्को-टेरर मॉड्यूल का मुख्य साजिशकर्ता और हैंडलर बताया है। वह 2020 से पुर्तगाल में फरार था।
जांचकर्ताओं के अनुसार, शेरा पाकिस्तान से भारत में हेरोइन की तस्करी का समन्वय करता था और उससे मिलने वाले पैसे को हवाला चैनलों के ज़रिए पाकिस्तान और कश्मीर स्थित हिजबुल मुजाहिदीन के गुर्गों तक पहुंचाता था, ताकि आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषण किया जा सके।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
इस मामले की जड़ें पंजाब पुलिस की उस कार्रवाई में हैं, जब हिजबुल मुजाहिदीन के कथित 'ओवरग्राउंड वर्कर' हिलाल अहमद शेरगोजरी को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से ड्रग्स की बिक्री से जुड़े ₹29 लाख बरामद हुए थे। हिलाल को मारे गए आतंकवादी कमांडर रियाज अहमद नाइकू का करीबी साथी बताया जाता है।
इसके बाद की जांच में नार्को-आतंकी फंडिंग से जुड़े ₹32 लाख और बरामद हुए, जो इस नेटवर्क से जुड़े पंजाब के अलग-अलग सदस्यों से मिले। इन बरामदगियों के बाद एनआईए ने जांच का जिम्मा संभाला और शेरा के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ कर दी।
कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया
एनआईए के अनुसार, शेरा को नार्को-आतंकी मॉड्यूल मामले में वांछित आरोपी घोषित किया गया था और अक्टूबर 2020 में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। जून 2021 में उसकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल नोटिस भी जारी किया गया। लंबी कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद बुधवार को उसे भारत लाया जा सका।
नार्को-टेरर नेटवर्क का ढांचा
अधिकारियों के अनुसार, शेरा ने पंजाब में एक सुव्यवस्थित नेटवर्क स्थापित किया था, जो तीन प्रमुख काम करता था — हेरोइन की सीमा पार तस्करी, नशीले पदार्थों से प्राप्त धन की वसूली, और उस धन को आतंकी हैंडलरों तक पहुंचाना। कथित तौर पर वह पाकिस्तान स्थित हिजबुल मुजाहिदीन के गुर्गों के सीधे संपर्क में था।
आगे की जांच
एनआईए ने पुष्टि की है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेरा की गिरफ्तारी से नार्को-आतंक नेटवर्क के और कई अहम सूत्र उजागर हो सकते हैं। यह प्रत्यर्पण भारत की सीमा पार आतंकवाद से निपटने की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।