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सरकार ने डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 55.5 रुपए, एटीएफ पर 42 रुपए किया: नया निर्णय

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सरकार ने डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 55.5 रुपए, एटीएफ पर 42 रुपए किया: नया निर्णय

सारांश

सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। डीजल का शुल्क 55.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ का 42 रुपए प्रति लीटर हो गया है। यह कदम घरेलू ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।

मुख्य बातें

डीजल निर्यात शुल्क में वृद्धि: 21.5 से 55.5 रुपए प्रति लीटर एटीएफ निर्यात शुल्क बढ़कर 42 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल पर कोई परिवर्तन नहीं घरेलू ईंधन उपलब्धता को सुनिश्चित करने का निर्णय विंडफॉल टैक्स फ्रेमवर्क का हिस्सा

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने शनिवार को डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 55.5 रुपए प्रति लीटर हो गया है, वहीं एटीएफ पर यह शुल्क 29.5 रुपए से बढ़ाकर 42 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, पेट्रोल पर कोई परिवर्तन नहीं किया गया है और इसकी निर्यात ड्यूटी अब भी शून्य बनी हुई है।

सरकार का यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस निर्णय का लक्ष्य राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि निर्यातक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों में असमानता का अनुचित लाभ न उठा सकें।

यह निर्णय विंडफॉल टैक्स फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार समय-समय पर ईंधन निर्यात पर टैक्स में बदलाव करती रहती है, ताकि रिफाइनरियों के लाभ और घरेलू आवश्यकताओं के बीच संतुलन बना रहे।

इसके अलावा, सरकार एटीएफ पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट को कम करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। इस विषय में नागर विमानन मंत्रालय अन्य विभागों और राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रहा है।

महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में ऊंचे टैक्स के चलते मेट्रो एयरपोर्ट्स पर एटीएफ की कीमतें अधिक बनी हुई हैं। इस स्थिति में, सरकार एयरपोर्ट से जुड़े कुछ शुल्कों में कमी लाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है और इस पर एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ चर्चा करने की योजना है।

यह ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसके चलते 26 मार्च को सरकार ने डीजल और एटीएफ पर पहले ही निर्यात शुल्क लागू किया था। यह कदम घरेलू सप्लाई को बढ़ाने और निर्यातकों को अधिक लाभ लेने से रोकने के लिए उठाया गया था, क्योंकि युद्ध की शुरुआत के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति और बिगड़ी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ। हालांकि, 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी, जिससे बाजार को कुछ राहत मिली। फिर भी, सरकार ने घरेलू आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिल सके।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजल पर नया निर्यात शुल्क कितना है?
डीजल पर नया निर्यात शुल्क 55.5 रुपए प्रति लीटर है।
एटीएफ पर निर्यात शुल्क में क्या बदलाव किया गया है?
एटीएफ पर निर्यात शुल्क को 42 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
क्या पेट्रोल पर निर्यात शुल्क में कोई परिवर्तन हुआ है?
नहीं, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क अभी भी शून्य है।
सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया है?
यह निर्णय घरेलू ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यातकों को अनुचित लाभ उठाने से रोकने के लिए लिया गया है।
क्या सरकार एटीएफ पर वैट कम करने पर विचार कर रही है?
हाँ, सरकार एटीएफ पर राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट कम करने के विकल्प पर विचार कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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