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हरियाणा खिलाड़ियों को मिला हक: हुड्डा बोले — BJP ने 8 साल रोका, हाई कोर्ट ने दिलाया न्याय

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हरियाणा खिलाड़ियों को मिला हक: हुड्डा बोले — BJP ने 8 साल रोका, हाई कोर्ट ने दिलाया न्याय

सारांश

आठ साल की कानूनी लड़ाई के बाद हरियाणा के पदक विजेता खिलाड़ियों को हाई कोर्ट ने न्याय दिलाया — और सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया। हुड्डा ने इसे BJP की खेल-विरोधी सोच का प्रमाण बताया और कांग्रेस की 'पदक लाओ, पद पाओ' नीति की याद दिलाई।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने 4 सितंबर को हरियाणा के पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी, जिन्हें सिविल और पुलिस सेवाओं में नियुक्ति मिली।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने खिलाड़ियों के पक्ष में फैसला सुनाया और हरियाणा सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया।
हुड्डा के अनुसार, खिलाड़ियों को अपना हक पाने के लिए आठ वर्षों की कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
कांग्रेस की 'पदक लाओ, पद पाओ' नीति के तहत खिलाड़ियों को क्लास वन, क्लास टू और सीधे डीएसपी पद पर नियुक्ति का प्रावधान था।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने सत्ता में आने के बाद डीएसपी नियुक्ति के नियमों में बदलाव किया।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार, 4 सितंबर को उन पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी, जिन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अंततः राज्य की सिविल और पुलिस सेवाओं में नियुक्तियाँ प्राप्त हुई हैं। हुड्डा ने आरोप लगाया कि इन खिलाड़ियों को अपना वैध हक पाने के लिए आठ वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

न्यायालय का फैसला और सरकार पर जुर्माना

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस मामले में हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को करारा झटका दिया। न्यायालय ने न केवल खिलाड़ियों के पक्ष में फैसला सुनाया, बल्कि राज्य सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया। हुड्डा ने कहा कि यह निर्णय BJP सरकार की खेल और खिलाड़ियों के प्रति नकारात्मक नीति को उजागर करता है।

कांग्रेस की 'पदक लाओ, पद पाओ' नीति

हुड्डा ने याद दिलाया कि कांग्रेस के शासनकाल में 'पदक लाओ, पद पाओ' नीति लागू की गई थी, जिसके तहत पदक विजेता खिलाड़ियों को क्लास वन और क्लास टू के प्रतिष्ठित पदों पर नियुक्त करने तथा सीधे डीएसपी (उपाधीक्षक) के रूप में नियुक्ति देने का प्रावधान था। उनके अनुसार, इस नीति के परिणामस्वरूप हरियाणा के खिलाड़ियों ने वैश्विक मंच पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और लगभग हर खेल में अन्य राज्यों के खिलाड़ियों से बेहतर रहे।

BJP पर बदलाव का आरोप

हुड्डा ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने सत्ता में आते ही डीएसपी जैसे ऊँचे पदों पर खिलाड़ियों की नियुक्ति से संबंधित नियमों में बदलाव कर दिया। उनका कहना है कि यह सरकार खिलाड़ियों के साथ-साथ राज्य के नियमित कर्मचारियों, संविदा कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के प्रति भी प्रतिकूल रवैया अपनाती रही है।

व्यापक रोजगार विवाद

हुड्डा ने इस मुद्दे को केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक के फैसलों में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई रेगुलराइजेशन नीति को सही ठहराए जाने के बावजूद, BJP सरकार सफाई कर्मचारियों और अतिथि शिक्षकों को नियमित करने से इनकार करती रही है। उन्होंने कौशल निगम (स्किल कॉर्पोरेशन) के कर्मचारियों से किए गए वादे पूरे न करने का भी आरोप लगाया।

आगे का रुख

हुड्डा ने कहा कि BJP सरकार शायद ही कोई भर्ती प्रक्रिया न्यायालय के कड़े निर्देशों के बिना पूरी कर पाई हो। यह मामला हरियाणा में खेल नीति और सरकारी नियुक्तियों पर राजनीतिक बहस को और तेज करने की संभावना रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पद पाओ' नीति ने जो ढाँचा खड़ा किया, उसे अगली सरकार ने न केवल बदला बल्कि खिलाड़ियों को वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगवाए — और अंत में न्यायालय को ही हस्तक्षेप करना पड़ा। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है: जब नीतिगत निरंतरता की बजाय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सरकारी नियुक्तियों को तय करे, तो खिलाड़ी, कर्मचारी और युवा सभी न्यायपालिका की शरण में जाने को मजबूर होते हैं। हरियाणा में बार-बार न्यायालयों द्वारा सरकार को झटका मिलना इस बात का संकेत है कि नीति-निर्माण में जवाबदेही की गंभीर कमी है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा के पदक विजेता खिलाड़ियों का मामला क्या है?
हरियाणा के पदक विजेता खिलाड़ी राज्य की सिविल और पुलिस सेवाओं में नियुक्ति के लिए आठ वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और राज्य सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया।
कांग्रेस की 'पदक लाओ, पद पाओ' नीति क्या थी?
यह नीति कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू की गई थी, जिसके तहत पदक विजेता खिलाड़ियों को क्लास वन और क्लास टू के प्रतिष्ठित पदों पर और सीधे डीएसपी के रूप में नियुक्ति दी जाती थी। हुड्डा के अनुसार, इस नीति से हरियाणा के खिलाड़ियों ने वैश्विक मंच पर बेहतरीन प्रदर्शन किया।
BJP सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
भूपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया है कि BJP सरकार ने डीएसपी पदों पर खिलाड़ियों की नियुक्ति के नियमों में बदलाव किया और खिलाड़ियों को उनके वैध हक से वंचित रखा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सफाई कर्मचारियों, अतिथि शिक्षकों और कौशल निगम कर्मचारियों से किए वादे भी पूरे नहीं कर रही।
हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार पर जुर्माना क्यों लगाया?
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पदक विजेता खिलाड़ियों की नियुक्ति के मामले में सरकार के रवैये को अनुचित पाते हुए ₹50,000 का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना खिलाड़ियों को उनके वैध अधिकारों से वंचित रखने पर लगाया गया।
इस फैसले का हरियाणा की खेल नीति पर क्या असर होगा?
यह फैसला हरियाणा में खेल नीति और सरकारी नियुक्तियों पर राजनीतिक बहस को तेज करेगा। विपक्ष इसे BJP सरकार की खेल-विरोधी नीति के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि खिलाड़ियों को अब उनकी नियुक्तियाँ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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