8 जुलाई 2026
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असमिया भाषा पर रोक नहीं, अवैध प्रवासियों पर कानूनी कार्रवाई होगी: AGP अध्यक्ष अतुल बोरा

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असमिया भाषा पर रोक नहीं, अवैध प्रवासियों पर कानूनी कार्रवाई होगी: AGP अध्यक्ष अतुल बोरा

सारांश

असम के मंत्री और AGP अध्यक्ष अतुल बोरा ने साफ किया — असमिया बोलना किसी के लिए भी प्रतिबंधित नहीं है, और अवैध विदेशी नागरिक, भाषा चाहे जो बोलें, कानून के तहत विदेशी ही माने जाएंगे। यह बयान असम में भाषा और नागरिकता की बहस के बीच आया है।

मुख्य बातें

अतुल बोरा (असम मंत्री व AGP अध्यक्ष) ने 8 जुलाई 2026 को कहा कि असमिया भाषा बोलने पर कोई रोक नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध विदेशी नागरिक, चाहे कोई भी भाषा बोलें, कानूनन विदेशी ही माने जाएंगे।
बयान असम विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में आया।
राज्य सरकार असमिया भाषा के संरक्षण को प्रोत्साहित करती है, लेकिन इसे सामुदायिक विभाजन का ज़रिया नहीं बनने देगी।
असम में घुसपैठ-विरोधी अभियान जारी है; सरकार का कहना है कि वास्तविक भारतीय नागरिकों को सत्यापन प्रक्रिया से डरने की ज़रूरत नहीं।

असम सरकार के मंत्री और असम गण परिषद (AGP) के अध्यक्ष अतुल बोरा ने 8 जुलाई 2026 को गुवाहाटी में स्पष्ट किया कि असम में कोई भी व्यक्ति असमिया भाषा बोल सकता है और भाषा के आधार पर किसी को परेशान करना पूरी तरह गलत है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि अवैध विदेशी नागरिकों के विरुद्ध कार्रवाई मौजूदा कानूनों के तहत ही होगी, चाहे वे कोई भी भाषा बोलते हों।

मंत्री का स्पष्ट रुख

असम विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पत्रकारों से बातचीत में अतुल बोरा ने कहा, 'यह आरोप पूरी तरह गलत है कि भाषा के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। असम में रहने वाला कोई भी व्यक्ति असमिया बोल सकता है। किसी भी व्यक्ति के लिए असमिया बोलना प्रतिबंधित नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार असमिया भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करती है, लेकिन भाषाई मुद्दे का इस्तेमाल सामुदायिक विभाजन के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

अवैध प्रवासियों पर सरकार का पक्ष

अवैध प्रवासियों के सवाल पर बोरा ने दो-टूक कहा, 'विदेशी, विदेशी ही होते हैं। इस मामले में मेरे मन में कोई भ्रम नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का कानूनी दर्जा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह कौन सी भाषा बोलता है — अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई संविधान और प्रचलित कानूनों के अनुसार की जाएगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय आया है जब असम में भाषाई पहचान और कथित बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल के महीनों में घुसपैठ-विरोधी अभियान तेज़ किया है। सरकार का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया से वास्तविक भारतीय नागरिकों को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।

आम जनता पर असर

सरकार का यह रुख उन अल्पसंख्यक भाषाई समुदायों के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है, जो भाषा-आधारित उत्पीड़न की आशंका जता रहे थे। AGP नेता के अनुसार, असमिया भाषा को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हुए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि अवैध प्रवासियों के विरुद्ध कार्रवाई एक अलग कानूनी प्रक्रिया है।

आगे क्या होगा

असम में घुसपैठ-विरोधी अभियान और भाषाई पहचान का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रहने की संभावना है। अतुल बोरा के इस बयान से सरकार ने भाषा और नागरिकता के मुद्दे को अलग-अलग रखने की अपनी नीति को फिर से रेखांकित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकारी आश्वासन अकेले उस अविश्वास को दूर नहीं कर सकते जो अल्पसंख्यक भाषाई समुदायों में घर कर गया है। घुसपैठ-विरोधी अभियान की तेज़ी और भाषाई बहस का एक साथ उभरना महज़ संयोग नहीं — यह राजनीतिक संदेश भी है। असली परीक्षा यह होगी कि सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है या नहीं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अतुल बोरा ने असमिया भाषा को लेकर क्या कहा?
असम मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि असम में रहने वाला कोई भी व्यक्ति असमिया भाषा बोल सकता है और किसी को भी असमिया बोलने से नहीं रोका गया है। उन्होंने भाषा के आधार पर उत्पीड़न के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया।
असम में अवैध प्रवासियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
अतुल बोरा के अनुसार, अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई संविधान और मौजूदा कानूनों के तहत होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का कानूनी दर्जा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह कौन सी भाषा बोलता है।
यह बयान किस संदर्भ में आया है?
यह बयान असम विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 8 जुलाई 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में आया। यह ऐसे समय में आया है जब असम में भाषाई पहचान और कथित बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है।
AGP का असमिया भाषा संरक्षण पर क्या रुख है?
असम गण परिषद (AGP) असमिया भाषा को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा मानती है और इसके संरक्षण व प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करती है। हालाँकि, पार्टी का कहना है कि भाषाई मुद्दे का इस्तेमाल समुदायों के बीच अनावश्यक विभाजन पैदा करने के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
असम में घुसपैठ-विरोधी अभियान से आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया से वास्तविक भारतीय नागरिकों को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। अभियान केवल अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान और निष्कासन पर केंद्रित है, न कि भाषाई या सांस्कृतिक आधार पर।
राष्ट्र प्रेस
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