डीजल-ATF निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा: डीजल ₹14, ATF ₹12.5 प्रति लीटर; पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मंगलवार, 16 जून से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल गेन टैक्स में बढ़ोतरी की है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को ₹1.5 प्रति लीटर पर यथावत रखा गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल की पृष्ठभूमि में किया गया है।
नई दरें और पिछली दरों से तुलना
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर SAED को ₹13.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹14 प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, ATF पर SAED को ₹9.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹12.5 प्रति लीटर किया गया है — यानी एक झटके में ₹3 प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹1.5 प्रति लीटर पर बना रहेगा।
गौरतलब है कि घरेलू खपत के लिए उपयोग होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए घरेलू ईंधन कीमतों पर इस निर्णय का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
विंडफॉल टैक्स की समीक्षा प्रक्रिया
विंडफॉल गेन टैक्स की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है और इसका निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर होता है। यह तंत्र सरकार को बाज़ार की उठापटक के अनुसार शुल्क को तेज़ी से समायोजित करने की सुविधा देता है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल है और कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं।
इस कदम की पृष्ठभूमि
सरकार ने 26 मार्च को पहली बार डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाने का फैसला किया था। इसके बाद 16 मई को पेट्रोल को भी इस दायरे में लाया गया था। यह तीसरी बड़ी समीक्षा उसी नीतिगत ढाँचे का हिस्सा है।
इस कदम का मूल उद्देश्य दो गुना है — पहला, निर्यातकों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना; दूसरा, पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित कर देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करना।
आम जनता और उद्योग पर असर
चूँकि घरेलू उत्पाद शुल्क अपरिवर्तित है, इसलिए पेट्रोल पंपों पर ईंधन की खुदरा कीमतें फिलहाल नहीं बदलेंगी। हालाँकि, एयरलाइन उद्योग के लिए ATF पर बढ़ा हुआ निर्यात शुल्क यह संकेत देता है कि सरकार घरेलू विमानन क्षेत्र की ईंधन ज़रूरतों को प्राथमिकता दे रही है।
आगे आने वाले पखवाड़े में अगली समीक्षा के दौरान कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों की दिशा यह तय करेगी कि विंडफॉल टैक्स की दरें और बढ़ेंगी, घटेंगी या स्थिर रहेंगी।