21 अगस्त 2026
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कर्नाटक अपार्टमेंट विधेयक 2026 विधानसभा में पेश, बिल्डर विवादों और एसोसिएशन झगड़ों पर लगेगी लगाम

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कर्नाटक अपार्टमेंट विधेयक 2026 विधानसभा में पेश, बिल्डर विवादों और एसोसिएशन झगड़ों पर लगेगी लगाम

सारांश

कर्नाटक सरकार ने 50 साल पुराने आवासीय कानूनों की जगह लेने के लिए अपार्टमेंट विधेयक 2026 पेश किया है। एक परियोजना-एक एसोसिएशन का नियम, बिल्डरों पर साझा क्षेत्र बेचने की रोक और पुनर्विकास के लिए 75% सहमति — यह विधेयक बेंगलुरु की बढ़ती अपार्टमेंट संस्कृति में कानूनी स्पष्टता लाने का बड़ा प्रयास है।

मुख्य बातें

कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व एवं प्रबंधन) विधेयक, 2026 को 21 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया।
प्रत्येक अपार्टमेंट परियोजना में केवल एक पंजीकृत रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की अनुमति होगी।
बिल्डर अब सामान्य क्षेत्रों, सड़कों और खुले स्थानों को निजी तौर पर नहीं बेच सकेंगे।
पुनर्विकास के लिए 75% अपार्टमेंट मालिकों की सहमति अनिवार्य; असहमत मालिक को बाज़ार मूल्य का दोगुना मुआवज़ा मिलेगा।
विवाद निपटान के लिए पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम स्तर पर सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों वाले प्राधिकारी नियुक्त होंगे।
विधेयक का मसौदा निवासियों और सार्वजनिक सुझावों के बाद बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने पेश किया।

कर्नाटक सरकार ने 21 अगस्त 2026 को विधानसभा में कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व एवं प्रबंधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसका उद्देश्य राज्य में अपार्टमेंट मालिकों और निवासियों को स्पष्ट कानूनी अधिकार देना और बिल्डरों के साथ चल रहे दीर्घकालिक विवादों का समाधान करना है। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि 1972-73 के पुराने कानून और मौजूदा रेरा ढाँचा आज की जटिल शहरी आवासीय समस्याओं के समाधान में अपर्याप्त सिद्ध हो चुके हैं।

विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा, 'जैसे-जैसे शहरों का विस्तार हो रहा है, ज़मीन सीमित और मूल्यवान संसाधन बनती जा रही है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग अपार्टमेंट में रहना पसंद कर रहे हैं। लेकिन 1972-73 के पुराने कानूनों और रेरा के तहत मौजूदा व्यवस्था आज की ज़रूरतों के अनुसार उभर रही जटिल समस्याओं का समाधान करने में पर्याप्त नहीं रही है।' गौरतलब है कि बेंगलुरु में पिछले एक दशक में अपार्टमेंट परियोजनाओं की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिसने प्रशासनिक और कानूनी रिक्तता को और स्पष्ट कर दिया है।

मंत्री ने बताया कि कई अपार्टमेंट परिसरों में दो या तीन अलग-अलग एसोसिएशन पंजीकृत हैं, जिससे निवासियों के बीच विवाद पैदा होते हैं। सामान्य उपयोग वाले क्षेत्रों, सड़कों और परिसर की दीवारों के स्वामित्व को लेकर बिल्डरों और निवासियों के बीच लगातार विवाद बने रहते हैं। इसके अलावा, पुराने और जर्जर अपार्टमेंट भवनों के पुनर्विकास के लिए कोई स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं थी।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

नए विधेयक के तहत प्रत्येक अपार्टमेंट प्रोजेक्ट में केवल एक पंजीकृत रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की अनुमति होगी। एक ही परियोजना के लिए अन्य कानूनों के तहत अलग-अलग एसोसिएशन बनाने पर रोक लगाई जाएगी। बिल्डर अपार्टमेंट परियोजना के सामान्य क्षेत्रों, सड़कों और खुले स्थानों को निजी तौर पर बेच, हस्तांतरित या उनमें बदलाव नहीं कर सकेंगे।

इन साझा क्षेत्रों का प्रबंधन और रखरखाव निवासी एसोसिएशन को सौंपना अनिवार्य होगा। विवादों के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम स्तर पर सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जिन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ दी जाएंगी।

