कर्नाटक विधानसभा में 'बी-खाता' से 'ए-खाता' संशोधन विधेयक पास, लाखों परिवारों को मिलेगा कानूनी मालिकाना हक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा ने 21 अगस्त 2026 को 'कर्नाटक नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी, जिससे राज्य के शहरी इलाकों में अनधिकृत लेआउट में दशकों से रह रहे लाखों परिवारों को उनकी संपत्तियों का कानूनी मालिकाना हक मिलने का रास्ता खुल गया है। यह विधेयक उन संपत्ति मालिकों के लिए राहत लेकर आया है जो 'बी-खाता' रिकॉर्ड के कारण वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितता में फंसे हुए थे।
विधेयक में क्या है
नगर निगम अधिनियम की धारा 284 में किए गए इस संशोधन के तहत अनधिकृत लेआउट में स्थित योग्य संपत्तियों को 'ए-खाता' दर्जा दिलाने का कानूनी प्रावधान किया गया है। इससे पहले ऐसी संपत्तियों के लिए 'ए-खाता' जारी करने का कोई वैधानिक आधार नहीं था, इसलिए इन्हें 'बी-खाता' रिकॉर्ड में रखा जाता था, जो संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व की कानूनी पहचान नहीं देता।
मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा का बयान
विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि यह कदम राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की 'भूमि गारंटी' की प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हर संपत्ति मालिक को सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त मालिकाना हक दिलाना है। उन्होंने कहा, "नगर निगम अधिनियम की धारा 284 में यह संशोधन अनधिकृत लेआउट से जुड़ी बुनियादी समस्याओं को हल करने और संपत्ति मालिकों को पेश आ रही मुश्किलों के समाधान के लिए एक कानूनी रास्ता बनाने के मकसद से लाया जा रहा है।"
समस्या की जड़ें: तीन-चार दशकों की अनदेखी
बायरे गौड़ा ने स्वीकार किया कि पिछले तीन-चार दशकों में कर्नाटक के शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में अनधिकृत लेआउट बने। उन्होंने कहा, "यह जानते हुए भी कि ऐसे निर्माण अनधिकृत थे, पिछली सरकारों ने उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। साथ ही, लेआउट डेवलपर्स में भी जागरूकता की कमी थी कि कानून का उल्लंघन करके लेआउट नहीं बनाए जा सकते।" इन लेआउट में पर्याप्त चौड़ाई वाली सड़कें, बिजली कनेक्शन, भूमिगत जल निकासी, पेयजल आपूर्ति और तूफानी पानी की निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।
संपत्ति मालिकों पर असर
मंत्री ने स्पष्ट किया कि संपत्ति मालिक इस स्थिति में बिना किसी अपनी गलती के फंसे हैं। 'बी-खाता' रिकॉर्ड होने के कारण वे बैंक ऋण, संपत्ति हस्तांतरण और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में भारी परेशानी उठाते रहे हैं। 'ए-खाता' मिलने पर उन्हें नगर निगम की सेवाएँ, बैंक वित्तपोषण और संपत्ति के कानूनी लेन-देन की सुविधा मिलेगी।
आगे क्या होगा
सरकार ने 2024 में नए अनधिकृत लेआउट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था और आगे के उल्लंघनों को रोकने के लिए कदम उठाए थे। यह संशोधन विधेयक उसी नीति की अगली कड़ी है — एक ओर नए अनधिकृत निर्माण पर सख्ती, दूसरी ओर पुराने मामलों का कानूनी समाधान। गौरतलब है कि यह विधेयक अब विधान परिषद में भेजा जाएगा, जिसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति से यह कानून का रूप लेगा।