क्या ईडी की बड़ी कार्रवाई में 9.31 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई?

Click to start listening
क्या ईडी की बड़ी कार्रवाई में 9.31 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई?

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में 9.31 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है, जिसमें प्रमुख आरोपी और उनके सहयोगियों की संपत्तियां शामिल हैं। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

ईडी ने 9.31 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की हैं। क्यूएफएक्स ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। यह कार्रवाई शिकायतों पर आधारित है। संपत्तियां उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में हैं। यह वित्तीय अनुशासन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

चंडीगढ़, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चंडीगढ़ स्थित अपने जोनल कार्यालय से 26 अगस्त को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 9.31 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच कर लिया है।

ये संपत्तियां प्रमुख आरोपी नवाब उर्फ लैविश चौधरी, उसके सहयोगी राजेंद्र कुमार सूद और अन्य एजेंटों तथा उनके परिवारों की बताई जा रही हैं।

ईडी द्वारा अस्थायी रूप से अटैच की गई संपत्तियों में 45 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आवासीय फ्लैट, प्लॉट एवं कृषि भूमि शामिल है, जो उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं।

इसके अतिरिक्त, बैंक बैलेंस के रूप में कुछ चल संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि 2019 से 2025 के बीच हुए इस घोटाले में अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर इन संपत्तियों में निवेश किया गया। ये खाते अक्सर आरोपियों के रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर संचालित किए गए, ताकि काले धन का स्रोत छिपाया जा सके।

ईडी द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि यह घोटाला एक पोंजी और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) स्कीम के रूप में काम कर रहा था। क्यूएफएक्स ग्रुप ने निवेशकों को 5–6 प्रतिशत मासिक रिटर्न का झांसा देकर धन जुटाया, जबकि वास्तव में कोई विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) ट्रेडिंग नहीं की गई। निवेशकों से प्राप्त राशि को विभिन्न बैंक खातों में लेयरिंग के जरिए डाला गया और बाद में आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर चल रही कंपनियों और संपत्तियों में निवेश कर दिया गया।

ये धनराशि क्यूएफएक्स ग्रुप की संस्थाओं के खातों से होकर आरोपियों, उनके एजेंटों और परिवारजनों जैसे किशन, दिनेश कुमार चोपड़ा, चमन लाल, साजिद अली, राशिद अली आदि के खातों में पहुंची। इसके बाद इन्हीं पैसों से आरोपियों की पत्नियों, बेटों और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं।

यह कार्रवाई ईडी की पूर्व में की गई जांच का हिस्सा है। 11 फरवरी 2025 और 4 जुलाई 2025 को ईडी ने देशभर में क्यूएफएक्स ग्रुप से जुड़े कंपनियों, प्रमोटरों और एजेंटों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस समय 194 बैंक खातों को चिन्हित किया गया था, जिनमें 394 करोड़ रुपए की संदिग्ध राशि मिली थी। यह राशि भी अपराध से अर्जित धन को घुमाने का हिस्सा पाई गई।

क्यूएफएक्स ग्रुप के खिलाफ हिमाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों में एफआईआर दर्ज हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और प्राइज चिट्स एवं मनी सर्कुलेशन स्कीम (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं।

इस बार अटैच की गई संपत्तियों में 8.20 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति (27 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल) और 1.1 करोड़ रुपए की चल संपत्ति शामिल है। ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई घोटाले की वित्तीय जड़ को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे अब तक की जांच और जब्ती की प्रक्रिया को मजबूती मिली है।

Point of View

बल्कि समाज में विश्वास भी पैदा करेगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

ईडी की कार्रवाई का कारण क्या है?
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है, जिसमें प्रमुख आरोपी नवाब उर्फ लैविश चौधरी शामिल हैं।
क्यूएफएक्स ग्रुप का क्या संबंध है?
क्यूएफएक्स ग्रुप एक पोंजी स्कीम के माध्यम से निवेशकों से धन इकट्ठा करने का आरोपित है।
कितनी संपत्तियां अटैच की गई हैं?
ईडी ने 9.31 करोड़ रुपए की 45 अचल संपत्तियां अटैच की हैं।
आरोपियों के खिलाफ और क्या कार्रवाई की गई है?
अनेक राज्यों में एफआईआर दर्ज हैं और पहले भी छापेमारी की जा चुकी है।
इस कार्रवाई से क्या संदेश मिलता है?
यह कार्रवाई वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का संकेत है।
Nation Press