भारत की आर्थिक विकास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: निधि छिब्बर
सारांश
Key Takeaways
- महिलाएं क्रेडिट मार्केट में सक्रियता से भाग ले रही हैं।
- 76 लाख करोड़ रुपए का महिला कर्जदारों का क्रेडिट पोर्टफोलियो है।
- क्रेडिट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
- महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है।
- रिपोर्ट में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का लाभ दर्शाया गया है।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नीति आयोग की सीईओ निधि छिब्बर ने यह बताया है कि भारत में महिलाएं अब केवल छोटे ऋणों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे रिटेल और बिजनेस लेंडिंग के क्षेत्र में भी सक्रियता से कदम रखकर देश के क्रेडिट मार्केट को सशक्त बना रही हैं।
नीति आयोग द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि महिलाओं का औपचारिक क्रेडिट सिस्टम से जुड़ना एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है।
'कर्जदारों से निर्माता तक: महिलाएं और भारत का बदलता क्रेडिट बाजार' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और औपचारिक वित्तीय प्रणालियों के विस्तार ने महिलाओं को लगातार लाभान्वित किया है।
छिब्बर ने रिपोर्ट के विमोचन पर कहा कि आर्थिक विकास तब ही संभव है जब अधिक लोग बाजारों में कुशलता से भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि जब बाजारों में भागीदारी व्यापक, गहरी और कुशल होती है, तब आर्थिक विकास को बल मिलता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि महिलाएं लगातार इन परिवर्तनों को आकार दे रही हैं और उनका लाभ उठा रही हैं।
निधि छिब्बर ने बताया कि विशेष बात यह है कि अब महिला कर्जदार आरंभिक स्तर के क्रेडिट से आगे बढ़ते हुए रिटेल और व्यवसायिक आवश्यकताओं के लिए ऋण लेने की ओर अग्रसर हो रही हैं, जो उनकी बढ़ती वित्तीय क्षमता और गहरे आर्थिक जुड़ाव का संकेत है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि वर्तमान में भारत में महिला कर्जदारों के पास 76 लाख करोड़ रुपए का क्रेडिट पोर्टफोलियो है, जो कुल सिस्टम क्रेडिट का 26%25 है। यह वर्ष 2017 की तुलना में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी है। उस समय 16 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि हुई थी। इस अवधि में कुल क्रेडिट एक्सपोजर 4.8 गुना बढ़ गया है।
क्रेडिट का सक्रिय रूप से उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है, और 2017 से 2025 के बीच इसकी वार्षिक चक्रवृद्धि विकास दर 9%25 रही है।
नीति आयोग के 'महिला उद्यमिता मंच' के तहत ट्रांसयूनियन सिबिल और माइक्रोसेव कंसल्टिंग के सहयोग से तैयार की गई इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि क्रेडिट इकोसिस्टम में महिलाएं किस तरह से उन्नति कर रही हैं।
इसमें बड़े पैमाने पर क्रेडिट ब्यूरो से मिले डेटा को ग्रामीण महिला उद्यमियों से मिली जानकारियों के साथ सम्मिलित किया गया है।
'महिला उद्यमिता मंच' की प्रमुख अन्ना रॉय ने कहा कि महिलाओं द्वारा क्रेडिट के उपयोग का बढ़ता दायरा और विविधता भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।