कर्नाटक अपार्टमेंट कानून 2025: 25,000 इमारतों के मालिकों को मिलेगी कानूनी सुरक्षा, हितधारक बैठक बुधवार को
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने राज्य के 25,000 से अधिक अपार्टमेंट इमारतों में रहने वाले लाखों फ्लैट मालिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नया व्यापक कानून लाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने 'कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व और प्रबंधन) अधिनियम' का मसौदा तैयार किया है, जो पाँच दशक पुराने दो मौजूदा कानूनों की जगह लेगा। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू तारामंडल परिसर में बुधवार सुबह 11 बजे हितधारकों की एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी।
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत
वर्तमान में लागू 'कर्नाटक अपार्टमेंट स्वामित्व अधिनियम, 1972' और 'कर्नाटक स्वामित्व फ्लैट अधिनियम, 1972' उस दौर में बने थे जब राज्य में अपार्टमेंट संस्कृति अभी अपनी शैशवावस्था में थी। पाँच दशकों में शहरीकरण की रफ्तार ने इन कानूनों की सीमाएँ उजागर कर दी हैं। सरकार के अनुसार, साझा क्षेत्रों के स्वामित्व, जमीन के अविभाजित हिस्से के हस्तांतरण, रखरखाव निधि की जवाबदेही और पुरानी इमारतों के पुनर्विकास जैसे मुद्दों पर इन कानूनों में स्पष्टता का अभाव है, जिसके चलते घर खरीदारों और बिल्डरों के बीच दीर्घकालीन कानूनी विवाद पैदा होते रहे हैं।
बेंगलुरु में अपार्टमेंट क्षेत्र का विस्तार
सरकार के आँकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में कर्नाटक में अपार्टमेंट परियोजनाओं का तेज़ी से विस्तार हुआ है। अकेले बेंगलुरु में 25,000 से अधिक अपार्टमेंट इमारतें हैं, जिनमें 25 से 30 लाख फ्लैट हैं। इसके अलावा, पिछले एक वर्ष में बेंगलुरु शहरी और आसपास के क्षेत्रों में कर्नाटक रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (RERA) के साथ 60,000 से 75,000 फ्लैट नए सिरे से पंजीकृत हुए हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि शहरों में अपार्टमेंट अब प्रमुख आवास व्यवस्था बन चुकी है।
नए कानून में क्या होगा खास
प्रस्तावित अधिनियम में अपार्टमेंट मालिकों को साझा क्षेत्रों और सुविधाओं का स्पष्ट स्वामित्व देने का प्रावधान है। इसके साथ ही अपार्टमेंट मालिकों की एसोसिएशन के गठन और संचालन के लिए स्पष्ट कानूनी ढाँचा तैयार किया जाएगा। रखरखाव निधि में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, विवादों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था बनाने और संरचनात्मक रूप से असुरक्षित पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया निर्धारित करने का भी प्रावधान है।
हितधारकों से सुझाव की प्रक्रिया
सरकार ने बताया कि विधेयक का मसौदा तैयार करते समय विभिन्न पक्षों से पहले ही चर्चा की जा चुकी है। अब बुधवार, 15 जुलाई को बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू तारामंडल परिसर में सुबह 11 बजे एक अंतिम हितधारक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में प्राप्त सुझावों को विधेयक के अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार इस कानून को व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ाना चाहती है।
आगे की राह
हितधारक बैठक के बाद विधेयक के अंतिम मसौदे को विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है। यदि यह कानून पारित होता है, तो यह बेंगलुरु सहित पूरे कर्नाटक के लाखों फ्लैट मालिकों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है — खासकर उन मामलों में जहाँ बिल्डरों और रहवासी संघों के बीच विवाद वर्षों से लंबित हैं।