27 जून 2026
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कश्मीर नार्को-टेरर नेटवर्क: एसआईए ने भगोड़े बिलाल शब्बीर अवान के खिलाफ उद्घोषणा जारी की

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कश्मीर नार्को-टेरर नेटवर्क: एसआईए ने भगोड़े बिलाल शब्बीर अवान के खिलाफ उद्घोषणा जारी की

सारांश

एसआईए कश्मीर ने पाकिस्तान से संचालित नार्को-टेरर नेटवर्क के भगोड़े आरोपी बिलाल शब्बीर अवान के कुपवाड़ा स्थित घर पर उद्घोषणा की कार्रवाई की। जनवरी 2025 में श्रीनगर के बरथाना से हेरोइन जब्ती के बाद शुरू हुई जाँच में अब तक सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

मुख्य बातें

एसआईए कश्मीर ने 27 जून 2026 को भगोड़े आरोपी बिलाल शब्बीर अवान के खिलाफ उद्घोषणा की कार्रवाई की।
आरोपी कुपवाड़ा जिले की करनाह तहसील के दिलदार गाँव का निवासी है।
मामला जनवरी 2025 में श्रीनगर के बरथाना में हेरोइन जब्ती के बाद परिम्पोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था।
जाँच में पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क का सीमा-पार नार्को-टेरर ऑपरेशन उजागर हुआ।
यूएपीए के तहत अब तक सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल; बड़ी साजिश की जाँच जारी।

स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) कश्मीर ने 27 जून 2026 को एक सुनियोजित सीमा-पार नार्को-टेरर मामले में फरार आरोपी बिलाल शब्बीर अवान के खिलाफ उद्घोषणा की कार्रवाई की, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क द्वारा संचालित हेरोइन तस्करी से जुड़ा है। यह कार्रवाई सक्षम अदालत के आदेशों के अनुपालन में, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में कुपवाड़ा जिले की करनाह तहसील के दिलदार स्थित आरोपी के पैतृक घर पर की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मूल रूप से जनवरी 2025 में श्रीनगर के परिम्पोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। श्रीनगर के बरथाना में नाका चेकिंग के दौरान भारी मात्रा में हेरोइन जब्त की गई थी, जिसके बाद प्रारंभिक जाँच एसआईए कश्मीर को सौंपी गई। गौरतलब है कि यह मामला महज़ नशे की तस्करी तक सीमित नहीं था — जाँच में सामने आया कि यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करने के लिए नशीले पदार्थों की आय का उपयोग कर रहा था।

यूएपीए के तहत कार्रवाई

जाँच के दौरान एसआईए ने गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध दर्ज किए। एजेंसी अब तक इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिन पर सक्षम अदालत में मुकदमा जारी है। बिलाल शब्बीर अवान इस नेटवर्क का एक प्रमुख कड़ी बताया जा रहा है, जो अब तक कानून की पकड़ से बाहर था।

उद्घोषणा की प्रक्रिया और महत्त्व

उद्घोषणा की यह कार्रवाई तब की जाती है जब कोई आरोपी अदालती सम्मन के बावजूद उपस्थित नहीं होता और उसका पता लगाना कठिन हो जाता है। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया उसकी संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी का मार्ग प्रशस्त करती है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेरर के विरुद्ध एजेंसियाँ लगातार दबाव बढ़ा रही हैं।

एसआईए की प्रतिबद्धता

एसआईए कश्मीर ने स्पष्ट किया है कि वह 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत नार्को-टेरर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के संकल्प पर अडिग है। एजेंसी के अनुसार, हर भगोड़े आरोपी को चाहे वह कहीं भी छिपे, कानून के दायरे में लाया जाएगा। बड़ी साजिश की जाँच अभी भी जारी है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पाकिस्तान में बैठे इस नेटवर्क के सूत्रधारों तक पहुँच कैसे बनेगी। जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेरर का यह मॉडल नया नहीं है — नशे की कमाई से आतंक को वित्त देना एक दशक से अधिक पुरानी रणनीति है। सात चार्जशीट दाखिल होना जाँच की गहराई को बताता है, परंतु एक भगोड़े की उद्घोषणा तब तक अधूरी है जब तक वास्तविक गिरफ्तारी न हो। एजेंसी की 'नशा मुक्त भारत' की प्रतिबद्धता तभी विश्वसनीय बनेगी जब नेटवर्क के शीर्ष तक कार्रवाई पहुँचे।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईए कश्मीर ने किसके खिलाफ उद्घोषणा जारी की है?
एसआईए कश्मीर ने बिलाल शब्बीर अवान के खिलाफ उद्घोषणा जारी की है, जो कुपवाड़ा जिले की करनाह तहसील के दिलदार गाँव का निवासी है। वह पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क द्वारा संचालित सीमा-पार हेरोइन तस्करी और नार्को-टेरर मामले में आरोपी है।
कश्मीर नार्को-टेरर मामला क्या है और यह कब शुरू हुआ?
यह मामला जनवरी 2025 में श्रीनगर के बरथाना में नाका चेकिंग के दौरान भारी मात्रा में हेरोइन जब्त होने के बाद परिम्पोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। जाँच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित सीमा-पार नेटवर्क था जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को नशे की तस्करी की आय से वित्तपोषित कर रहा था।
इस मामले में अब तक कितने आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई है?
एसआईए कश्मीर ने इस मामले में अब तक सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिन पर सक्षम अदालत में मुकदमा जारी है। बड़ी साजिश की जाँच अभी भी चल रही है।
उद्घोषणा की कार्रवाई क्या होती है और यह क्यों की जाती है?
उद्घोषणा की कार्रवाई तब की जाती है जब कोई आरोपी अदालती सम्मन के बावजूद उपस्थित नहीं होता। यह दंड प्रक्रिया संहिता के तहत एक कानूनी प्रक्रिया है जो आरोपी की संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी का मार्ग खोलती है।
इस मामले में यूएपीए क्यों लगाया गया है?
जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि हेरोइन तस्करी का यह नेटवर्क केवल अपराध तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी आय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियाँ वित्तपोषित की जा रही थीं। इसी आधार पर गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध दर्ज किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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