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सड़क पर नमाज़ विवाद: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले — मजबूरी में ही पढ़ते हैं मुसलमान, CM धामी का बयान अनावश्यक

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सड़क पर नमाज़ विवाद: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले — मजबूरी में ही पढ़ते हैं मुसलमान, CM धामी का बयान अनावश्यक

सारांश

उत्तराखंड के CM धामी के सड़क पर नमाज़ संबंधी बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने पलटवार किया — मुसलमान मजबूरी में ही सड़क पर नमाज़ पढ़ते हैं, यह अनावश्यक मुद्दा है। साथ ही बकरीद पर कुर्बानी सार्वजनिक स्थानों से बचाने की अपील भी की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 23 मई 2026 को बरेली से CM पुष्कर सिंह धामी के नमाज़ संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
मौलाना ने कहा कि मुसलमान केवल मजबूरी में सड़क पर नमाज़ पढ़ते हैं; ईद, बकरीद, जुम्मा — सभी नमाज़ें मस्जिदों में ही अदा होती हैं।
उन्होंने CM धामी पर बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए अनावश्यक मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।
28 मई 2026 को बकरीद के मद्देनज़र मौलाना ने मुसलमानों से कुर्बानी सार्वजनिक स्थानों पर न देने और स्लॉटर हाउस का उपयोग करने की अपील की।
उन्होंने प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी से बचने की भी हिदायत दी, ताकि अन्य धर्मों की आस्था आहत न हो।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सड़कों पर नमाज़ पढ़ने संबंधी बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 23 मई 2026 को बरेली से तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजबूरी की स्थिति को छोड़ दिया जाए तो मुसलमान कभी सड़क पर नमाज़ नहीं पढ़ते — और यह बात सीएम धामी को भली-भाँति पता होनी चाहिए।

मौलाना रजवी का सीधा जवाब

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, 'मुसलमान कभी भी सड़क पर नमाज़ नहीं पढ़ते — केवल मजबूरी की बात अलग होती है। चाहे ईद हो, बकरीद हो, जुम्मे की नमाज़ हो या नियमित नमाज़ हो — सड़कों पर कभी नमाज़ नहीं पढ़ी जाती।' उन्होंने यह भी कहा कि नमाज़ी और खुदा के बीच किसी प्रकार की रुकावट उचित नहीं, और सड़क के शोर-शराबे में नमाज़ संभव नहीं — इसीलिए मुसलमान मस्जिदों को प्राथमिकता देते हैं।

CM धामी के बयान पर आरोप

मौलाना रजवी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी एक अनावश्यक मुद्दा खड़ा कर रहे हैं और बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाते हैं।

बकरीद और कुर्बानी विवाद पर स्पष्टीकरण

पश्चिम बंगाल और दिल्ली में कुर्बानी को लेकर चल रहे विवाद पर मौलाना रजवी ने कहा कि 28 मई को बकरा ईद है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने इस अफवाह को खारिज किया कि भारत में कुर्बानी प्रतिबंधित है।

उन्होंने मुसलमान समुदाय से विशेष अपील करते हुए कहा कि कुर्बानी सार्वजनिक स्थानों पर न दी जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कुर्बानी के समय मवेशी को ढककर रखें या स्लॉटर हाउस में कुर्बानी करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी न की जाए, क्योंकि इससे अन्य धर्मों की आस्था आहत होती है।

आगे क्या

गौरतलब है कि सड़क पर नमाज़ का मुद्दा उत्तर भारत में समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता रहा है। मौलाना रजवी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब बकरीद 2026 नज़दीक है और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ चल रही हैं। अब देखना होगा कि सीएम धामी इस प्रतिक्रिया पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बयानबाज़ी समय-समय पर उठाई जाती है। मौलाना रजवी की प्रतिक्रिया इस बार असामान्य रूप से व्यावहारिक है — उन्होंने अपने ही समुदाय को कुर्बानी और नमाज़ को लेकर संयम बरतने की सलाह दी, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है। असली सवाल यह है कि क्या इस तरह के बयान सामाजिक तनाव कम करते हैं या राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक पहचान को और गहरा करते हैं — और इस पर दोनों पक्षों की जवाबदेही ज़रूरी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने CM धामी के बयान पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मुसलमान केवल मजबूरी में ही सड़क पर नमाज़ पढ़ते हैं — ईद, बकरीद, जुम्मा या नियमित नमाज़ हमेशा मस्जिदों में ही अदा होती है। उन्होंने CM धामी पर अनावश्यक मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।
CM पुष्कर सिंह धामी ने सड़क पर नमाज़ को लेकर क्या बयान दिया था?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सड़कों पर नमाज़ पढ़ने के संदर्भ में एक बयान दिया था, जिस पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने आपत्ति जताई। बयान के सटीक शब्द स्रोत में उद्धृत नहीं हैं, लेकिन मौलाना रजवी ने इसे अनावश्यक और राजनीति से प्रेरित बताया।
बकरीद 2026 पर मौलाना रजवी ने मुसलमानों को क्या सलाह दी?
मौलाना रजवी ने मुसलमान समुदाय से अपील की कि 28 मई 2026 को बकरीद पर कुर्बानी सार्वजनिक स्थानों पर न दी जाए। उन्होंने स्लॉटर हाउस का उपयोग करने और प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी से बचने की हिदायत दी, ताकि अन्य धर्मों की भावनाएँ आहत न हों।
क्या भारत में कुर्बानी प्रतिबंधित है?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस अफवाह को सिरे से खारिज किया कि भारत में कुर्बानी प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, हालाँकि प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी से बचना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से ज़रूरी है।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है और मौलाना रजवी कौन हैं?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक राष्ट्रीय मुस्लिम धार्मिक संगठन है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और बरेली से धार्मिक व सामाजिक मुद्दों पर नियमित रूप से अपना पक्ष रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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