सरकार का बड़ा निर्णय: घरेलू उड़ानों के एटीएफ पर 25 प्रतिशत की वृद्धि का नियंत्रण
सारांश
Key Takeaways
- एटीएफ की कीमतों में वृद्धि को 25 प्रतिशत तक सीमित किया गया है।
- यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा संकट के संदर्भ में लिया गया है।
- नागरिक उड्डयन मंत्री ने इसे एक दूरदर्शी कदम बताया।
- यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर नहीं।
- इससे हवाई किराए में अचानक वृद्धि से यात्रियों को राहत मिलेगी।
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में वृद्धि को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की आशंका थी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार की असाधारण स्थिति को देखते हुए लिया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण ईंधन की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे एटीएफ की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना बन गई थी।
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय के सहयोग से कीमतों में केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि की है। इसके तहत घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत में करीब 25 प्रतिशत यानी लगभग 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, ताकि हवाई किराए में अचानक भारी वृद्धि से यात्रियों को बचाया जा सके।
हालांकि, यह राहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू नहीं होगी। विदेशी रूट्स पर संचालित उड़ानों को एटीएफ की पूरी बढ़ी हुई वैश्विक कीमत का भुगतान करना होगा।
1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, देश के प्रमुख महानगरों में एटीएफ की कीमतों में वृद्धि हुई है। दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638.14 रुपए थी।
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे व्यावहारिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते एटीएफ की कीमतों में संभावित वृद्धि के समय लिया गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम यात्रियों को महंगे हवाई किराए से बचाने, घरेलू एयरलाइंस पर दबाव कम करने और विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस निर्णय का व्यापक आर्थिक असर भी सकारात्मक रहेगा, क्योंकि इससे माल ढुलाई और व्यापार के लिए आवश्यक हवाई संपर्क सुचारु बना रहेगा।
यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बीच आया है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधानों ने विश्वभर में ईंधन की लागत को बढ़ा दिया है।
तेल कंपनी के अनुसार, एटीएफ की कीमतों में लगभग 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, न कि पहले बताए गए 115 प्रतिशत की। जेट ईंधन की मौजूदा कीमत लगभग 1.04 लाख रुपए प्रति किलोलीटर है।