एटीएफ की कीमत ₹5 प्रति लीटर घटी, दिल्ली में दाम ₹110 प्रति लीटर; एयरलाइंस को राहत
सारांश
मुख्य बातें
सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने 1 जुलाई 2026 से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में ₹5 प्रति लीटर की कटौती की है। इस संशोधन के बाद नई दिल्ली में ATF का दाम घटकर लगभग ₹110 प्रति लीटर रह गया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट इस कटौती की मुख्य वजह है।
कीमत घटने की वजह
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के बाद मध्य पूर्व में तनाव में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल के बाज़ार में नरमी देखी गई। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव $73.21 प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि WTI क्रूड फ्यूचर्स $70 प्रति बैरल की सीमा से नीचे $69.73 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। चूँकि ATF की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरों से जुड़ी होती हैं, इसलिए वैश्विक नरमी का सीधा असर घरेलू विमान ईंधन की दरों पर पड़ा है।
एयरलाइंस पर असर
ATF किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का 30–40% हिस्सा होता है, इसलिए यह कटौती घरेलू विमानन कंपनियों के लिए सीधी राहत है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक बचत प्रत्येक एयरलाइन की ईंधन खरीद रणनीति और हेजिंग नीति पर निर्भर करेगी। जिन एयरलाइनों ने पहले से ऊँचे दामों पर ईंधन हेज किया हुआ है, उन्हें इस कटौती का तत्काल लाभ नहीं मिल सकता।
विंडफॉल टैक्स में भी बदलाव
केंद्र सरकार ने एक साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में भी संशोधन किया है। पेट्रोल निर्यात पर SAED को ₹1.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹4 प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके विपरीत, डीजल निर्यात पर शुल्क को ₹14 प्रति लीटर से घटाकर ₹8.5 प्रति लीटर किया गया है। ATF के निर्यात पर भी शुल्क ₹12.5 प्रति लीटर से कम होकर ₹7.5 प्रति लीटर हो गया है। गौरतलब है कि घरेलू स्तर पर आपूर्ति किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल के उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय विमानन क्षेत्र यात्री संख्या में तेज़ बढ़ोतरी के बावजूद ईंधन लागत के दबाव से जूझ रहा है। ATF की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे हवाई किराए की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करता है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि कच्चे तेल में यह नरमी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में एयरलाइनों के मार्जिन में सुधार देखा जा सकता है।