2 सितंबर 2026
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हरियाणा विधानसभा मानसून सत्र: हुड्डा बोले — 'ऐसी तानाशाही कभी नहीं देखी, भाजपा ने सदन में खुद उजागर किया अपना झूठ'

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हरियाणा विधानसभा मानसून सत्र: हुड्डा बोले — 'ऐसी तानाशाही कभी नहीं देखी, भाजपा ने सदन में खुद उजागर किया अपना झूठ'

सारांश

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने मानसून सत्र को 'काला अध्याय' करार दिया — विधायकों से धक्का-मुक्की, कौशल कर्मचारियों से झूठे वादे और 25,000 सफाई कर्मचारियों की नियमितीकरण की माँग। BJP पर आरोप है कि मुख्यमंत्री ने खुद सदन में स्वीकार किया कि कौशल नौकरियाँ स्थायी नहीं हैं।

मुख्य बातें

पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 2 सितंबर को कहा कि हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में वरिष्ठ विधायकों के साथ धक्का-मुक्की की गई — यह उनके पूरे राजनीतिक जीवन में पहली बार देखा गया ऐसा व्यवहार।
BJP पर आरोप: कौशल कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति तक नौकरी नियमित करने का वादा किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने स्वयं सदन में स्वीकार किया कि कौशल निगम एक वैकल्पिक व्यवस्था है और इसमें नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं।
कांग्रेस सरकार ने 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को नीतियाँ बनाकर तीन साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया था, जिसे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने सही ठहराया था।
कांग्रेस सरकार के दौरान नियुक्त 11,000 ग्रामीण और 14,000 शहरी सफाई कर्मचारी अब तक BJP सरकार में नियमित नहीं हुए।
हुड्डा ने माँग की कि सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाए; कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए भी इसका समर्थन करेगी।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 2 सितंबर को चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत में कहा कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हुए जैसा दुर्व्यवहार और तानाशाही रवैया कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वरिष्ठ विधायकों के साथ धक्का-मुक्की की और यह भी नहीं बताया कि यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई।

मानसून सत्र में क्या हुआ

विपक्ष के नेता हुड्डा ने कहा, 'BJP सरकार ने वरिष्ठ विधायकों के साथ जिस तरह का तानाशाही रवैया अपनाया, वह विधानसभा के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा। शांतिपूर्ण विरोध कर रहे विधायकों के साथ न केवल धक्का-मुक्की की गई, बल्कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि यह कार्रवाई किसके आदेश पर की गई।' उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे सत्र के दौरान सरकार केवल झूठ बोलती रही और सदन को गुमराह करती रही।

कौशल निगम विवाद: सरकार के अपने बयान से पर्दाफाश

हुड्डा ने कहा कि उन्होंने कौशल निगम और सफाई कर्मचारियों को लेकर सरकार के दावों की सच्चाई तथ्यों और आँकड़ों के ज़रिए सामने रखी। उनके अनुसार, BJP ने चुनाव के दौरान कौशल कर्मचारियों से नौकरी नियमित करने के झूठे वादे करके वोट हासिल किए थे। उन्होंने कहा, 'अब जब कांग्रेस भाजपा से अपना चुनावी वादा पूरा करने की माँग कर रही है, तो मुख्यमंत्री स्वयं सदन में कह चुके हैं कि कौशल निगम केवल एक वैकल्पिक व्यवस्था है और इसके तहत काम करने वाले कर्मचारियों को कभी भी नौकरी से हटाया जा सकता है। इस तरह सरकार ने खुद ही सदन के माध्यम से अपना झूठ पूरे प्रदेश के सामने उजागर कर दिया।'

दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हुड्डा ने कहा कि आज कौशल कर्मचारियों की स्थिति ऐसी हो गई है कि वे न तो पूरी तरह बेरोज़गार हैं और न ही नियमित वेतनभोगी कर्मचारी। उन्होंने कहा, 'उन्हें दिहाड़ी मज़दूरों जैसी स्थिति में पहुँचा दिया गया है। ये युवा कौशल कर्मचारी मजबूर हैं और लगातार शोषण का सामना कर रहे हैं।'

सफाई कर्मचारी नीति पर सरकार बनाम कांग्रेस

हुड्डा ने आरोप लगाया कि एक मंत्री ने सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर गलत जानकारी दी और दावा किया कि कांग्रेस ने केवल 10 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने की नीति बनाई थी। इसके जवाब में हुड्डा ने संबंधित सरकारी अधिसूचनाएँ दिखाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को दो नीतियाँ बनाई गई थीं, जिनके तहत तीन साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि इन नीतियों को उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ने सही ठहराया था।

