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मनोहर लाल का दावा: टीओडी और शुल्क नियम 2026 मेट्रो कॉरिडोर के माध्यम से शहरी विकास को संजीवनी देंगे

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मनोहर लाल का दावा: टीओडी और शुल्क नियम 2026 मेट्रो कॉरिडोर के माध्यम से शहरी विकास को संजीवनी देंगे

सारांश

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि पारगमन उन्मुख विकास और शुल्क नियम, 2026 मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध और टिकाऊ शहरी विकास को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे सस्ते आवासों का निर्माण संभव होगा। जानिए इस महत्वपूर्ण नीति के बारे में अधिक।

मुख्य बातें

पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) को बढ़ावा दिया जाएगा।
2026 मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध विकास।
सस्ते आवासों का निर्माण संभव होगा।
नई नीति में लचीलापन है।
प्रमुख क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को जानकारी दी कि पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) और शुल्क संबंधित विनियम, 2026 मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध, टिकाऊ और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े आवासीय शहरी विकास को प्रोत्साहित करेंगे। इससे पहुँच में सुधार होगा और बड़े पैमाने पर सस्ते आवास का निर्माण संभव होगा।

केंद्रीय मंत्री ने 2026 की अधिसूचना के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ये महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम के नेतृत्व में दिल्ली को सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए युग की ओर ले जाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करना है।

पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) की अवधारणा को पहले ही दिल्ली मास्टर प्लान 2021 में शामिल किया जा चुका है।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान नीति में कॉरिडोर आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे 207 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र, जो मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर और रेलवे स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में है, मुख्यतः योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के माध्यम से सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए खुल जाएगा।

इस 207 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 80 वर्ग किलोमीटर का वह क्षेत्र जो भूमि पूलिंग, कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्र और अनधिकृत कॉलोनियों के अंतर्गत आता है, अब नई टीओडी नीति के दायरे में शामिल किया गया है।

इस नीति में लचीलापन है, जिससे मौजूदा और प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर/आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ टीओडी विकास की संभावनाएँ बढ़ेंगी। इससे टीओडी विकास नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के अनुरूप हो सकेगा, जिससे सस्ते आवास और उनसे संबंधित बुनियादी ढांचे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किए जा सकेंगे। इससे मेट्रो यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।

सरकार के अनुसार, इस नीति के तहत टीओडी प्रावधानों में 2000 वर्ग मीटर के छोटे भूखंडों का विकास संभव होगा।

2000 वर्ग मीटर और उससे अधिक के भूखंडों पर 18 मीटर चौड़ी सड़क के साथ टीओडी क्षेत्र में अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक के एफएआर की स्वीकृति होगी। इसमें से स्वीकृत कुल एफएआर का 65 प्रतिशत अनिवार्य रूप से आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है, जिसमें 100 वर्ग मीटर (≤ 99 वर्ग मीटर) के निर्मित क्षेत्र वाली आवासीय इकाइयाँ शामिल हैं ताकि मेट्रो कॉरिडोर के साथ सस्ते आवास उपलब्ध हो सकें।

सरकार के अनुसार, इस नीति के तहत टीओडी शुल्कों को सरल बनाया गया है और एक ही टीओडी शुल्क प्रस्तावित किया गया है, जिसमें विभिन्न शुल्क सम्मिलित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि वर्तमान समय की आवश्यकता है। हालांकि, इसका प्रभाव सही तरीके से लागू होने पर ही स्पष्ट होगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस नीति से सस्ते आवास कैसे उपलब्ध होंगे?
इस नीति के अंतर्गत मेट्रो कॉरिडोर के आसपास सस्ते आवासों का विकास संभव होगा, जिससे लोगों को बेहतर आवास मिल सकेगा।
क्या यह नीति सभी क्षेत्रों में लागू होगी?
यह नीति विशेष रूप से उन क्षेत्रों में लागू होगी जो मेट्रो कॉरिडोर के पास स्थित हैं।
क्या टीओडी नीति में लचीलापन है?
हाँ, इस नीति में लचीलापन है ताकि विभिन्न मेट्रो कॉरिडोर के अनुरूप विकास संभव हो सके।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस नीति का मुख्य उद्देश्य योजनाबद्ध और टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
राष्ट्र प्रेस
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