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मोदी सरकार के 12 साल पर हुड्डा का हमला: बेरोज़गारी, महंगाई और किसान संकट पर उठाए सवाल

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मोदी सरकार के 12 साल पर हुड्डा का हमला: बेरोज़गारी, महंगाई और किसान संकट पर उठाए सवाल

सारांश

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने BJP को 'नॉन-परफॉर्मिंग' करार दिया। बेरोज़गारी, महंगाई, किसान संकट और रोहतक अग्निकांड — हर मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने पीड़ितों के लिए नौकरी और बढ़े मुआवज़े की माँग रखी।

मुख्य बातें

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 10 जून 2026 को चंडीगढ़ में मोदी सरकार के 12 वर्षीय कार्यकाल पर तीखी आलोचना की।
हुड्डा ने हरियाणा में BJP सरकार को 'नॉन-परफॉर्मिंग' बताया — मेट्रो, रेलवे, बिजली और शिक्षा में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं।
किसानों को MSP प्रभावी रूप से न मिलने और खेती की बढ़ती लागत को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
रोहतक अग्निकांड में 3 मौतें और 7-8 दुकानें राख; हुड्डा ने पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी व बढ़े मुआवज़े की माँग की।
दल-बदल पर हुड्डा का रुख — पार्टी बदलने से पहले पद छोड़कर जनता से नया जनादेश लेना ज़रूरी।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 10 जून 2026 को चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र और हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकारों के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बेरोज़गारी, महंगाई, किसानों की बदहाली और बुनियादी विकास कार्यों की कमी को मुद्दा बनाते हुए सरकार को 'नॉन-परफॉर्मिंग' करार दिया।

12 साल का लेखा-जोखा: हुड्डा के आरोप

हुड्डा ने कहा कि संसदीय कार्यकाल के हिसाब से 12 वर्ष एक लंबा समय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन BJP सरकारों के प्रदर्शन पर सवाल उठाना उनका अधिकार है। उनके अनुसार हरियाणा में भी BJP को सत्ता में लगभग 12 वर्ष हो चुके हैं, फिर भी राज्य में अपेक्षित विकास नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान न कोई बड़ी मेट्रो परियोजना शुरू हुई, न नई रेलवे लाइन बिछाई गई और न ही बिजली उत्पादन की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। हुड्डा ने यह भी कहा कि प्रदेश में कोई बड़ा शैक्षणिक संस्थान या विश्वविद्यालय स्थापित नहीं किया गया, जिससे युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकते।

किसान संकट और एमएसपी का मुद्दा

किसानों की समस्याओं पर हुड्डा ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों की आमदनी घट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी प्रभावी रूप से नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार इस कारण कृषि क्षेत्र गहरे संकट में है और किसान आर्थिक दबाव में जी रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब किसान आंदोलन के बाद से MSP की कानूनी गारंटी की माँग राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनी हुई है।

बेरोज़गारी और कानून-व्यवस्था पर चिंता

हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में बेरोज़गारी लगातार बढ़ी है और युवा रोज़गार के अवसरों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न सामाजिक सूचकांकों में हरियाणा की स्थिति चिंताजनक बताई गई है, जो सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करती है। कानून-व्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे।

रोहतक अग्निकांड: मुआवज़े और नौकरी की माँग

रोहतक के बाज़ार में लगी आग की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए हुड्डा ने बताया कि इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और सात-आठ दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो गईं। कई परिवारों की आजीविका का साधन खत्म हो गया है और मकानों को भी नुकसान पहुँचा है।

उन्होंने माँग की कि जिन परिवारों ने अपने परिजन खोए हैं, उन्हें मुआवज़े के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए। हुड्डा ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित मुआवज़ा पर्याप्त नहीं है और उसे बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही जिन व्यापारियों की दुकानें नष्ट हुई हैं, उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई भी सरकार को करनी चाहिए ताकि वे अपना कारोबार दोबारा शुरू कर सकें।

दल-बदल और विपक्षी एकता पर रुख

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के संबंधों तथा सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात पर पूछे गए सवाल पर हुड्डा ने कहा कि यह दोनों नेताओं के बीच की राजनीतिक बातचीत है और उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है। दल-बदल की राजनीति पर उन्होंने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि जो जनप्रतिनिधि पार्टी बदलना चाहते हैं, उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं के फैसले का सम्मान सर्वोपरि है।

हुड्डा के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब विपक्षी दल केंद्र सरकार के 12 वर्षीय कार्यकाल को लेकर अपना मूल्यांकन तेज़ कर रहे हैं और आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय सोचा-समझा है — 12 साल की सालगिरह एक स्वाभाविक राजनीतिक पड़ाव है जहाँ विपक्ष रिपोर्ट कार्ड माँगता है। असली सवाल यह है कि हरियाणा में विकास के जो मानक हुड्डा गिना रहे हैं — मेट्रो, रेलवे, विश्वविद्यालय — उनमें से कई उनके अपने मुख्यमंत्रित्व काल में भी अधूरे रहे। MSP की कानूनी गारंटी और किसान आय की बात करना ज़रूरी है, लेकिन यह एजेंडा तब और विश्वसनीय होता जब विपक्ष इसके लिए ठोस वैकल्पिक नीति भी सामने रखता। रोहतक अग्निकांड पर मुआवज़े की माँग सहानुभूतिपूर्ण है, पर राजनीतिक दबाव के बिना सरकारी संवेदनशीलता सुनिश्चित करना असली चुनौती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मोदी सरकार के 12 साल पर क्या कहा?
हुड्डा ने केंद्र और हरियाणा की BJP सरकारों को 'नॉन-परफॉर्मिंग' करार दिया। उन्होंने बेरोज़गारी, महंगाई, MSP न मिलने और बुनियादी ढाँचे की कमी को मुद्दा बनाते हुए कहा कि 12 साल में राज्य में कोई बड़ी मेट्रो, रेलवे या शैक्षणिक परियोजना नहीं आई।
रोहतक बाज़ार अग्निकांड में क्या हुआ और हुड्डा ने क्या माँग की?
रोहतक के एक बाज़ार में लगी आग में 3 लोगों की मौत हो गई और 7-8 दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो गईं। हुड्डा ने माँग की कि मृतकों के परिवारों को मुआवज़े के साथ एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और जले हुए व्यापारियों के नुकसान की भरपाई भी सरकार करे।
हुड्डा ने किसानों की किन समस्याओं का ज़िक्र किया?
हुड्डा ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि किसानों की आमदनी घट रही है। उनके अनुसार किसानों को MSP भी प्रभावी रूप से नहीं मिल पा रहा, जिससे कृषि क्षेत्र संकट में है।
हुड्डा का दल-बदल की राजनीति पर क्या रुख है?
हुड्डा ने कहा कि जो जनप्रतिनिधि पार्टी बदलना चाहते हैं, उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देकर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में मतदाताओं के फैसले का सम्मान सर्वोपरि है।
हुड्डा ने TMC-कांग्रेस संबंधों पर क्या कहा?
सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात पर हुड्डा ने कहा कि यह दोनों नेताओं के बीच की राजनीतिक बातचीत है और उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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