ओएमसी को एटीएफ बिक्री पर प्रति लीटर 64 रुपए का नुकसान, वैश्विक तेल संकट का प्रभाव
सारांश
Key Takeaways
- एटीएफ की कीमतों में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी
- ओएमसी को 64 रुपए प्रति लीटर का नुकसान
- विदेशी एयरलाइंस के लिए 114.5 प्रतिशत की वृद्धि
- घरेलू एयरलाइंस को 65 प्रतिशत बिक्री का हिस्सा
- कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी से तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत अल्पकालिक बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते, सरकारी तेल कंपनियाँ एटीएफ की बिक्री पर काफी नुकसान में हैं।
वर्तमान मूल्यांकन के अनुसार, ओएमसी को घरेलू एटीएफ बिक्री पर लगभग 64 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, जो 109 डॉलर प्रति बैरल के मार्केटिंग लॉस के बराबर है।
विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा स्थितियों में सालाना आधार पर एटीएफ से होने वाला नुकसान इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के लिए 23,600 करोड़ रुपए, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए 9,500 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए 5,300 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों में 8,289.04 रुपए प्रति किलोलीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिससे यह 96,638.14 रुपए से बढ़कर 1,04,927.18 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है।
हालांकि, यह बढ़ोतरी वैश्विक तेल कीमतों में आई वृद्धि के मुकाबले कम है।
विदेशी एयरलाइंस, चार्टर और अन्य गैर-नियमित उड़ान ऑपरेटरों के लिए एटीएफ की कीमतों में 114.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे यह 2,07,341.22 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है।
एटीएफ, ओएमसी के कुल मार्केटिंग वॉल्यूम का केवल 2-6 प्रतिशत है, लेकिन सरकारी कंपनियों का इस क्षेत्र में दबदबा है, जिनकी बाजार हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है। भारत में कुल एटीएफ बिक्री का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा घरेलू एयरलाइंस को जाता है।
इसके अलावा, मजबूत ऊर्जा रुझानों के कारण बुधवार को कमर्शियल एलपीजी और प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भी वृद्धि की गई है। हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर कंपनियाँ अभी भी नुकसान झेल रही हैं।
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में नोमुरा ने गुजरात गैस को सबसे अधिक प्रभावित बताया है, क्योंकि यह कंपनी शॉर्ट-टर्म और स्पॉट एलएनजी पर निर्भर है, जिसकी कीमतें 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद दोगुनी हो गई हैं।
ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) रिफाइनरी पर विंडफॉल टैक्स लागू नहीं होता है।
इसी बीच, गुरुवार को बीएसई में इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।