कांवड़ यात्रा में शांति बनाए रखें, हैदराबाद 'कलमा' विवाद निंदनीय: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 16 जुलाई को बरेली से तीन अहम धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर अपना पक्ष रखा — आगामी कांवड़ यात्रा में अनुशासन, हैदराबाद के एक स्कूल में कथित 'कलमा' होमवर्क विवाद, और मौलाना जरजिस के भगवान श्रीकृष्ण संबंधी विवादित बयान। उन्होंने सभी समुदायों से संयम और सौहार्द की अपील करते हुए कहा कि किसी भी धर्म की आस्था पर दबाव डालना देश की एकता के लिए खतरनाक है।
कांवड़ यात्रा: शांति और अनुशासन की अपील
मौलाना रजवी ने कहा कि 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि यात्रा पूर्णतः शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान बड़े-बड़े डीजे के इस्तेमाल से बचा जाए और रास्तों में किसी प्रकार का हुड़दंग न हो।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कई बार आम राहगीरों के वाहनों के साथ तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आती हैं, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं। उनके अनुसार, यदि कोई कानून अपने हाथ में लेता है तो इससे सामाजिक तनाव और विवाद की स्थिति पैदा होती है, जो यात्रा की पवित्रता को भी नुकसान पहुँचाती है।
नेमप्लेट विवाद पर स्पष्ट रुख
दुकानों पर नाम-पहचान के बोर्ड लगाने के विवाद पर मौलाना रजवी ने कहा कि इसमें कोई आपत्ति नहीं है — प्रत्येक दुकानदार को अपना बोर्ड लगाना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो फूड प्रोसेसिंग विभाग से अनुमति लेकर उसकी प्रति भी प्रदर्शित करनी चाहिए। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की दुकान केवल उसके धर्म के आधार पर हटाने या उसका विरोध करना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में कारोबार करने का मौलिक अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान होना चाहिए।
हैदराबाद 'कलमा' होमवर्क विवाद: निंदा और संतुलित दृष्टिकोण
हैदराबाद के एक स्कूल में कथित तौर पर गैर-मुस्लिम बच्चों को 'कलमा' लिखने का होमवर्क दिए जाने के विवाद पर मौलाना रजवी ने कहा कि यदि ऐसी घटना वास्तव में हुई है तो यह निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी गैर-मुस्लिम को इस्लामी धार्मिक वाक्य या कुरान की आयतें पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मुसलमान को 'जय श्रीराम' का नारा लगाने के लिए बाध्य किया जाता है, तो वह भी उतना ही गलत और आपत्तिजनक है। उनके अनुसार, किसी भी समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय पर धार्मिक नारे लगाने या अनुष्ठान करने का दबाव बनाना सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाता है और देश की छवि पर भी नकारात्मक असर डालता है।
मौलाना जरजिस के बयान पर असहमति
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जरजिस के उस कथित बयान पर — जिसमें कहा गया कि श्रीकृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे — मौलाना रजवी ने खुलकर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा दावा वास्तविक तथ्यों के विपरीत है।
उनके अनुसार, सनातन धर्म इस्लाम से कहीं अधिक प्राचीन है, जबकि इस्लाम को अस्तित्व में आए लगभग 1,500 वर्ष हुए हैं। नमाज इस्लामी परंपरा का हिस्सा है, इसलिए इसे भगवान श्रीकृष्ण के युग से जोड़ना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है। मौलाना रजवी ने धार्मिक नेताओं से अपील की कि वे ऐसे विवादित और भड़काऊ बयानों से बचें जो समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करें।
आगे की राह
मौलाना रजवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में कई धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर तनाव का माहौल बना हुआ है। उन्होंने दोनों समुदायों से अपील की कि वे संयम बरतें और ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहें जो सामाजिक एकता को कमज़ोर करे। गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती रहती है।