पुनर्विकास के लिए नई व्यवस्था

पुराने और संरचनात्मक रूप से जर्जर अपार्टमेंट भवनों के पुनर्विकास के लिए विधेयक में स्पष्ट कानूनी प्रावधान किए गए हैं। पुनर्विकास के लिए कम से कम 75 प्रतिशत अपार्टमेंट मालिकों की सहमति अनिवार्य होगी। यदि कोई मालिक पुनर्विकास के लिए सहमत नहीं होता, तो उसकी संपत्ति का अधिग्रहण स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर बाज़ार मूल्य के दोगुने मुआवज़े के साथ किया जा सकेगा।

मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया

मंत्री ने बताया कि इस विधेयक का मसौदा अपार्टमेंट निवासियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया है। जब डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री थे, तब अपार्टमेंट निवासियों के साथ पहली बैठक हुई थी। इसके बाद करीब दो महीने पहले एक और बैठक आयोजित की गई। निवासियों के सुझावों को मसौदे में शामिल किया गया और फिर इसे सार्वजनिक सुझावों के लिए भी जारी किया गया। उन्होंने कहा, 'जनता से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद अब एक व्यापक और परिपक्व विधेयक तैयार कर विधानसभा में पेश किया गया है।'

आगे क्या होगा

यह विधेयक अब विधानसभा में विचार-विमर्श के अगले चरण में जाएगा। यदि यह पारित होता है, तो कर्नाटक उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने अपार्टमेंट प्रबंधन के लिए आधुनिक और व्यापक कानूनी ढाँचा स्थापित किया है। मंत्री गौड़ा ने कहा कि इस कानून का अंतिम लक्ष्य अपार्टमेंट मालिकों, निवासी संघों और बिल्डरों के बीच बेहतर, पारदर्शी और व्यवस्थित संबंध स्थापित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। पंचायत और नगर निगम स्तर पर 'सक्षम प्राधिकारी' नियुक्त करने की बात तो है, पर इन प्राधिकारियों की क्षमता, स्वतंत्रता और जवाबदेही का कोई स्पष्ट ढाँचा विधेयक में दिखाई नहीं देता। बेंगलुरु जैसे शहर में जहाँ हज़ारों परियोजनाएँ हैं और बिल्डर-निवासी विवाद वर्षों से अदालतों में लंबित हैं, महज़ एक नई परत जोड़ने से समस्या हल नहीं होगी। साथ ही, 75% सहमति की शर्त पुनर्विकास को सैद्धांतिक रूप से सक्षम बनाती है, लेकिन व्यवहार में अल्पसंख्यक मालिकों पर दबाव के जोखिम को भी जन्म दे सकती है — जिसकी निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व एवं प्रबंधन) विधेयक 2026 क्या है?
यह कर्नाटक सरकार द्वारा 21 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया विधेयक है, जो अपार्टमेंट मालिकों और निवासियों को स्पष्ट कानूनी अधिकार देने और बिल्डरों के साथ विवादों का समाधान करने के लिए बनाया गया है। यह 1972-73 के पुराने कानूनों की जगह लेगा।
इस विधेयक से अपार्टमेंट निवासियों को क्या फ़ायदा होगा?
निवासियों को अब एक ही मान्यता प्राप्त एसोसिएशन के ज़रिए अपने अधिकार मिलेंगे और बिल्डर साझा क्षेत्रों को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकेंगे। विवाद निपटान के लिए स्थानीय स्तर पर सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों वाले प्राधिकारी होंगे, जिससे लंबी अदालती लड़ाई से बचा जा सकेगा।
पुराने और जर्जर अपार्टमेंट के पुनर्विकास के लिए क्या नियम होंगे?
पुनर्विकास के लिए कम से कम 75% अपार्टमेंट मालिकों की सहमति अनिवार्य होगी। जो मालिक सहमत नहीं होंगे, उनकी संपत्ति का अधिग्रहण स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर बाज़ार मूल्य के दोगुने मुआवज़े के साथ किया जा सकेगा।
एक अपार्टमेंट परिसर में कितनी एसोसिएशन हो सकती हैं?
नए विधेयक के तहत प्रत्येक अपार्टमेंट परियोजना में केवल एक पंजीकृत रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की अनुमति होगी। एक ही परियोजना के लिए अन्य कानूनों के तहत अलग-अलग एसोसिएशन बनाने पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।
यह विधेयक मौजूदा रेरा कानून से अलग कैसे है?
रेरा मुख्यतः निर्माण चरण में बिल्डर की जवाबदेही और खरीदार के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि यह नया विधेयक परियोजना के पूरा होने के बाद के प्रबंधन, एसोसिएशन संचालन, साझा क्षेत्रों के स्वामित्व और पुनर्विकास जैसे पहलुओं को कवर करता है, जो रेरा के दायरे में नहीं आते।
राष्ट्र प्रेस
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