उन्होंने कहा, 'इसके विपरीत BJP सरकार ने इन नीतियों के तहत नियुक्त कर्मचारियों को हटाने और उनकी सेवाएँ नियमित होने से रोकने की हर संभव कोशिश की।' हुड्डा ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस ऐसी नीति बना सकती थी, तो BJP सरकार सफाई कर्मचारियों के लिए वैसी नीति क्यों नहीं बना सकती।

आम जनता और कर्मचारियों पर असर

हुड्डा के अनुसार, सरकार द्वारा सफाई कर्मचारियों की माँगों को नज़रअंदाज़ किए जाने के कारण पूरे प्रदेश में कूड़े के ढेर लग गए हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान 11,000 ग्रामीण और 14,000 शहरी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन BJP सरकार ने आज तक उन्हें नियमित नहीं किया। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे राज्य में संविदा कर्मचारियों का आंदोलन जारी है।

कांग्रेस की माँग और आगे की राह

हुड्डा ने कहा, 'हम कांग्रेस की ओर से माँग करते हैं कि इन कर्मचारियों को नियमित करने का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाए। विपक्ष में होने के बावजूद हम इसका समर्थन करेंगे।' उन्होंने BJP पर सीधा आरोप लगाया कि यह सरकार गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के हित में कोई फैसला लेना ही नहीं चाहती। गौरतलब है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह संविदा कर्मचारियों का मुद्दा राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार उनकी धार इसलिए तीखी है क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री के सदन में दिए बयान को ही BJP के विरुद्ध हथियार बना दिया — यह महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, रिकॉर्ड पर मौजूद स्वीकारोक्ति है। कौशल निगम का मुद्दा दरअसल हरियाणा की उस व्यापक संविदा-रोज़गार समस्या का प्रतिबिंब है, जहाँ राज्य सरकारें चुनाव से पहले नियमितीकरण का वादा करती हैं और सत्ता में आने के बाद कानूनी और वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर पीछे हट जाती हैं। 25,000 से अधिक सफाई कर्मचारियों का एक दशक से लंबित नियमितीकरण और उसके चलते शहरों में फैला कूड़ा — यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि दलित और पिछड़े वर्गों के साथ राजनीतिक वादाखिलाफी का ठोस उदाहरण है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः सतही रहती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा विधानसभा मानसून सत्र में क्या हुआ जिसे हुड्डा ने 'काला अध्याय' कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वरिष्ठ विधायकों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें यह नहीं बताया गया कि यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई। हुड्डा ने इसे विधानसभा इतिहास में अभूतपूर्व तानाशाही रवैया बताया।
कौशल निगम कर्मचारियों का मुद्दा क्या है और BJP पर क्या आरोप है?
हुड्डा के अनुसार, BJP ने चुनाव के दौरान कौशल कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति तक नौकरी नियमित करने का वादा किया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने स्वयं सदन में स्वीकार किया कि कौशल निगम केवल एक वैकल्पिक व्यवस्था है और इसमें नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है, जिससे ये कर्मचारी दिहाड़ी मज़दूरों जैसी स्थिति में हैं।
कांग्रेस सरकार ने सफाई कर्मचारियों के लिए क्या नीति बनाई थी?
कांग्रेस सरकार ने 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को दो नीतियाँ बनाई थीं, जिनके तहत तीन साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया गया था। इन नीतियों को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने सही ठहराया था।
हरियाणा में कितने सफाई कर्मचारी नियमितीकरण का इंतज़ार कर रहे हैं?
हुड्डा के अनुसार, कांग्रेस सरकार के दौरान नियुक्त 11,000 ग्रामीण और 14,000 शहरी सफाई कर्मचारी — कुल 25,000 से अधिक — BJP सरकार में अब तक नियमित नहीं हुए हैं। उनकी माँगें नज़रअंदाज़ होने के कारण प्रदेश भर में कूड़े की समस्या बढ़ रही है।
कांग्रेस ने सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण पर क्या माँग रखी है?
हुड्डा ने माँग की है कि सफाई कर्मचारियों को नियमित करने का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के बावजूद कांग्रेस ऐसे किसी भी प्रस्ताव का समर्थन करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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