कैबिनेट ने एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के लिए लागत में वृद्धि और इक्विटी निवेश को दी मंजूरी

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कैबिनेट ने एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के लिए लागत में वृद्धि और इक्विटी निवेश को दी मंजूरी

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के लिए लागत में वृद्धि और नए इक्विटी निवेश को मंजूरी दी। यह कदम देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

Key Takeaways

  • कैबिनेट ने एचपीसीएल Rajasthan रिफाइनरी के लिए लागत में वृद्धि की।
  • नई लागत 79,459 करोड़ रुपए होगी।
  • 8,962 करोड़ रुपए का अतिरिक्त इक्विटी निवेश मंजूर।
  • रिफाइनरी की कुल क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन है।
  • उत्पादन में ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) परियोजना की लागत को 43,129 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 79,459 करोड़ रुपए करने का निर्णय लिया है, साथ ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा 8,962 करोड़ रुपए का अतिरिक्त इक्विटी निवेश भी मंजूर किया गया है।

इस संशोधन के बाद एचपीसीएल का कुल इक्विटी निवेश 19,600 करोड़ रुपए हो जाएगा।

राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित एचआरएल एक 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (एमएमटीपीए) क्षमता वाला ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जिसकी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।

कैबिनेट के एक बयान में बताया गया है कि एचआरआरएल रिफाइनरी एक महत्वपूर्ण रिफाइनरी है जिसमें प्रति वर्ष 1 मिलियन मीट्रिक टन पेट्रोल और 4 मिलियन मीट्रिक टन डीजल का उत्पादन करने की क्षमता है। इसके अलावा, यह 1 मिलियन मीट्रिक टन पॉलीप्रोपाइलीन, 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएलपीडीई (लीनियर लो डेंसिटी पॉलीइथिलीन), 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एचडीपीई (हाई डेंसिटी पॉलीइथिलीन) और लगभग 0.4 मिलियन मीट्रिक टन बेंजीन, टोल्यून और ब्यूटाडीन का उत्पादन कर सकेगी।

इन सभी उत्पादों का उपयोग परिवहन, फार्मा, पेंट, पैकेजिंग उद्योग आदि में किया जाएगा। यह परियोजना ऊर्जा की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की आयात पर निर्भरता को भी कम करेगी। इसकी निर्धारित वाणिज्यिक संचालन तिथि (एससीओडी) 1 जुलाई, 2026 है।

कैबिनेट का यह निर्णय देश की ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकताओं और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे आयात पर निर्भरता में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। इसके अलावा, यह परियोजना पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण और भारत को एक रिफाइनिंग हब बनाने में भी सहायक होगी। इस परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान एचआरएल ने रिफाइनरी इकाइयों के निर्माण में लगे विभिन्न हितधारकों के माध्यम से लगभग 25,000 श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न किए हैं।

यह परियोजना एचआरआरएल द्वारा लागू की जा रही है, जो एचपीसीएल (76 प्रतिशत) और राजस्थान सरकार (26 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है।

Point of View

बल्कि आर्थिक विकास में भी तेजी आएगी।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी क्या है?
एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी एक 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता की ग्रीनफील्ड रिफाइनरी है, जो पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन करती है।
इस परियोजना से क्या लाभ होंगे?
इससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
इस परियोजना की लागत में वृद्धि क्यों की गई?
कैबिनेट ने ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकताओं और पेट्रोकेमिकल की जरूरतों को देखते हुए लागत में वृद्धि की है।
इस रिफाइनरी के द्वारा कौन-कौन से उत्पाद बनाए जाएंगे?
यह रिफाइनरी पेट्रोल, डीजल, पॉलीप्रोपाइलीन, एलएलपीडीई, एचडीपीई और बेंजीन जैसे उत्पादों का निर्माण करेगी।
इस परियोजना की वाणिज्यिक संचालन तिथि क्या है?
इस परियोजना की निर्धारित वाणिज्यिक संचालन तिथि 1 जुलाई, 2026 है।
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