जम्मू-कश्मीर: SIA ने लश्कर-ए-तैयबा ऑपरेटिव जामीर अहमद लोन की कुपवाड़ा में संपत्ति कुर्क की

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जम्मू-कश्मीर: SIA ने लश्कर-ए-तैयबा ऑपरेटिव जामीर अहमद लोन की कुपवाड़ा में संपत्ति कुर्क की

सारांश

जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी ने POJK से संचालित लश्कर-ए-तैयबा ऑपरेटिव जामीर अहमद लोन की कुपवाड़ा स्थित भूमि कुर्क कर नार्को-टेरर नेटवर्क की आर्थिक नींव पर सीधा प्रहार किया है। अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित आरोपी ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग कर रहा था।

मुख्य बातें

SIA ने 6 मई 2025 को लश्कर-ए-तैयबा ऑपरेटिव जामीर अहमद लोन की कुपवाड़ा स्थित 1 कनाल 14.37 मरला भूमि (खसरा नंबर 113 ) कुर्क की।
आरोपी पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) से संचालित हो रहा है और अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
मामला पहले एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने दर्ज किया था, बाद में आतंकी फंडिंग के खुलासे पर SIA को सौंपा गया।
SIA पहले ही ड्रग तस्करी, आतंकी फंडिंग और सीमा पार कनेक्शन के साक्ष्यों सहित विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत जम्मू-कश्मीर में नशे के विरुद्ध अभियान और तेज़ किया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेरर नेटवर्क के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक ऑपरेटिव की अचल संपत्ति को 6 मई 2025 को कुर्क कर लिया। आरोपी जामीर अहमद लोन, जो कुपवाड़ा जिले के मंडियां केरन का मूल निवासी है, फिलहाल पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) से संचालित हो रहा है और अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई एक व्यापक नार्को-टेरर मामले के तहत की गई है, जिसे शुरुआत में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने दर्ज किया था। जांच में आतंकी फंडिंग और सीमा पार नेटवर्क के गंभीर खुलासे सामने आने के बाद यह मामला SIA को स्थानांतरित कर दिया गया। जांच में सामने आया कि जामीर अहमद लोन ड्रग तस्करी और आतंकी गतिविधियों के ज़रिए जम्मू-कश्मीर की शांति और सुरक्षा को अस्थिर करने की साजिश में शामिल था।

अदालती आदेश और संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया

SIA ने अदालत में विस्तृत आवेदन दाखिल किया, जिसके बाद साक्ष्यों की जांच के उपरांत अदालत ने आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया। अदालती आदेश के अनुपालन में SIA की विशेष टीम ने कुपवाड़ा के मंडियां केरन क्षेत्र में स्थित 1 कनाल 14.37 मरला भूमि (खसरा नंबर 113) को कुर्क किया। यह कार्रवाई कार्यपालक मजिस्ट्रेट और स्थानीय राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में तय कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।

चार्जशीट और साक्ष्य

गौरतलब है कि SIA इस मामले में पहले ही विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें ड्रग तस्करी, आतंकी फंडिंग और सीमा पार आतंकी कनेक्शन से जुड़े ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। आरोपी गिरफ्तारी से बचता रहा और POJK से देश-विरोधी गतिविधियाँ जारी रखे हुए था, जिसके चलते अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किया।

SIA का संकल्प और नशा मुक्त अभियान

SIA ने कहा कि यह कार्रवाई आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और नार्को-टेरर नेटवर्क को समाप्त करने के उसके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा के विरुद्ध काम करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इसके साथ ही 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत जम्मू-कश्मीर में नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान को भी तेज़ किया जा रहा है — SIA अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर जागरूकता और रोकथाम के प्रयास भी कर रही है। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा पार से संचालित नेटवर्क की आर्थिक जड़ों पर भी प्रहार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो FATF के दबाव के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने तेज़ की है। हालाँकि असली परीक्षा तब होगी जब POJK में बैठे ऑपरेटिव को कानूनी दायरे में लाया जाएगा — जो फिलहाल कूटनीतिक और भौगोलिक दोनों कारणों से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। नार्को-टेरर का यह मॉडल — जहाँ ड्रग मनी सीधे आतंकी फंडिंग में तब्दील होती है — कश्मीर घाटी में नई जड़ें जमा रहा है, और संपत्ति कुर्की जैसे कदम ज़रूरी हैं, पर पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIA ने जामीर अहमद लोन की किस संपत्ति को कुर्क किया?
SIA ने कुपवाड़ा जिले के मंडियां केरन क्षेत्र में स्थित 1 कनाल 14.37 मरला भूमि (खसरा नंबर 113) को कुर्क किया। यह कार्रवाई अदालती आदेश के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट और राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में की गई।
जामीर अहमद लोन को भगोड़ा क्यों घोषित किया गया?
जामीर अहमद लोन गिरफ्तारी से बचता रहा और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से देश-विरोधी गतिविधियाँ जारी रखे हुए था, जिसके चलते अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किया। वह लश्कर-ए-तैयबा के लिए ड्रग तस्करी के ज़रिए आतंकी फंडिंग में कथित तौर पर संलिप्त था।
यह नार्को-टेरर मामला SIA को कैसे सौंपा गया?
यह मामला पहले एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने दर्ज किया था। जांच में आतंकी फंडिंग और सीमा पार नेटवर्क के व्यापक खुलासे सामने आने के बाद इसे SIA को स्थानांतरित कर दिया गया।
इस कार्रवाई का जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर क्या असर होगा?
SIA के अनुसार, यह कार्रवाई आतंकवाद और नार्को-टेरर नेटवर्क की आर्थिक जड़ों पर प्रहार करती है। संपत्ति कुर्की से आरोपी की स्थानीय वित्तीय शक्ति कमज़ोर होती है, जिससे सीमा पार से संचालित नेटवर्क को नुकसान पहुँचता है।
'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत जम्मू-कश्मीर में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
इस अभियान के तहत SIA अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर जांच, जागरूकता और रोकथाम के प्रयास कर रही है। नार्को-टेरर मामलों में संपत्ति कुर्की और चार्जशीट दाखिल करना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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