17 जुलाई 2026
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रुबियो का 67 देशों से आह्वान: वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ बनाओ वैश्विक मोर्चा

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रुबियो का 67 देशों से आह्वान: वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ बनाओ वैश्विक मोर्चा

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वॉशिंगटन में 67 देशों की बैठक में वामपंथी उग्रवाद को आतंकवाद-विरोधी रणनीति का 'ब्लाइंड स्पॉट' करार दिया और भारत समेत सभी भागीदार देशों से एकजुट अंतरराष्ट्रीय मोर्चा बनाने की अपील की।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 16 जुलाई 2026 को वॉशिंगटन में 67 देशों की मंत्री-स्तरीय बैठक में वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान का आह्वान किया।
बैठक में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सहित यूरोप व लैटिन अमेरिका के देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
विदेश विभाग ने चार हिंसक वामपंथी उग्रवादी संगठनों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम नंबर-7 के तहत एंटीफा नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने आतंकी फंडिंग नेटवर्क रोकने के लिए प्रतिबंधों और वित्तीय उपायों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 16 जुलाई 2026 को वॉशिंगटन स्थित विदेश विभाग में एक उच्चस्तरीय मंत्री-स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए दुनिया के देशों से कट्टर वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाने की अपील की। इस बैठक में भारत सहित 67 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। रुबियो ने कहा कि आतंकवाद-विरोधी रणनीतियों में वामपंथी उग्रवाद को अब तक उचित स्थान नहीं मिला, और यह चूक अब दूर होनी चाहिए।

बैठक में किसने लिया हिस्सा

विदेश विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, इस बैठक में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इज़रायल, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया सहित यूरोप व लैटिन अमेरिका के कई देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में राजनीतिक नेताओं, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने राजनीतिक हिंसा के नए तरीकों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ स्टीफन मिलर और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भी इस बैठक में शामिल हुए।

रुबियो ने क्या कहा

रुबियो ने बैठक में स्वीकार किया कि पिछले दो दशकों में सरकारों ने कट्टर इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की, लेकिन वामपंथी उग्रवाद पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "काफी लंबे समय तक हमारी आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक बड़ी कमी रही है। राजनीतिक वामपंथ से जुड़े उग्रवादी हिंसा के खतरे को लेकर हमारी सोच में एक ब्लाइंड स्पॉट रहा है। आज भी कई लोग इस बात को मानने से इनकार करते हैं कि कट्टर वामपंथी आतंकवाद एक गंभीर खतरा हो सकता है।" रुबियो ने यह भी कहा कि हर सरकार की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों की रक्षा करना है, और यह दायित्व किसी भी वैचारिक मतभेद से ऊपर है।

11/9 से सबक और नई रणनीति

11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद बने अंतरराष्ट्रीय सहयोग ढाँचे का हवाला देते हुए रुबियो ने कहा कि उसी मॉडल पर अब वामपंथी उग्रवाद से निपटना होगा। उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय खतरे का सामना कर रहे हैं — ये लोग आपस में संपर्क करते हैं, यात्रा करते हैं, प्रशिक्षण लेते हैं और एक साथ कार्रवाई करते हैं। वे एक ही तरह के ढाँचे, दुश्मनों और उद्देश्यों को साझा करते हैं।" रुबियो ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम नंबर-7 के तहत एंटीफा से जुड़े आतंकी नेटवर्क की जाँच और उन्हें रोकने के लिए कदम उठाए हैं। विदेश विभाग ने चार हिंसक वामपंथी उग्रवादी संगठनों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है और उनकी फंडिंग रोकने के लिए सूचना देने वालों को इनाम देने की भी घोषणा की है।

वित्तीय कार्रवाई पर ज़ोर

वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बैठक में कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग आतंकवादी संगठनों से जुड़े फंडिंग नेटवर्क को रोकने के लिए प्रतिबंधों और वित्तीय उपायों का इस्तेमाल जारी रखेगा। रुबियो ने स्पष्ट किया कि खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, कानून प्रवर्तन की साझा रणनीति और आर्थिक कार्रवाई के जरिए इन नेटवर्कों को एक-एक करके निष्क्रिय किया जाएगा।

भारत-अमेरिका सहयोग का महत्व

इस बैठक में भारत की भागीदारी दोनों देशों के बीच आतंकवाद-विरोधी साझेदारी की मज़बूती को रेखांकित करती है। 2001 के हमलों के बाद से दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने, आंतरिक सुरक्षा सहयोग और कानून प्रवर्तन संबंधों को लगातार गहरा किया है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ नई चिंताएँ पैदा कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में इस बैठक से निकले सहयोग-ढाँचे के ठोस स्वरूप पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें कुछ अनुत्तरित सवाल हैं — 'वामपंथी आतंकवाद' की परिभाषा को लेकर भागीदार देशों में आम सहमति कितनी है, यह स्पष्ट नहीं है। जहाँ अमेरिका एंटीफा को आतंकी नेटवर्क मानता है, वहीं कई यूरोपीय देश इस वर्गीकरण से सहमत नहीं रहे हैं। 67 देशों की उपस्थिति संख्यात्मक रूप से प्रभावशाली है, पर साझा परिभाषा और बाध्यकारी कार्रवाई-ढाँचे के बिना यह मंच प्रतीकात्मक रह सकता है। भारत की भागीदारी द्विपक्षीय सहयोग की निरंतरता दर्शाती है, लेकिन यह देखना होगा कि नई अमेरिकी प्राथमिकताएँ भारत की अपनी आतंकवाद-विरोधी चिंताओं — विशेषकर सीमा-पार आतंकवाद — के साथ किस हद तक संरेखित होती हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने वामपंथी आतंकवाद पर किस बैठक में बात की?
रुबियो ने 16 जुलाई 2026 को वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में आयोजित एक मंत्री-स्तरीय बैठक को संबोधित किया, जिसमें भारत सहित 67 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य कट्टर वामपंथी राजनीतिक हिंसा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का ढाँचा तैयार करना था।
रुबियो ने वामपंथी आतंकवाद को 'ब्लाइंड स्पॉट' क्यों कहा?
रुबियो के अनुसार, पिछले दो दशकों में सरकारों ने कट्टर इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ तो ठोस कार्रवाई की, लेकिन वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसा को आतंकवाद-विरोधी रणनीति में पर्याप्त स्थान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कई लोग अब भी इस खतरे को गंभीरता से लेने से इनकार करते हैं।
अमेरिका ने वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए हैं?
ट्रंप प्रशासन ने नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम नंबर-7 के तहत एंटीफा नेटवर्क की जाँच शुरू की है। विदेश विभाग ने चार हिंसक वामपंथी उग्रवादी संगठनों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है और उनकी फंडिंग रोकने के लिए सूचना देने वालों को इनाम देने की घोषणा भी की है।
इस बैठक में भारत की भागीदारी का क्या महत्व है?
भारत की उपस्थिति भारत-अमेरिका आतंकवाद-विरोधी साझेदारी की निरंतरता को दर्शाती है, जो 2001 के बाद से लगातार मज़बूत होती रही है। दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकी फंडिंग रोकने के क्षेत्र में द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करते रहे हैं।
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बैठक में क्या कहा?
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग आतंकवादी संगठनों से जुड़े फंडिंग नेटवर्क को रोकने के लिए प्रतिबंधों और वित्तीय उपायों का इस्तेमाल जारी रखेगा। उन्होंने खुफिया सहयोग बढ़ाने और राजनीतिक हिंसा का समर्थन करने वाले संगठनों के खिलाफ मिलकर कदम उठाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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