क्या असम में विपक्ष के नेता पर भाजपा एजेंट होने का आरोप है?
सारांश
Key Takeaways
- सैकिया ने आरोपों को खारिज किया।
- राजनीतिक मतभेदों ने कांग्रेस में नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
- असम की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता।
गुवाहाटी, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के विपक्ष के नेता (एलओपी) देबब्रत सैकिया ने गुरुवार को पूर्व ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन (एएमएसयू) के अध्यक्ष रेजाउल करीम सरकार द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया। सरकार ने दावा किया था कि सैकिया भाजपा का एजेंट हैं और वह ‘मुख्यमंत्री के दूत या अल्पसंख्यक विरोधी’ के रूप में कार्यरत हैं।
सैकिया ने कहा कि उन्होंने रेजाउल करीम सरकार की विवादास्पद टिप्पणी पर उसी दिन खुलकर असहमति जताई थी, जिस दिन वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि असम का सामाजिक सद्भाव धुबरी और शिवसागर जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करने पर आधारित है।
सैकिया ने कहा कि हर क्षेत्र की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संरचना होती है। इस संतुलन को बिगाड़ने का कोई प्रयास अस्वीकार्य है। रेजाउल करीम सरकार ने आरोप लगाया था कि सैकिया भाजपा या राज्य सरकार की ओर से काम कर रहे थे। इस पर सैकिया ने कहा कि यह इतना बेतुका बयान है कि वह समझ नहीं पा रहे कि हंसें या रोएं।
उन्होंने बताया कि यदि इन दावों में कोई सत्यता होती, तो कांग्रेस नेतृत्व ने उनके एक दशक लंबे कार्यकाल के दौरान किसी न किसी स्तर पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की होती। सैकिया की यह प्रतिक्रिया रेजाउल करीम सरकार के 14 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफे के बाद आई है, जिसमें उन्होंने असम में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ “गहरे वैचारिक और नैतिक मतभेदों” का हवाला दिया था।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई को संबोधित अपने इस्तीफे पत्र में रेजाउल करीम सरकार ने कहा कि वह पार्टी की धर्मनिरपेक्ष भावना और संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित होकर कांग्रेस में शामिल हुए थे, लेकिन सैकिया और नागांव सांसद प्रद्युत बोरदोलोई सहित वरिष्ठ नेताओं के हालिया सार्वजनिक बयानों से निराश हैं।
रेजाउल करीम सरकार ने आरोप लगाया कि कई वरिष्ठ नेताओं का आचरण भाजपा एजेंटों जैसा है, जिससे उन्हें नैतिक पीड़ा हुई और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।
इस घटनाक्रम ने असम कांग्रेस के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेदों को उजागर किया है, जिससे पार्टी को आगामी चुनाव की तैयारियों में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।