आरबीआई ने सरप्लस लिक्विडिटी से निपटने के लिए क्या वीआरआरआर नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम से 1 लाख करोड़ रुपए निकाले?

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आरबीआई ने सरप्लस लिक्विडिटी से निपटने के लिए क्या वीआरआरआर नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम से 1 लाख करोड़ रुपए निकाले?

सारांश

भारतीय रिजर्व बैंक ने वीआरआरआर नीलामी के माध्यम से 1 लाख करोड़ रुपए निकालकर अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम करने का प्रयास किया है। जानिए इसके पीछे के कारण और संभावित प्रभाव।

मुख्य बातें

आरबीआई ने 1,00,010 करोड़ रुपए की निकासी की।
सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने का प्रयास किया गया।
शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट में संभावित वृद्धि।
बैंकों को प्री-पेमेंट शुल्क न लगाने का निर्देश।
नवीनतम दिशा-निर्देश व्यवसाय-संबंधी ऋणों पर लागू होंगे।

मुंबई, 4 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को सात दिवसीय परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के जरिए बैंकिंग प्रणाली से 1,00,010 करोड़ रुपए निकालने का निर्णय लिया।

इस पहल का लक्ष्य वर्तमान में बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम करना है। आरबीआई के एक बयान के अनुसार, नीलामी के दौरान उसे 1,70,880 करोड़ रुपए की बोलियां प्राप्त हुईं।

केंद्रीय बैंक ने कहा, "इसमें से, उसने 5.47 प्रतिशत की कट-ऑफ दर पर 1,00,010 करोड़ रुपए स्वीकार किए।"

इस कदम से सरप्लस लिक्विडिटी में कमी आने की संभावना है और इससे शॉर्ट-टर्म ओवरनाइट रेट में वृद्धि हो सकती है।

आरबीआई के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग 4.04 लाख करोड़ रुपए का लिक्विडिटी सरप्लस था।

पिछले लिक्विडिटी अवशोषण प्रयासों के बावजूद, प्रणाली सरप्लस में बनी रही, जिसका मुख्य कारण महीने के अंत में वेतन और पेंशन संवितरण जैसे सरकारी प्रवाह थे।

इसके अतिरिक्त, सरकारी बॉंड और कूपन पेमेंट के रिडम्प्शन ने अधिक लिक्विडिटी को बढ़ावा दिया। पिछले सप्ताह, रिजर्व बैंक ने इसी तरह की वीआरआरआर नीलामी के माध्यम से प्रणाली से 84,975 करोड़ रुपए निकाले थे।

हालांकि, सरप्लस उच्च बना रहा। आरबीआई नियमित रूप से प्रणाली में लिक्विडिटी का प्रबंधन करने और शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट को अपनी मौद्रिक नीति के अनुसार रखने के लिए वीआरआरआर नीलामी आयोजित करता है।

इस बीच, केंद्रीय बैंक ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तियों और एमएसई द्वारा लिए गए फ्लोटिंग रेट लोन और एडवांस पर कोई प्री-पेमेंट शुल्क न लगाएं।

ये परिवर्तित दिशानिर्देश 1 जनवरी, 2026 को या उसके बाद स्वीकृत या नवीनीकृत सभी ऋणों पर लागू होंगे।

वर्तमान नियमों के अनुसार, बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पहले से ही गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तियों द्वारा लिए गए फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट पेनाल्टी लगाने से रोका गया है। हालांकि, नवीनतम निर्देश एक महत्वपूर्ण विस्तार दर्शाते हैं, जो अब व्यवसाय-संबंधी ऋणों पर भी लाभ प्रदान करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करना, शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट को स्थिर रखने में मदद करेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में संतुलन बना रहेगा। यह निर्णय देश की वित्तीय प्रणाली के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने कितने पैसे निकाले?
आरबीआई ने वीआरआरआर नीलामी के माध्यम से 1,00,010 करोड़ रुपए निकाले।
सरप्लस लिक्विडिटी कम करने का उद्देश्य क्या है?
सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने का उद्देश्य शॉर्ट-टर्म ओवरनाइट रेट को स्थिर रखना है।
राष्ट्र प्रेस
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