बेहाली अभ्यारण्य में वन विनाश पर असम के मंत्री जयंत मल्ला बरुआ सख्त, तत्काल बहाली और कड़ी कार्रवाई का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने 16 जुलाई 2026 को बेहाली वन्यजीव अभ्यारण्य का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अभ्यारण्य के उन क्षेत्रों में तत्काल वन आवरण की बहाली करेगी जहाँ बड़े पैमाने पर अवैध वृक्षों की कटाई की सूचना मिली है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस विनाश के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
उपग्रह चित्रों से उजागर हुई क्षति
बिश्वनाथ जिले में स्थित इस अभ्यारण्य का दौरा करने के बाद मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि उपग्रह चित्रों के विश्लेषण से पता चला है कि लगभग छह महीने पहले घने पेड़ों से आच्छादित वन क्षेत्र को तब से पूरी तरह साफ कर दिया गया है। उन्होंने कहा, 'हमने उपग्रह चित्रों के माध्यम से देखा कि पिछले कुछ महीनों में वन का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया है। इसीलिए मैं यहाँ व्यक्तिगत रूप से स्थिति का जायजा लेने आया हूँ।'
निरीक्षण के दौरान वन विभाग, असम पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मंत्री के साथ मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
सरकार की प्राथमिकता: संरक्षण और वृक्षारोपण
बरुआ ने स्पष्ट किया कि वनों का संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, 'जहाँ भी पेड़ काटे गए हैं, वहाँ हम बिना देरी किए वृक्षारोपण अभियान चलाएँगे। सरकार किसी भी परिस्थिति में वनों के विनाश को बढ़ावा नहीं देगी।' यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में वन क्षेत्र पर अतिक्रमण और अवैध कटाई की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
शरारती तत्वों पर आरोप, सरकार ने झाड़ा पल्ला
मंत्री ने आरोप लगाया कि यह क्षति निजी लाभ के लिए काम करने वाले शरारती तत्वों द्वारा की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की इन गतिविधियों में कोई भूमिका नहीं है। बरुआ ने कहा, 'कुछ असामाजिक तत्वों ने अपने स्वार्थ के लिए ये कृत्य किए हैं। वन विभाग एवं पुलिस दोनों ही इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।'
असम-अरुणाचल सीमा विवाद से अलग रखा मामला
असम-अरुणाचल प्रदेश की अंतर-राज्यीय सीमा का संदर्भ आने पर मंत्री ने दो-टूक कहा कि वन विनाश को सीमा विवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'सीमा विवाद एक अलग मामला है और गुवाहाटी उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार क्षेत्रीय समिति तंत्र के माध्यम से इसका समाधान किया जा रहा है। सीमा विवाद के नाम पर पेड़ों की कटाई को कोई भी उचित नहीं ठहरा सकता।'
गौरतलब है कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा पर दशकों पुराना विवाद चला आ रहा है, और वन क्षेत्र इस विवाद का संवेदनशील हिस्सा रहे हैं।
आगे क्या होगा
मंत्री ने दोहराया कि असम सरकार राज्य के वन संसाधनों की रक्षा करने और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। क्षति के विस्तृत आकलन के बाद वृक्षारोपण अभियान की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त जाँच जारी है और जल्द ही दोषियों की पहचान की जाएगी।